कोरोना वायरस को रोकने के लिए चाइना ने किया यह बड़ा आविष्कार

कोरोना वायरस को रोकने के लिए चाइना ने किया यह बड़ा आविष्कार

यूरोप (Europe) कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी का केन्द्र बना हुआ है. इससे सबक लेते हुए कई राष्ट्रों में सरकारें लोगों से घरों में बंद रहने के लिए कह रही हैं व वायरस को फैलने से रोकने के लिए पाबंदियां लगा रही हैं. 

कोरोना वायरस को रोकने के लिए देश को पूरी तरह बंद कर दिया गया है. हिंदुस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक कोरोना वायरस का उपचार अभी तक नहीं मिल पाया है. इस कोरोना वायरस से लड़ने के लिए वैज्ञानिक दिन रात मेहनत कर रहे हैं ताकि वैक्सीन बनाई जा सके. कोरोना वायरस को लेकर लोग तमाम तरह के ढंग अपना रहे हैं. रोजमर्रा की जिंदगी में कोरोना को फैलने से रोकने के लिए संसार के तमाम देश नए-नए आइडियाज पर कार्य कर रहे हैं. इस बीच चाइना ने कोरोना के उपचार के लिए एेसी दवा का प्रयोग करने का सुझाव दिया है जो जंगली जानवरों के अंगों से बनी है. चाइना के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने कोरोना के मरीजों के उपचार के लिए कुछ इलाज के बारे में बताया है, इसमें एक ऐसी दवा का जिक्र किया गया है जिसमें जंगली भालू के बाइल (गॉल ब्लैडर के अंदर पाया जाने वाला तरल पाचक पदार्थ), बकरी के सींग व तीन प्रकार के पौधों का प्रयोग किया गया है. इसका प्रयोग होने से पहले ही इसका विरोध प्रारम्भ हो गया है. लोगों ने इसे नापंसद किया है. लोगों का बोलना है कि एक तरफ कोरोना वायरस जानवरों से फैला है वहीं दूसरी तरफ जानवरों के शरीर से ही दवा बनाई जा रही है. यह पूरी तरह गलत है.

चीन के सुझाव के बाद जताया गया इसका विरोध

चीन के इस सुझाव के तुरंत बाद ही पशु कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध भी प्रारम्भ कर दिया, उन्होंने इसे बेहद निराशाजनक व दुखद बताया. वैज्ञानकों की मानें तो कोरोना वायरस चमगादड़, सांप, पैंगोलिन या किसी अन्य जानवर से उत्पन्न हुआ है. चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी जनवरी में बोला कि कोरोनो वायरस वुहान के एक मार्केट से जानवरों से निकलकर इंसानों के अंदर आया था. तीन महीने पहले यानी जनवरी से पहले इस वायरल ने महामारी का रूप ले लिया है. चाइना के बाद इटली में सबसे ज्यादा इस वायरस से मृत्यु की समाचार है. वहीं हिंदुस्तान ने कठोर कदम उठाते हुए सारे देश को लॉकडाउन कर दिया है. ताकि लोग घरों में रहे व ये लगातार फैल रही बीमारी एक दूसरे से न फैले.