शासन ने कोरोना उपचार के चार्ज को लेकर की यह बड़ी घोषणा

शासन ने कोरोना उपचार के चार्ज को लेकर की यह बड़ी घोषणा

यूपी के व्यक्तिगत अस्पतालों में उपचार करा रहे मरीजों से अब मनमुताबिक चार्ज नहीं वसूला जा सकेगा. रोजाना 10 हजार से अधिकतम 18 हजार उपचार रुपये तक का खर्च ही लिया जा सकेगा. इससे अधिक वसूले जाने पर अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई का रास्ता भी साफ हो गया है. 


व्यक्तिगत कोविड अस्पतालों में कोरोना उपचार के नाम पर मनमानी चिकित्सा शुल्क वसूली की शिकायतें आने पर शासन ने उपचार की दरें शहर वार जारी की है. तीन श्रेणी में बांट कर उपचार की दरों का निर्धारण किया गया है. 
सबसे खास यह है कि उपचार के नाम पर अब पीपीई किट का अलग से कोई चार्ज अस्पताल नहीं वसूल सकेंगे. उधर, जिला स्तर पर भी प्रशासन ने अस्पतालों को लिखित आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि अगर किसी ने भी निर्धारित दरों से अधिक वसूले तो उनके विरूद्ध कठोर कार्रवाई होगी.चिकित्सा शुल्क तय करने के लिए नगरों को वर्गीकृत कराने के साथ ही अस्पतालों को भी दो श्रेणियों में बांटा गया है. एनएबीएच से मान्यता प्राप्त अस्पताल सामान्य मरीजों से 10,000 रुपये रोजाना के हिसाब से चार्ज कर सकेंगे. 

सामान्य मरीज को देखभाल के अतिरिक्त अस्पतालों को ऑक्सीजन की सुविधा भी मिलेगी. गंभीर मरीज, जिन्हें आईसीयू में रखा जाएगा, उनसे रोजाना 15,000 रुपये चार्ज किए जाएंगे. अति गंभीर मरीज यानी जिन्हें वेंटिलेटर की आवश्यकता होगी. अब उन मरीजों से 18,000 रुपये रोजाना के हिसाब से चार्ज वसूला जा सकेगा. 

पीपीई किट के लिए अलग से चार्ज नहीं वसूला जाएगा. इसी प्रकार एनएबीएच से गैर मान्यता वाले अस्पताल सामान्य मरीज से 8,000 रुपये, गंभीर मरीज से 13,000 रुपये व अति गंभीर मरीज से 15,000 रुपये रोजाना के हिसाब से चार्ज वसूल सकेंगे. बी श्रेणी के शहरों में चिकित्सा शुल्क ए श्रेणी के मुकाबले 60 प्रतिशत व सी श्रेणी के शहरों में ए श्रेणी के मुकाबले 80 प्रतिशत कम होगा. इससे उन मरीजों को खासा फायदा मिलेगा जो सरकारी अस्पतालों में उपचार कराना नहीं चाहते हैं. 

गाजियाबाद ए श्रेणी में 

शासन ने सारे सूबे के शहरों को ए, बी व सी तीन श्रेणियों में बांटकर श्रेणी के मुताबिक इलाज के रेट तय किए हैं. गाजियाबाद समेत कानपुर, लखनऊ, आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, बरेली, गोरखपुर, मेरठ व नोएडा-ग्रेटर नोएडा को ए श्रेणी में रखा है. 
 
15 प्रतिशत बेड निशुल्क, बाकी पर निर्धारित चार्ज ही लेना होगा
जिले में सात प्राइवेट कोविड अस्पतालों का संचालन हो रहा है. इनमें स्वास्थ्य विभाग ने 15 प्रतिशत बेड गरीब मरीजों के लिए आरक्षित किया है. इनमें आईसीयू वाले बेड भी शामिल होंगे, जहां जीवन सपोर्ट सिस्टम (वेंटिलेटर) उपलब्ध रहेगा. 

कौशांबी स्थित यशोदा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में 30 कोविड बेड में से दो बेड, नेहरू नगर स्थित यशोदा अस्पताल में से 55 में दो, वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में 49 में तीन, वैशाली स्थित नवीन हॉस्पिटल में 60 में दो, वसुंधरा स्थित ली क्रेस्ट हॉस्पिटल में 100 में दो, वैशाली स्थित चंद्रलक्ष्मी हॉस्पिटल में 50 और प्रताप विहार स्थित फ्लोरेस हॉस्पिटल के 100 कोविड बेड में एक-एक बेड रिजर्व किए गए हैं. रिजर्व बेड के अलावा शेष बेड पर अब निर्धारित उपचार खर्च से ज्यादा नहीं ले सकेंगे. 

अस्पतालों की मोटी कमाई का उठा था मुद्दा
उपचार के नाम पर अस्पतालों की तरफ से मोटा मुनाफा कमाए जाने व मरीजों को भर्ती न करने का मुद्दा बीजेपी और कांग्रेस पार्टी की तरफ से उठाया गया था. पूर्व मेयर अशु वर्मा, बीजेपी नेता अमित त्यागी व कांग्रेस पार्टी जिलाध्यक्ष बिजेंद्र यादव ने कीमतें निर्धारित करने की मांग उठाई थी. 

उसके बाद मेयर आशा शर्मा व बीजेपी महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा ने बीते दिनों अपर मुख्य सचिव रजनीश दूबे के सामने व्यक्तिगत अस्पतालों की मनमानी की मामला रखा. उन्होंने बोला कि अस्पताल उपचार के नाम पर मोटी कमाई कर रहे हैं व बिना कैश वालों को भर्ती नहीं किया जा रहा है. 

अधिक शुल्क पर इन नंबरों में करें शिकायत 
0120- 2965798, 2965799, 2965757, 2965758, 2829040, 4186453, 8826737248, 99104263741

जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने बोला कि हम लंबे समय से प्रयासरत थे कि अस्पतालों में उपचार की कीमतें निर्धारित हों. इसके लिए शासन को पूर्व में प्रस्ताव भी भेजा गया था. अब शासन की तरफ से दरें निर्धारित होने के बाद सभी अस्पतालों को जानकारी मुहैया करा दी गई है. अगर फिर भी कोई अस्पताल अधिक शुल्क लेता है तो उसके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी.