विभिन्न देशों में बच्चों के टीकाकरण की स्थिति पर एक नजर...

विभिन्न देशों में बच्चों के टीकाकरण की स्थिति पर एक नजर...

बच्चों में कोरोना संक्रमण के गंभीर मामले अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद उन्हें पूर्ण सुरक्षा देने के लिए टीके की जरूरत जताई जाती रही है। टीका लगाकर बच्चों को वायरस से पूरी तरह सुरक्षित रखना इसलिए भी जरूरी है, ताकि संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सके। इससे नए वैरिएंट का खतरा कम होता है। अब तक कई देश बच्चों के लिए टीके को मंजूरी दे चुके हैं। इनमें ज्यादातर देशों ने 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों के लिए टीके को मंजूरी दी है। 12 से कम उम्र के लिए टीके को मंजूरी देने वाले चुनिंदा देश ही हैं। विभिन्न देशों में बच्चों के टीकाकरण पर एक नजर :

क्यूबा सबसे आगे : बच्चों की उम्र के हिसाब से देखा जाए तो टीके को मंजूरी देने के मामले में क्यूबा सबसे आगे है। वहां सरकार ने पिछले महीने दो साल से बड़े सभी बच्चों को टीका लगाने की स्वीकृति दी थी। अब भारत में भी दो से 18 साल के बच्चों के टीकाकरण की राह खुली है।


चीन, चिली और अल सल्वाडोर में भी मंजूरी : चीन ने तीन साल से बड़े बच्चों को टीका लगाने की मंजूरी दी है। वहां सिनोवैक और कोरोनावैक टीके लगाए जा रहे हैं। चिली में भी चीन की सिनोवैक वैक्सीन ही लगाई जा रही है, लेकिन वहां छह साल से बड़े बच्चों को ही टीका लगाने की स्वीकृति दी गई है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में सिनोफार्म टीके को तीन साल से बड़े बच्चों के लिए मंजूर किया गया है। हालांकि यूएई सरकार ने स्पष्ट किया है कि टीकाकरण पूरी तरह स्वैच्छिक होगा। 


कुछ देशों की डगर मुश्किल : इन बढ़ते कदमों के बीच कुछ ऐसे देश भी हैं जिनके लिए बच्चों के टीकाकरण की राह बहुत मुश्किल है। इसकी बड़ी वजह है वहां टीकों की कम उपलब्धता। आंकड़े बताते हैं कि जहां दुनियाभर में 47 फीसद से ज्यादा आबादी को टीके की कम से कम एक डोज लग चुकी है, वहीं गरीब देशों में अब तक मात्र 2.5 फीसद आबादी को ही टीका लग पाया है। इन देशों के लिए अभी बच्चों के टीकाकरण के बारे में सोच पाना भी संभव नहीं है। इनके अलावा, कांगो जैसे देश भी हैं, जहां टीके को लेकर ङिाझक बहुत ज्यादा है। यह झिझक आम जनता में ही नहीं, बल्कि नेताओं और अधिकारियों में भी है। कांगो के राष्ट्रपति फेलिक्स शिसेकेदी ने टीकाकरण अभियान शुरू होने के छह महीने से भी ज्यादा समय बाद पहली डोज लगवाई है।

यूरोप में टीकाकरण : यूरोपीय देशों में अभी 12 साल से बड़े बच्चों को ही टीका लगाने की स्वीकृति दी गई है। यूरोपियन मेडिसिंस एजेंसी (ईएमए) ने मई में ही 12 साल से बड़े बच्चों के लिए फाइजर और बायोएनटेक के टीके को स्वीकृति दे दी थी। फ्रांस, डेनमार्क, जर्मनी, इटली, आयरलैंड, स्पेन और पोलैंड भी 12 साल से बड़े बच्चों को टीका लगा रहे हैं। कई यूरोपीय देश इस उम्र के आधे से ज्यादा बच्चों को कम से कम पहली डोज लगा भी चुके हैं। स्विट्जरलैंड भी जून से ही 12 साल से बड़े बच्चों को टीका लगा रहा है। स्वीडन ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाया है। अमेरिका और कनाडा में भी 12 साल से बड़े बच्चों को फाइजर और माडर्ना के टीके लगाए जा रहे हैं।


बांग्लादेश में हिंदुओं से ज्यादती: कट्टरपंथियों के विरूद्ध इस्कॉन श्रद्धालु एकजुट, दुनिया के 700 मंदिरों पर प्रदर्शन

बांग्लादेश में हिंदुओं से ज्यादती: कट्टरपंथियों के विरूद्ध इस्कॉन श्रद्धालु एकजुट, दुनिया के 700 मंदिरों पर प्रदर्शन

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले और इस्कॉन मंदिर में की गई तोड़-फोड़ के विरूद्ध संस्था से जुड़े श्रद्धालु शनिवार को सड़क पर उतर आए हैं. इस्कॉन के आह्वान पर पूरे विश्व के इस्कॉन श्रद्धालु हमले के विरूद्ध विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और आरोपियों पर कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. यह प्रदर्शन दुनिया के 150 राष्ट्रों में स्थित 700 इस्कॉन मंदिरों पर चल रहा है. न्यूज एजेंसी एएनआई की ओर से कोलकाता में चल रहे विरोध प्रदर्शन की फोटोज़ भी जारी की गई हैं.


एक श्रद्धालु की हुई थी मौत 
16 अक्तूबर को बांग्लादेश के नोआखाली में उपद्रवी भीड़ द्वारा इस्कॉन मंदिर पर हमला कर दिया गया था. इस दौरान भीड़ ने मंदिर परिसर में घुसकर तोड़फोड़ की, जिसमें से श्रद्धालु की मृत्यु भी हो गई थी. इसके अतिरिक्त घटना से पहले भी दुर्गा पंडालों को बांग्लादेश में कई स्थान निशाना बनाया गया था. इन हमलों में भी चार हिंदुओं की मृत्यु हो गई थी. 

लगाई गई थी आग 
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों के क्रम में कई हिंदू परिवारों के घरों में भी आग लगा दी गई थी. इन हमलों में 20 से अधिक घर पूरी तरह जलकर खाक हो गए थे.