आइए जानते हैं क्यों होता है इंसान को डिप्रेशन

 आइए जानते हैं क्यों होता है इंसान को डिप्रेशन

भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को अकेला महसूस करना आदमी को उदासी ओर ले जाता है। अकेले रहने से आदमी के अंदर नकारात्मकता आ जाती है व वे हर समय खुद को कमजोर महसूस करने लगता है। 

ऐसे में उन्हें लगता है कि संसार में उनका कोई नहीं है। आदमी के अंदर अब तक जो अकेलापन घर कर गया है यह इंसान को अंदर ही अंदर कचोटता रहता है। आखिर में आदमी ऐसी अवस्था में जा पहुंचते हैं, जब वो अपने आप से ही नफरत करने लगता है।  ऐसे में इंसान कोई ऐसा कदम उठा लेता हैं, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता है। इंसान में ऐसे लक्षणों को अवसाद (डिप्रेशन) कहते हैं। आइए जानते हैं कि इंसान को डिप्रेशन क्यों होता है

हार्मोन में गड़बड़ी
myUpchar से जुड़ीं डाक्टर मेधावी अग्रवाल बताती हैं कि हार्मोन्स में असंतुलन होने के कारण भी आदमी अवसाद में जा सकता है। शरीर के सभी अंगों में बदलाव का एक बड़ा कारण हार्मोन्स असंतुलन होता है, जिसके कारण आदमी अजीब तरह का व्यवहार करने लगता है। ऐसे आदमी को ज्यादातर सकारात्मक माहौल में रहने का कोशिश करना चाहिए।

शारीरिक असुंदरता



कई लोगों के अंदर उनके छोटे कद, सांवले रूप या शरीर की अजीब सी बनावट के कारण भी हीन भावना पनपने लगती है। इसके अतिरिक्त कार्यालय में साथियों के द्वारा किसी को हमेशा निर्बल व अयोग्य दिखाने पर भी आदमी अवसाद का शिकार हो जाता है।

आनुवंशिक कारण
अवसाद भी अन्य तरह की आनुवंशिक बीमाररियों की तरह है। यदि किसी के परिवार में कोई मेम्बर डिप्रेशन से ग्रसित है, तो भविष्य में उनके बच्चों को भी 70 फीसद तक डिप्रेशन होने की आसार हो सकती है। कई शोध में ये खुलासा हो चुका है कि माता-पिता के आनुवंशिक व्यवहार का बच्चों पर भी बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ता है।

अन्य कारण
डिप्रेशन होने के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं जैसे आकस्मित कोई अनचाही घटना होना, घर में अजीब वातावरण का होना, किसी समीप आदमी की आकस्मित मृत्यु होना। किसी नजदीकी का बिछड़ जाना या आत्म सम्मान को ठेस पहुंचना। इसके अतिरिक्त व भी कई कारणों से लोग डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं।

ऐसे निकल सकते हैं डिप्रेशन से बाहर
अवसाद से ग्रसित लोगों को अपने संबंधियों व अपने दोस्तों के साथ ज्यादा समय व्यतीत करना चाहिए। इसके अतिरिक्त अपने किसी खास आदमी से अपने दिल की बात करनी चाहिए, ताकि वे उनकी मदद कर सकें। सायकोलॉजिस्ट से भी परामर्श लेते रहना चाहिए व अपनी दिनचर्या में भी बदलाव लाना चाहिए। जैसे- नियमित व्यायाम, प्राणायाम करने व पोषणयुक्त भोजन करने से भी अवसाद की बीमारी दूर होती है। डिप्रेशन के शिकार लोगों के परिवार के सदस्यों को भी उनका समर्थन करते रहना चाहिए ताकि उन्हें अच्छा लगे।

डिप्रेशन से ग्रसित लोग ध्यान रखें ये बातें
अवसाद से ग्रस्त लोगों को किसी भी हाल में कोई गलत कदम उठाने के बारे में नहीं सोचना चाहिए। यदि कभी कोई भी ऐसा निगेटिव विचार मन में आये तो चिकित्सक से बात करना चाहिए। चिकित्सक उनकी हर तरह से मदद करने की प्रयास करेंगे व उन्हें डिप्रेशन से बाहर निकालने की प्रयास करेंगे। अवसाद होने पर इसका उपचार ढूंढ़ने की प्रयास करनी चाहिए, वरना इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।