जाने, अल्जाइमर के लक्षण व कारण

जाने, अल्जाइमर के लक्षण व कारण

डिमेंशिया रोग का आम प्रकार है अल्जाइमर. इसमें आदमी की याददाश्त व सोचने संबंधी आदतें प्रभावित होती हैं.
अल्जाइमर रोग डिमेंशिया का एक प्रकार है, इसमें मस्तिष्क की कोशिकाओं का आपस में सम्पर्क समाप्त हो जाता है व वे मरने लगती हैं. आमतौर पर यह समस्या 60 साल से अधिक आयु के लोगों में पाई जाती है. इसमें मस्तिष्क में कुछ रसायनों की मात्रा कम होने लगती है. ये रसायन मस्तिष्क में सूचनाओं के लेन देन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं. यह एक लगातार बढऩे वाला रोग है. रोग के बढऩे की दर हरेक आदमी में अलग होती है.
लक्षण पहचानना मुश्किल-

शुरुआती चरण में लक्षणों को न पहचान पाना एक आम समस्या है. याददाश्त में समस्या हो तो भी इसे बढ़ती आयु का नतीजा समझा जाता है व आदमी या परिवार वाले चिकित्सक से सामान्य चेकअप के वक्त इसका जिक्र तक नहीं करते. अन्य समस्याओं जैसे कि कन्फ्यूजन, उदासीनता, चरित्र में परिवर्तन आदि में भी लोग यह नहीं सोचते कि यह किसी रोग के कारण है. इन कारणों की वजह से कई डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्तियों का शुरुआती समय में उपचार नहीं होता व परिवार वाले आदमी को चिकित्सक के पास तभी ले जाते हैं जब डिमेंशिया मध्य या अग्रिम अवस्था में होता है. इसके शुरुआती लक्षण हो सकते हैं-

व्यक्तित्व में बदलाव.
बोलने में कठिनाई होना.
सामाजिक तौर-तरीके भूल जाना.
चलने या संतुलन में परेशानी.
लोगों से कटे-कटे रहना.
इन्हें रहता है खतरा

फैमिली हिस्ट्री होने पर इसकी संभावना बढ़ जाती है.
डाउन सिंड्रोम (बौद्धिक क्षमता और सोचने समझने के स्तर में कमी) से पीडि़त लोगों में इसका खतरा रहता है.
कभी सिर में गंभीर चोट लगी हो तो इसका खतरा बढ़ जाता है.
जो धूम्रपान करते हैं, शरीर में ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक होता है या जिन्हें डायबिटीज होती है, उनमें इस रोग की संभावना अधिक होती है.
इलाज-

इसका इलाज परीक्षण, ब्लड जाँच व ब्रेन स्कैन पर निर्भर करता है. यह भी संभव है कि आदमी को ऐसा डिमेंशिया हो जो दवा से दूर नहीं किया जा सकता. लेकिन कुछ ऐसी दवाइयां भी हैं जो रोग को समाप्त नहीं कर सकतीं लेकिन लक्षणों को कम कर सकती हैं व आदमी का ज़िंदगी पहले से अधिक सामान्य होने कि सम्भावना है. इससे याददाश्त में सुधार होता है. इलाज को टालते रहने से बीमार इस राहत से वंचित रहते हैं.
देखभाल के ठीक ढंग सीखना और उपयोग में लाना तभी अच्छा होने कि सम्भावना है जब परिवार समझे कि आदमी को डिमेंशिया है व फिर उसके लिए व्यवहार व अन्य ढंग बदलें.
जोखिम कम करने के उपाय

ये आदतें बेहतर दिमाग रखने मे सहायता गार साबित हो सकती हैं-
मानसिक व्यायाम- शारीरिक व मानसिक गतिविधियों को हर रोज बढ़ाएं. व्यायाम आपके मस्तिष्क को स्वस्थ रखता है. हल्का व्यायाम मनोरोगों को रोकने के लिए सबसे प्रभावी उपाय होने कि सम्भावना है.
स्वस्थ खानपान : साबुत अनाज, फल, सब्जियां व सूखे मेवे. इनके अतिरिक्त शोध में पाया गया है कि हल्दी व नारियल ऑयल रक्षात्मक होने के साथ-साथ नए मस्तिष्क कोशिकाओं की वृद्धि में सहायता गार साबित होते हैं.

वजन नियंत्रण में रखना जरूरी-
धूम्रपान न करें. हमेशा अपने पुराने रोगों के उपचार के लिए चिकित्सक की सहायता लें जैसे उच्च रक्तचाप, उच्च रक्तशर्करा व असामान्य लिपिड.
मन को चुनौती दें- सेवानिवृत्ति को टालें या खुद को सुकून देने वाले किसी अच्छे काम में खुद को लगाएं. एक से अधिक भाषा सीखना व कहना भी बहुत ज्यादा सहायता गार साबित होने कि सम्भावना है.
एक मजबूत सामाजिक नेटवर्क की कमी, निगेटिव मानसिकता व उद्देश्य का अभाव डिमेंशिया के खतरे को बढ़ा सकता है. ऐसे में सकारात्मक सोच व जीने का उद्देश्य तो जरूर होना ही चाहिए.