महंगी क्रीम की जगह आजमाए ये कुदरती चीजें

महंगी क्रीम की जगह आजमाए ये कुदरती चीजें

बढती उम्र के साथ त्वचा की उम्र भी बढती है और एक समय के बाद यह त्वचा पर दिखने लग जाता हैं। उम्र बढ़ने पर त्वचा पर झुर्रियां और कई तरह के निशान बनने लग जाते हैं। ऐसे में महिलाओं की खूबसूरती की चाहत अधूरी लगने लगती हैं और पहले जैसी त्वचा को पाने के लिए महिलाएं कई तरह की महँगी क्रीम का इस्तेमाल करने लगती हैं। लेकिन आज हम आपको कुछ ऐसे कुदरती उपाय बताने जा रहे हैं जो सस्ते होने के साथ ही असरदार भी हैं और आपकी त्वचा को हमेशा जवां बनाए रखते हैं। तो आइये जानते हैं इसके बारे में।

शीया बटर
शीया बटर में विटामिन ए, डी और ई होता है, जो त्वचा की रक्षा में मदद करता है। त्वचा को दृढ़ और तंग दिखने के दौरान, फाइन लाइनों और झुर्रियों की उपस्थिति को कम करने में मदद करता है। शीया बटर में एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइटोस्टेरॉल की स्वाभाविक रूप से अच्छी मात्रा होती है, जो त्वचा को पोषण देती है। इसका नियमित रूप से इस्तेमाल, झुर्रियों को कम करता है। इसके एंटी-एजिंग गुण में त्वचा में नई कोशिकाओं को जन्म देने की क्षमता होती है।

रेटिनोल्स
रेटिनोल्स, कोलेजन के उत्पादन में वृद्धि करके फाइन लाइनों और झुर्रियों को कम करता है। साथ ही त्वचा में नए रक्त वाहिकाओं के उत्पादन को भी उत्तेजित करता है, जो त्वचा के रंग में सुधार करता है। उम्र के साथ त्वचा पर पड़ने वाले धब्बे और पैच को कम करने में मदद करता है। इसके नियमित इस्तेमाल से झुर्रियों में स्पष्ट सुधार होने में तीन से छह महीने लगते हैं और सर्वोत्तम परिणामों के लिए छह से बारह महीने लगते हैं।

जोजोबा ऑयल
जोजोबा ऑयल मॉइस्चराइजर की तरह काम करता है। यह फाइन लाइनों और झुर्रियों को कम करने में मदद करता है। जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारी त्वचा कठोर और सूखी होने लगती है। ऐसे में जोजोबा ऑयल हमारी त्वचा को रिपेयर करता है। इससे त्वचा मुलायम हो जाती है और जवां दिखने लगती है।

अनार
एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण, अनार शरीर में फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को बेअसर करता है। इसमें मौजूद एंटी-एजिंग के गुण त्वचा की कोशिकाओं की मरम्मत कर उन्हें पुनर्जीवित करने में मदद करते हैं। यह झुर्रियों और ढलती त्वचा में भी जान डालने का काम करता है। इसलिए जवां त्वचा पाने के लिए अपने आहार में अनार को जरूर शामिल करें। आप चेहरे के पैक में भी इसका उपयोग कर सकती हैं।


इस दिन मांं करें निर्जला उपवास, संतान को मिलेगा लंबी उम्र का वरदान

इस दिन मांं करें निर्जला उपवास, संतान को मिलेगा लंबी उम्र का वरदान

माघ मास के गणेश चतुर्थी व्रत का बहुत महत्व है। वैसे तो हर महीने दो गणेश चतुर्थी आती हैं, लेकिन माघ माह में चतुर्थी को बहुत खास माना गया है। माघ महीने के गणेश चतुर्थी को सकट, तिलवा  और तिलकुटा चौथ का व्रत कहते है।  इस बार सकट व्रत का पूजन 31 जनवरी यानि कि दिन रविवार  को होगा। ये व्रत महिलाएं संतान की लंबी आयु के लिए करती है। पहले ये व्रत पुत्र के लिए किया जाता रहा है, लेकिन अब बेटियों के लिए भी व्रत किया जाने लगा है।

