उत्तराखंड में कोरोना! 24 घंटे में सामने आए 2904 नए मामले, कोविड में अनाथ हुए बच्चों को मिलेगी आपदा राहत राशि

उत्तराखंड में कोरोना! 24 घंटे में सामने आए 2904 नए मामले, कोविड में अनाथ हुए बच्चों को मिलेगी आपदा राहत राशि

प्रदेश में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 2904 नए मामले सामने आए हैं, जबकि चार कोरोना संक्रमितों की मौत हो गई। दूसरी ओर, बुधवार को 1241 मरीजों ने कोरोना से जंग जीत ली।



स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में सामने आए 2904 नए मामलों में अल्मोड़ा में 19, बागेश्वर में 127, चमोली में 06, चंपावत में 30, देहरादून में 1016, हरिद्वार में 337, नैनीताल में 397, पौड़ी में 89, पिथौरागढ़ में 127, रुद्रप्रयाग में 252, टिहरी में 85, ऊधमसिंह नगर में 384 और उत्तरकाशी में 35 मामले शामिल हैं। प्रदेश में अब 32880 एक्टिव कोरोना केस हैं, जिनमें सर्वाधिक 14387 केस देहरादून जिले के हैं।

कोविड में अनाथ हुए बच्चों को मिलेगी आपदा राहत राशि

प्रदेश के कोविड में अनाथ हुए बच्चों को आपदा राहत राशि मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हलावा देते हुए मुख्य सचिव डॉ.एसएस संधू ने समस्त जिलाधिकारियों को इस संबंध में आदेश जारी किया है। कहा गया है कि 31 जनवरी तक इस तरह के बच्चों को राहत राशि उपलब्ध कराते हुए इससे शासन को अवगत कराएं।

मुख्य सचिव की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने बाल स्वराज पोर्टल पर अपलोड ऐसे बच्चे जिनके दोनों अभिभावक या एकमात्र जीवित अभिभावक की कोविड 2019 से मौत हो गई है, उन्हें आपदा राहत राशि दी जाए। बाल स्वराज पोर्टल पर 25 जनवरी 2022 तक उत्तराखंड के इस तरह के 162 बच्चे पंजीकृत हैं।

जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी व आईसीडीएस सुपरवाइजर की टीम बनाकर ऐसे बच्चों का सर्वेक्षण किया जाए। यह देखा जाए कि इन बच्चों को आपदा राहत राशि मिली या नहीं मिली। यदि इन बच्चों को यह राशि नहीं मिली तो उन्हें राशि उपलब्ध कराई जाए। जबकि एक फरवरी तक इस संबंध में रिपोर्ट सचिव आपदा प्रबंधन को उपलब्ध कराई जाए।


भड़काऊ भाषण के मुद्दे में त्यागी को उच्चतम न्यायालय ने उपचार कराने के लिए तीन महीने की ज़मानत

भड़काऊ भाषण के मुद्दे में त्यागी को उच्चतम न्यायालय ने उपचार कराने के लिए तीन महीने की ज़मानत

 भड़काऊ भाषण के मुद्दे में त्यागी को उच्चतम न्यायालय ने उपचार कराने के लिए तीन महीने की ज़मानत दी है इससे पहले त्यागी के वकील ने दिल रोग के उपचार के लिए ज़मानत की मांग की थी इस याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को उच्चतम न्यायालय ने ज़मानत मंज़ूर करते हुए आदेश दिया की ज़मानत के दौरान वह कोई भड़काऊ भाषण नहीं देंगे

मंगलवार की सुनवाई से पहले हरिद्वार धर्म संसद मुद्दे से जुड़ी त्यागी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड गवर्नमेंट से उत्तर मांगा था न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने कठोर टिप्पणी करते हुए क​हा था, चूंकि वे स्वयं संवेदनशील नहीं है, इससे पूरा माहौल खराब हो रहा है पीठ ने त्यागी की जमानत याचिका पर राज्य गवर्नमेंट और अन्य को नोटिस जारी किया था

त्यागी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने बोला था कि त्यागी लगभग छह महीने से हिरासत में हैं और वह कई रोंगों से पीड़ित हैं उन्होंने बोला कि त्यागी के विरूद्ध दर्ज मुद्दे में अधिकतम सजा तीन वर्ष ही है और इन आधारों पर उन्हें बेल दी जाना चाहिए उल्लेखनीय है कि इस वर्ष मार्च में उत्तराखंड हाई कोर्ट द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज कर दिए जाने के बाद त्यागी ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था

धर्म संसद में हेट स्पीच का सिलसिला
गौरतलब है कि हरिद्वार धर्म संसद में कई साधु संतों ने मुसलमानों के विरूद्ध आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं इतना ही नहीं, धर्म संसद में महात्मा गांधी को भी नहीं बख्शा गया एक साधु कालीचरण महाराज ने तो बापू तक को बुरा भला कह दिया उन्हें हिरासत में भी लिया गया था दूसरी ओर मुस्लिम से हिन्दू बने वसीम रिजवी उर्फ त्यागी ने भी आपत्तिजनक बयान दिए थे हरिद्वार के बाद दिल्ली में धर्म संसद हुई थी और वहां भी भड़काऊ बयान दिए गए