लश्कर के 1200 आतंकवादियों ने तालिबान से मिलाया हाथ

लश्कर के 1200 आतंकवादियों ने तालिबान से मिलाया हाथ

क्या अब आतंकियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांठगांठ करके आतंकवादी कार्रवाइयों करने को अपनी स्थायी रणनीति बना लिया है। हाल ही में मिली कुछ खुफि़या जानकारियों के बाद एजेंसियां अब इसी सवाल पर मंथन कर रही हैं। हाल ही में मिले कई ऐसे सुराग इस संभावना को हकीकत साबित कर रहे हैं। पहले भी आतंकियों ने ऐसे गठजोड़ किए थे, लेकिन अब इनके ज्यादा व्यवस्थित व संगठित होने की ख़बरें हैं।

अलकायदा व जैश ए मोहम्मद ने मिलाया हाथ
सबसे बड़ी जानकारी ये है कि अल क़ायदा (Al-Qaeda) अब के साथ बहुत क़रीब से मिलकर कार्य कर रहा है। अब्दुल्ला अल्हंद नाम का एक आतंकी जो अल क़ायदा के लिए कार्य करता है ने हिंदुस्तान में पठानकोट हमले की तर्ज पर आत्मघाती हमले की योजना बनाई है। इसके लिए उसकी मदद जैश ए मोहम्मद करेगा। यानि हमले की स्थान की रेकी करना, हमलावर तैयार करना व हमले की पूरी कार्रवाई जैश ए मोहम्मद करेगा। लेकिन इस हमले की ज़िम्मेदारी अल क़ायदा लेगा। इसके लिए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मुज़फ्फराबाद ज़़िले के ख़ैर गली नामक गांव में ट्रेनिंग कैंप खोला गया है।

लश्कर के 1200 आतंकवादियों ने तालिबान से हाथ मिलाया
दूसरी बड़ी ख़बर ये है कि अफ़ग़ानिस्तान के ग़ज़नी ज़िले के अंदार इलाक़े में जैश ए मोहम्मद व लश्करे तैयबा के क़रीब 1200 आतंकी तालिबान के साथ मिलकर लड़ने के लिए इकट्ठे हुए हैं। तालिबान ने 12 अप्रैल को अफ़ग़ानिस्तान की सरकार व नाटो सेनाओं पर हमले के लिए नए अभियान की घोषणा की थी, जिसे अल फ़तह नाम दिया गया है। इन आतंकियों की ट्रेनिंग के लिए पाक के क़बायली इलाक़ों में ख़ैबर व ख़ुर्रम ज़िलों में कैम्प खोले गए हैं।

भारत में ISIS की दस्तक
अंतरराष्ट्रीय खुफ़िया एजेंसियों के सूत्रों का बोलना है कि ये नया गठजोड़ किसी आतंकी कार्रवाई के लिए होने वाली साझेदारी से भी आगे की रणनीति है। पहले भी आतंकी रैकेट एक-दूसरे की मदद करते रहे हैं, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक संगठन बनाकर भिन्न-भिन्न राष्ट्रों में आतंकवाद फैलाने की तैयारी है।

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हाल ही में आईएसआईएस ने हिंदुस्तान में अपनी एक विलायत यानि विदेश में ठिकाना बनाने की घोषणा की थी। इंडोनेशिया व थाईलैंड में आतंकी हरक़तें बढ़ रही हैं। श्रीलंका, बांगलादेश व म्यांमार में सक्रिय लोकल आतंकी गिरोहों को दूर बैठकर संचालित किया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञ का बोलना है, 'लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि इन आतंकियों को एक छत के नीचे लाने का कार्य कौन करेगा व क्या वही पिछले कुछ वक्त से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ताक़तवर आतंकी रैकेट की गैरहाज़िरी को भी भरेगा। '