मुहूर्त
पंचाग के अनुसार , पंचांग के अनुसार 31 जनवरी 2021 को  08:24 रात को चतुर्थी तिथि शुरू होगी और 01 फरवरी 202 1 को  शाम 06:24 बजे समाप्त होगी।

वक्रतुंडी चतुर्थी, माघी चौथ अथवा तिलकुटा चौथ भी इसी को कहते हैं। सूर्योदय से पूर्व स्नान के बाद उत्तर दिशा की ओर मुंह कर गणेश जी को नदी में 21 बार, तो घर में एक बार जल देना चाहिए। सकट चौथ संतान की लंबी आयु हेतु किया जाता है। चतुर्थी के दिन मूली नहीं खानी चाहिए, धन-हानि की आशंका होती है। देर शाम चंद्रोदय के समय व्रती को तिल, गुड़ आदि का अर्घ्य चंद्रमा, गणेश जी और चतुर्थी माता को अवश्य देना चाहिए। अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है। इस दिन स्त्रियां निर्जल व्रत करती हैं। सूर्यास्त से पहले गणेश संकष्टी चतुर्थी व्रत की कथा-पूजा होती है। इस दिन तिल का प्रसाद खाना चाहिए। दूर्वा, शमी, बेलपत्र और गुड़ में बने तिल के लड्डू चढ़ाने चाहिए।

कैसे करते है व्रत?
* कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है।
*  इस दिन गणपति का पूजन किया जाता है।
*  महिलाएं निर्जल रहकर व्रत रखती हैं।
* शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है।
* ये व्रत करने से  दु:ख दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं

क्या है महत्व?
* 12 मास में आने वाली चतुर्थी  में माघ की चतुर्थी का सबसे अधिक महत्व है।
* पुराणों के अनुसार, गणेश जी ने इस दिन शिव- पार्वती की परिक्रमा की थी।
* परिक्रमा कर माता-पिता से श्रीगणेश ने प्रथम पूज्य का आशीर्वाद का पाया था।
* इस दिन 108 बार ‘ ऊँ गणपतये नम:’ मंत्र का जाप करना चाहिए।
*  तिल और गुड़ का लड्डू श्री गणेश को चढ़ाने से रुके काम बनते हैं।
*  इस दिन गणेश के साथ शिव और कार्तिकेय की भी पूजा कर कथा सुनी जाती है।
 

सत्ययुग में महाराज हरिश्चंद्र के नगर में एक कुम्हार रहता था। एक बार उसने बर्तन बनाकर आंवा लगाया, पर आवां पका ही नहीं। बार-बार बर्तन कच्चे रह गए। बार-बार नुकसान होते देख उसने एक तांत्रिक से पूछा, तो उसने कहा कि बलि से ही तुम्हारा काम बनेगा। तब उसने तपस्वी ऋषि शर्मा की मृत्यु से बेसहारा हुए उनके पुत्र की सकट चौथ के दिन बलि दे दी।

उस लड़के की माता ने उस दिन गणेश पूजा की थी। बहुत तलाशने पर जब पुत्र नहीं मिला, तो मां ने भगवान गणेश से प्रार्थना की। सवेरे कुम्हार ने देखा कि वृद्धा का पुत्र तो जीवित था। डर कर कुम्हार ने राजा के सामने अपना पाप स्वीकार किया। राजा ने वृद्धा से इस चमत्कार का रहस्य पूछा, तो उसने गणेश पूजा के विषय में बताया। तब राजा ने सकट चौथ की महिमा को मानते हुए पूरे नगर में गणेश पूजा करने का आदेश दिया। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकट हारिणी माना जाता है।


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