शिव मार्केट में पानी के साथ आया 15 फीट का मगरमच्छ, जान जोखिम में डाल युवा खिंचा रहे फोटो

शिव मार्केट में पानी के साथ आया 15 फीट का मगरमच्छ, जान जोखिम में डाल युवा खिंचा रहे फोटो

मध्य प्रदेश में कई ऐसी नदियां हैं, जहां भारी बारिश के चलते अक्सर जल स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में इन नदियों में मगरमच्छों की भरमार भी मिलती है। कभी-कभी तो पानी बहकर शहरों एवं गावों तक पहुंच जाता है। हैरान करने वाली बात यह है कि बुधवार को शिवपुरी की मीट मार्केट में 15 फीट का मगरमच्छ दिखाई दिया। ऐसे में जब युवाओं ने इसे देखा तो उन्होंने वन विभाग को सूचना देने के बजाय खुद की रस्सी से बांधकर उसके साथ सेल्फी लेने लगे।

पिछले सात दिनों में शिवपुरी में अलग-अलग इलाकों में निकल चुके हैं मगरमच्छ

शिवपुरी में पिछले सात दिन में तीन मगरमच्छ अलग-अलग इलाकों में निकल चुके हैं। खास बात यह है कि यहां पर युवा इन मगरमच्छों को खुद पकड़ रहे हैं। स्थानीय निवासी द्वारा इसकी वन विभाग मगरमच्छ की सूचना भी नदीं दे रहे हैं। इतना ही नहीं युवा इन मगरमच्छों के साथ फो खिंचवा रहे हैं। शिवपुरी में जब लोगों ने 15 फीट के मगरमच्छ को देखा तो जोखिम उठाते हुए खुद ही रस्सियों से बांध दिया। इसके बाद उसे कंधों पर उठाकर मस्ती करने लगे।

सेल्फी और वीडियो बनाने में जुटे युवा

इतना ही नहीं लोगों ने उसके साथ सेल्फी, फोटो और वी़डियो बनाई। ऐसे में इन युवाओं की लापरवाही उनको भारी पड़ सकती है! क्योंकि मगरमच्छ कभी-भी युवाओं पर हमला कर सकता है।

खतरनाक प्राणी है मगरमच्छ

बता दें कि मगरमच्छ पानी और धरती पर पाया जाने वाला खतरनाक जीव है। खुरदुरी खाल, उबड़-खाबड़ शरीर और मजबूत जबड़े वाला ये प्राणी ऐसा है कि देखने पर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। ये धरती के प्राचीनतम जीवों में से एक हैं और स्तनधारी और सरीसृप दोनों ही श्रेणियों में शामिल है।


भयानक और भयावह इस जीव की खाल बुलेटप्रूफ मानी जाती है, जिसे बंदूक की गोली द्वारा भी भेदा नहीं जा सकने का दावा किया जाता है, लेकिन इसके बाद भी मानव द्वारा किये जाने वाले शिकार के कारण इसकी कई प्रजातियां विलुप्ति की कगार पर है। इसकी खाल विश्व की सर्वश्रेष्ठ खालों में गिनी जाती है और फैशन इंडस्ट्रीज में बहुत लोकप्रिय है।


कोवैक्सीन को WHO से आपातकालीन उपयोग के लिए जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद : स्वास्थ्य मंत्रालय

कोवैक्सीन को WHO से आपातकालीन उपयोग के लिए जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद : स्वास्थ्य मंत्रालय

स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन कोवैक्सीन को आपातकालीन उपयोग (EUA) की मंजूरी जल्द ही मिलने  की उम्मीद है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री डा भारती प्रवीण पवार ने समाचार एजेंसी एएनआइ को बताया कि उम्मीद है कि डब्लूएचओ जल्द ही कोवैक्सीन को आपात इस्तेमाल की मंजूरी देगा। इससे पहले खबर सामने आी थी कि भारत के इस टीके को 5 अक्टूबर तक आपात उपयोग के लिए डब्लूएचओ से मंजूरी मिलने की संभावना है।

वैक्सीन विकसित करने वाली कंपनी भारत बायोटेक वैक्सीन की सुरक्षा और क्लीनिकल ट्रायल का ​​​​डेटा और जोखिम प्रबंधन योजनाओं और अन्य कार्यान्वयन विचारों पर एक प्रजेंनटेशन देगी। कंपनी ने हाल ही में कहा था कि उसने आपात इस्तेमाल की मंजूरी के लिए कोवैक्सीन से संबंधित सभी डेटा डब्ल्यूएचओ को सौंप दिया है और वैश्विक उससे प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है।


कोवैक्सीन तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल में 77.8 प्रतिशत की प्रभावी पाया गया था। इसे हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट की ऑफ वायरोलाजी (NIV) के सहयोग से विकसित किया था। भारत बायोटेक ने कहा था कि आपात इस्तेमाल की मंजूरी के लिए ट्रायल से संबंधित सभी डेटा डब्ल्यूएचओ को समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है और संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा मांगे गए सभी स्पष्टीकरणों का जवाब भी दे दिया गया है।

कोवैक्सीन उन टीकों में शामिल है, जिसका इस्तेमाल भारत में कोरोना टीकाकरण के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा कोवीशील्ड नाम से विकसित आक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन और रुस की वैक्सीन स्पुतनिक v का इस्तेमाल टीकाकरण के लिए किया जा रहा है। डब्लूएचओ ने अब तक फाइजर/बायोएनटेक,आक्सफोर्ड/ एस्ट्राजेनेका, जानसन एंड जानसन, माडर्ना और सिनोफार्म द्वारा निर्मित कोविड -19 के टीकों को आपात इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी है।