इकॉनमी को गति देने के लिए RBI नीतिगत दर में लगातार छठवीं बार कटौती

इकॉनमी को गति देने के लिए RBI नीतिगत दर में लगातार छठवीं बार कटौती

इकॉनमी को गति देने के लिए RBI (Reserve Bank of India) नीतिगत दर (Policy Rates) में लगातार छठवीं बार कटौती कर सकता है।  भारतीय रिजर्व बैंक की द्विमासिक मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की मीटिंग आज 2 दिसंबर से होगी। इस तीन दिवसीय मीटिंग में लिए गए फैसलों की जानकारी 5 दिसंबर को दी जाएगी।  विनिर्माण गतिविधियों में गिरावट के कारण आर्थिक वृद्धि दर (Growth Rate) घटकर 4.5 फीसदी पर आ गई है। यह आर्थिक वृद्धि का छह वर्ष से अधिक का न्यूनतम आंकड़ा है। केंद्रीय बैंक 2019 में अब तक पांच बार नीतिगत दर में कटौती कर चुका है। अगर ऐसा होता है तो आपकी कर्ज़ EMI कम हो जाएगी।

क्यों हो सकती है ​नीतिगत दरों में कटौती
सुस्त पड़ती वृद्धि को गति देने व वित्तीय प्रणाली (Financial System) में धन उपलब्धता की स्थिति को बढ़ाने के लिए नीतिगत दर में कुल मिलाकर 1.35 फीसदी की कमी की गई है। इस समय रेपो दर 5.15 फीसदी है। एक बैंकर ने पहचान उजागर नहीं करते हुए बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक गवर्नर (Shaktikanta Das) ने पिछले दिनों बोला था कि जब तक आर्थिक वृद्धि में सुधार नहीं होता तब तक ब्याज दरों में कटौती की जाएगी।

 

3 दिसंबर से प्रारम्भ होगी मीटिंग
इससे इस बात की आसार है कि तीन दिसंबर से प्रारम्भ होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर घटाई जा सकती है। आईएचएस मार्किट के मुख्य अर्थशास्त्री (एशिया प्रशांत) राजीव विश्वास ने कहा, भारतीय रिजर्व बैंक ने अक्टूबर में दरों में कटौती के साथ मौद्रिक नीति को उदार बनाये रखने का निर्णय किया था। इस स्थिति में आर्थिक मोर्चे पर सुस्ती बनी रहने से नीतिगत दर में कटौती की आसार है। '

क्यों है नीतिगत ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश

डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने बोला कि मुद्रास्फीति नीचे बनी हुई है व अर्थव्यवस्था की क्षमता को देखते हुए इसके नीचे ही बने रहने की उम्मीद है। इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक के पास नीतिगत दर में कटौती की गुंजाइश बनी हुई है। '

 

4 प्रतिशत के स्तर तक गिर सकती है जीडीपी दर
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के मुख्य अर्थशास्त्री निखिल गुप्ता ने कहा, 'हमें संभावना है कि अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में बेहतर वृद्धि देखने को नहीं मिले। त्योहारी महीना होने के बावजूद प्रमुख सूचकांकों में अक्टूबर में गिरावट का रुख रहा। हमें लगता है कि आर्थिक वृद्धि दर तीसरी तिमाही में घटकर 4 फीसदी के करीब आ सकती है। '