सोने के दाम में तेजी, चांदी की कीमत भी चढ़ी, जानें क्या हो गए हैं रेट

सोने के दाम में तेजी, चांदी की कीमत भी चढ़ी, जानें क्या हो गए हैं रेट

सोने एवं चांदी की कीमतों में बुधवार को तेजी देखने को मिली। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के मुताबिक सोने के दाम में 196 रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़ोत्तरी देखने को मिली। इससे हाजिर बाजार में सोने का रेट 45,746 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पिछले सत्र में 10 ग्राम सोने का रेट 45,550 रुपये पर रहा था। मजबूत वैश्विक संकेतों और रुपये के मूल्य में गिरावट से सोने के दाम में यह बढ़ोत्तरी देखने को मिली।

चांदी की कीमत में भी तेजी

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के मुताबिक चांदी की कीमत में 319 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। इससे चांदी की कीमत 59,608 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। इससे पिछले सत्र में चांदी की कीमत 59,289 रुपये प्रति किलोग्राम पर रही थी।

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये 26 पैसे कमजोर होकर 73.87 के स्तर पर रह गया।

वैश्विक बाजार में सोने-चांदी की कीमत

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का भाव बढ़त के साथ 1,776 डॉलर प्रति औंस पर रहा। वहीं, चांदी की कीमत 22.72 डॉलर प्रति औंस पर सपाट रही।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर एनालिस्ट (कमोडिटीज) तपन पटेल ने कहा, ''यूएस एफओएमसी (फेडरल ओपन मार्केट कमेटी) से पूर्व की अटकलों और चीन के एवरग्रांड संकट की वजह से पैदा हुई अनिश्चितताओं से बाजार को मिले-जुले संकेत मिले। इससे बुलियन में लिवाली को बढ़ावा मिला।''

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटीज) नवनीत दमानी ने कहा, ''चीन के एवरग्रांड संकट एवं 2021 में निचले स्तर की वृद्धि दर के अनुमान की वजह से एक तरह की असहज स्थिति पैदा हुई। इससे बुलियन में तेजी देखने को मिली। अमेरिकी फेड पॉलिसी मीटिंग से पूर्व सेफ हैवेन में लिवाली देखने को मिली।''


Tesla: टेस्ला ने कर कम करने के लिए पीएमओ में दी दस्तक, इस वर्ष प्रारम्भ करना चाहती है इलेक्ट्रिक कार की बिक्री

Tesla: टेस्ला ने कर कम करने के लिए पीएमओ में दी दस्तक, इस वर्ष प्रारम्भ करना चाहती है इलेक्ट्रिक कार की बिक्री

Tesla Inc (टेस्ला इंक) ने भारतीय मार्केट में एंट्री करने से पहले इलेक्ट्रिक वाहनों पर आयात करों को कम करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी के ऑफिस से निवेदन किया है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चार सूत्रों ने बताया, टेस्ला ने कुछ भारतीय वाहन निर्माताओं की आपत्तियों को खारिज कर दिया. टेस्ला इस वर्ष हिंदुस्तान में आयातित कारों की बिक्री प्रारम्भ करना चाहती है. लेकिन उनका बोलना है कि हिंदुस्तान में कर दुनिया में सबसे अधिक हैं.


टेस्ला ने कर कटौती के लिए सबसे पहले जुलाई में निवेदन किया था. जिस पर देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर की कई लोकल कंपनियों ने असहमति जताई थी. इनका बोलना है कि इस तरह के कदम से घरेलू मैन्युफेक्चरिंग में निवेश बाधित होगा. 

हिंदुस्तान में टेल्सा के नीति प्रमुख मनुज खुराना सहित कंपनी के ऑफिसरों ने पिछले महीने एक बंद दरवाजे की मीटिंग में कंपनी की मांगों को मोदी के ऑफिसरों के सामने रखा, और यह तर्क दिया कि कर बहुत अधिक हैं. इस चर्चा से परिचित चार सूत्रों ने यह बताया. 

तीन सूत्रों ने बोला कि टेस्ला ने अपने मुख्य कार्यकारी एलन मस्क और मोदी के बीच अलग से एक मीटिंग का निवेदन भी किया है. मोदी के ऑफिस और टेस्ला के साथ-साथ इसके कार्यकारी खुराना ने इस बारे में टिप्पणी के निवेदन का उत्तर नहीं दिया.

वैसे यह साफ नहीं है कि मोदी के ऑफिस ने विशेष रूप से टेस्ला को उत्तर में क्या बताया. लेकिन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चार सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी वाहन निर्माता की मांगों पर सरकारी ऑफिसरों की राय विभाजित हैं. कुछ ऑफिसर चाहते हैं कि कंपनी किसी भी आयात कर में कटौती पर विचार करने से पहले लोकल मैन्युफेक्चरिंग के लिए प्रतिबद्ध हो.
एक सूत्र के अनुसार, मोदी के ऑफिस में मीटिंग के दौरान, टेस्ला ने बोला कि हिंदुस्तान में शुल्क संरचना देश में उसके कारोबार को "व्यवहार्य प्रस्ताव" नहीं बनाएगी.

हिंदुस्तान 40,000 US डॉलर या उससे कम लागत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर 60 फीसदी का आयात शुल्क और 40,000 US डॉलर से अधिक मूल्य वाले वाहनों पर 100 फीसदी शुल्क लगाता है. विश्लेषकों ने बोला है कि इन दरों पर टेस्ला की कारें खरीदारों के लिए बहुत महंगी हो जाएंगी और उनकी बिक्री को सीमित कर सकती हैं. 
तीन सूत्रों ने बोला कि टेस्ला ने अपने मुख्य कार्यकारी एलन मस्क और मोदी के बीच अलग से एक मीटिंग का निवेदन भी किया है. मोदी के ऑफिस और टेस्ला के साथ-साथ इसके कार्यकारी खुराना ने इस बारे में टिप्पणी के निवेदन का उत्तर नहीं दिया.

वैसे यह साफ नहीं है कि मोदी के ऑफिस ने विशेष रूप से टेस्ला को उत्तर में क्या बताया. लेकिन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चार सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी वाहन निर्माता की मांगों पर सरकारी ऑफिसरों की राय विभाजित हैं. कुछ ऑफिसर चाहते हैं कि कंपनी किसी भी आयात कर में कटौती पर विचार करने से पहले लोकल मैन्युफेक्चरिंग के लिए प्रतिबद्ध हो.