केंद्रीय सूचना आयोग ने कल याचिका की सुनवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय को दी बड़ी राहत

केंद्रीय सूचना आयोग ने कल याचिका की सुनवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय को दी बड़ी राहत

केंद्रीय सूचना आयोग ने कल यानि मंगलवार को एक याचिका की सुनवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय को बड़ी राहत दी है. आयोग ने पनामा पेपर्स लीक मुद्दे में एक याचिका की सुनवाई करते हुए बोला कि प्रवर्तन निदेशालय पनामा पेपर्स लीक में दर्ज कर चोरों के नाम बताने के लिए बाध्य नहीं है. आरटीआई के तहत 2017 में दुर्गा प्रसाद चौधरी ने पनामा पेपर्स में दर्ज चोरों के नाम, उनके विरूद्ध की गई कार्रवाई व जाँच में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी मांगी थी. प्रवर्तन निदेशालय ने धारा 24(1) के तहत कर जानकारी देेने से इन्कार कर दिया था जिसके बाद चौधरी ने आयोग के समक्ष याचिका दी थी.

याचिका पर सुनवाई के दौरान चौधरी ने तमाम मीडिया रिपोर्टों का हवाला दिया व बोला कि उच्च स्तर का करप्शन इसमें व्याप्त है तब भी जानकारी नहीं दी गई. प्रवर्तन निदेशालय इस दौरान बोला कि इसमें उच्च स्तर के करप्शन के इशारा हैं इसलिए उन्हें जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई. प्रवर्तन निदेशालय ने कानून के तहत उसे मिली छूट का हवाला दिया व बोला कि मुद्दा कोर्ट में है इसलिए इसकी जानकारी को साझा नहीं किया जा सकता.

इस पर सूचना आयुक्त बिमल जुलका ने कहा, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने व उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई व्यवस्था के तहत यह तय किया जाता है कि प्रवर्तन निदेशालय को कर चोरों के नाम उजागर नहीं करने का अधिकार है. मालूम हो कि पनामा पेपर्स में, इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स द्वारा पनामियन लीगल फर्म मॉसैक फोंसेका के रिकॉर्ड की जाँच में संसार के कई नेताओं व प्रसिद्ध शख़्सियतों का नाम सामने आया था, जिन्होंने कथित तौर पर विदेशी कंपनियों में पैसा जमा किया था. इस लीक के बाद कई राष्ट्रों की सरकारें हिल गई थीं. इसमें हिंदुस्तान के भी कई बड़े शख़्सियतों के नाम आए थे.