PF खाते पर मिलता है सात लाख तक का बीमा लाभ, जानिए क्या है EPFO की यह खास स्कीम

PF खाते पर मिलता है सात लाख तक का बीमा लाभ, जानिए क्या है EPFO की यह खास स्कीम

अगर आप नौकरीपेश व्यक्ति हैं, तो आपकी सैलरी का कुछ हिस्सा PF के रूप में भी कटता होगा और रिटायरमेंट के बाद आपको पेंशन का फायदा भी मिलता है। पर क्या आपको मालूम है कि, इसके अलावा ही कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने सदस्यों की आकस्मिक मृत्यु होने पर उनके परिवार को बीमा कवर का लाभ भी देता है? जी हां,  EPFO अपनी EDLI यानी कि इंप्लाइज डिपाजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम के तहत PF सबस्‍क्राइबर की अकाल मृत्यु हो जाने पर उसके नॉमिनी को 7 लाख रुपये तक की इंश्योरंस की रीशि दी जाती है। अगर आप पीएफ PF सबस्‍क्राइबर हैं और आपने भी लगातार 12 महीने जॉब की है, तो आपकी अकाल मृत्यु होने पर आपके परिजन इस बीमा राशि का फायदा उठा सकते हैं। इसके तहत PF सबस्‍क्राइबर के परिवार को सात लाख रुपये तक का बीमा कवर दिया जाता है।

कोरोना के कारण हुई मृत्यु पर भी मिलेगा कवर

यह बीमा कवर उन लोगों को भी मिलता है, जिन्होंने सालभर के अंदर एक से अधिक संस्थानों में काम किया है। यह क्लेम कर्मचारी के परिवार वालों की तरफ से कर्मचारी की अकाल मृत्यु पर किया जा सकता है। हालांकि, स्कीम के तहत क्लेम करने वाला सदस्य कर्मचारी का नॉमिनी होना चाहिए। कोरोना के कारण मृत्यु होने पर भी इस बीमा कवर का लाभ मिलता है।

कोई प्रीमियम नहीं देना होता है


इस इंश्योरेंस स्कीम का फायदा लेने के लिए, कर्मचारी को अलग से कोई भी रकम प्रीमियम के तौर पर नहीं देनी होती है, बल्कि इसके लिए योगदान नियोक्ता द्वारा ही दिया जाता है।

कैसे होगा क्लेम

यदि EPF सदस्य की अकाल मृत्यु हुई है, तो उसके नॉमिनी या उत्तराधिकारी बीमा कवर के लिए क्लेम कर सकते हैं। अगर क्लेम करने वाले की उम्र 18 साल से कम है, तो उसकी ओर से उसका अभिभावक क्लेम कर सकता है। इसके लिए इंश्योरेंस कंपनी को कर्मचारी की मृत्यु का सर्टिफिकेट, सक्सेशन सर्टिफिकेट, माइनर नॉमिनी की ओर से आवेदन करने वाले अभिभावक के प्रमाण पत्र और बैंक का विवरण देना होगा।


Tesla: टेस्ला ने कर कम करने के लिए पीएमओ में दी दस्तक, इस वर्ष प्रारम्भ करना चाहती है इलेक्ट्रिक कार की बिक्री

Tesla: टेस्ला ने कर कम करने के लिए पीएमओ में दी दस्तक, इस वर्ष प्रारम्भ करना चाहती है इलेक्ट्रिक कार की बिक्री

Tesla Inc (टेस्ला इंक) ने भारतीय मार्केट में एंट्री करने से पहले इलेक्ट्रिक वाहनों पर आयात करों को कम करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी के ऑफिस से निवेदन किया है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चार सूत्रों ने बताया, टेस्ला ने कुछ भारतीय वाहन निर्माताओं की आपत्तियों को खारिज कर दिया. टेस्ला इस वर्ष हिंदुस्तान में आयातित कारों की बिक्री प्रारम्भ करना चाहती है. लेकिन उनका बोलना है कि हिंदुस्तान में कर दुनिया में सबसे अधिक हैं.


टेस्ला ने कर कटौती के लिए सबसे पहले जुलाई में निवेदन किया था. जिस पर देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर की कई लोकल कंपनियों ने असहमति जताई थी. इनका बोलना है कि इस तरह के कदम से घरेलू मैन्युफेक्चरिंग में निवेश बाधित होगा. 

हिंदुस्तान में टेल्सा के नीति प्रमुख मनुज खुराना सहित कंपनी के ऑफिसरों ने पिछले महीने एक बंद दरवाजे की मीटिंग में कंपनी की मांगों को मोदी के ऑफिसरों के सामने रखा, और यह तर्क दिया कि कर बहुत अधिक हैं. इस चर्चा से परिचित चार सूत्रों ने यह बताया. 

तीन सूत्रों ने बोला कि टेस्ला ने अपने मुख्य कार्यकारी एलन मस्क और मोदी के बीच अलग से एक मीटिंग का निवेदन भी किया है. मोदी के ऑफिस और टेस्ला के साथ-साथ इसके कार्यकारी खुराना ने इस बारे में टिप्पणी के निवेदन का उत्तर नहीं दिया.

वैसे यह साफ नहीं है कि मोदी के ऑफिस ने विशेष रूप से टेस्ला को उत्तर में क्या बताया. लेकिन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चार सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी वाहन निर्माता की मांगों पर सरकारी ऑफिसरों की राय विभाजित हैं. कुछ ऑफिसर चाहते हैं कि कंपनी किसी भी आयात कर में कटौती पर विचार करने से पहले लोकल मैन्युफेक्चरिंग के लिए प्रतिबद्ध हो.
एक सूत्र के अनुसार, मोदी के ऑफिस में मीटिंग के दौरान, टेस्ला ने बोला कि हिंदुस्तान में शुल्क संरचना देश में उसके कारोबार को "व्यवहार्य प्रस्ताव" नहीं बनाएगी.

हिंदुस्तान 40,000 US डॉलर या उससे कम लागत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर 60 फीसदी का आयात शुल्क और 40,000 US डॉलर से अधिक मूल्य वाले वाहनों पर 100 फीसदी शुल्क लगाता है. विश्लेषकों ने बोला है कि इन दरों पर टेस्ला की कारें खरीदारों के लिए बहुत महंगी हो जाएंगी और उनकी बिक्री को सीमित कर सकती हैं. 
तीन सूत्रों ने बोला कि टेस्ला ने अपने मुख्य कार्यकारी एलन मस्क और मोदी के बीच अलग से एक मीटिंग का निवेदन भी किया है. मोदी के ऑफिस और टेस्ला के साथ-साथ इसके कार्यकारी खुराना ने इस बारे में टिप्पणी के निवेदन का उत्तर नहीं दिया.

वैसे यह साफ नहीं है कि मोदी के ऑफिस ने विशेष रूप से टेस्ला को उत्तर में क्या बताया. लेकिन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चार सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी वाहन निर्माता की मांगों पर सरकारी ऑफिसरों की राय विभाजित हैं. कुछ ऑफिसर चाहते हैं कि कंपनी किसी भी आयात कर में कटौती पर विचार करने से पहले लोकल मैन्युफेक्चरिंग के लिए प्रतिबद्ध हो.