जानिए क्यों बंद हो हो सकता है बद्रीनाथ धाम का मार्ग...

जानिए क्यों  बंद हो हो सकता है बद्रीनाथ धाम का मार्ग...


चमोली: जोशीमठ के गंधमादन पर्वत पर भगवान नृसिंह का मंदिर है यह दुनिया का इकलौता मंदिर है, जहां भगवान नृसिंह को शांत रूप में पूजा जाता है मंदिर में उनकी प्रतिमा 10 इंच की है और वह एक कमल पर विराजमान हैं इनके दर्शनों से दुख, दर्द, दुश्मन बाधा का नाश होता है मंदिर में स्थापित भगवान नृसिंह की बाईं भुजा बीतते समय के साथ घिस रही है मान्यताओं के अनुसार, भुजा के घिसने की गति को संसार में निहित पाप से भी जोड़ा जाता है

केदारखंड के सनत कुमार संहिता के अनुसार, जिस दिन भगवान नृसिंह की बाईं भुजा खंडित हो जाएगी, उस दिन विष्णु प्रयाग के नजदीक पटमिला नामक जगह पर नर और नारायण पर्वत (जिन्हें जय और विजय पर्वत के नाम से भी जाना जाता है) ढहकर एक हो जाएंगे और तब बद्रीनाथ मंदिर का मार्ग सदा के लिए बंद (अगम्य) हो जाएगा तब जोशीमठ के तपोवन क्षेत्र में स्थित भविष्य बद्री मंदिर में भगवान बद्रीनाथ के दर्शन होंगे

जानिए, नृसिंह मंदिर से जुड़ीं अन्य मानयताएं
चमोली के जोशीमठ क्षेत्र में भगवान विष्णु नृसिंह अवतार में विराजमान हैं नृसिंह अर्थात सिर शेर का और धड़ मनुष्य का यह स्वरूप भगवान विष्णु का चौथा अवतार है इसी मंदिर में भगवान नृसिंह के साथ उद्धव और कुबेर के विग्रह भी हैं कथित तौर पर बारह हजार सालों से भी पुराने इस नृसिंह मंदिर की स्थापना के संदर्भ में कई मान्यताएं हैं कुछ लोगों का मानना है कि यहां पर मूर्ति स्वयंभू यानि स्वयं प्रकट हुई थी, जिसे बाद में स्थापित किया गया था

आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी स्थापना
नृसिंह मंदिर को लेकर दूसरी मान्यता के मुताबिक, आठवीं शताब्दी में राजतरंगिणी के मुताबिक राजा ललित आदित्य मुक्तापीड़ा ने अपनी दिग्विजय यात्रा के दौरान नृसिंह मंदिर का निर्माण उम्र सिंह की पूजा के लिए किया था वहीं, तीसरी मान्यता के अनुसार, आदि गुरु शंकराचार्य ने स्वयं भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप की स्थापना की थी मंदिर में स्थापित भगवान नृसिंह की मूर्ति शालिग्राम पत्थर पर आज भी निर्मित दिखाई देती है