नाबालिग को भगाकर महाराष्‍ट्र ले जाने वाले युवक को पाक्‍सो कोर्ट ने सुनाई ये बड़ी सजा

नाबालिग को भगाकर महाराष्‍ट्र ले जाने वाले युवक को पाक्‍सो कोर्ट ने सुनाई ये बड़ी सजा

विशेष न्यायाधीश पाक्सो नंदन सिंह राणा की अदालत ने पाक्सो एक्ट के मामले में महाराष्ट्र के नासिक निवासी युवक को बीस साल की सजा सुनाई है। तीन अलग धाराओं में उस पर दोष सिद्ध हुआ। इसके अलावा तीस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। साथ ही विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल को सरकार के माध्यम से पीडि़ता को चार लाख रुपये प्रतिकर के तौर पर दिलाने को भी कहा।

शासकीय अधिवक्ता नवीन चंद्र जोशी के मुताबिक बनभूलपुरा थाना क्षेत्र निवासी एक स्कूली छात्रा 17 फरवरी 2019 को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। तब उसकी उम्र 17 साल थी। अगले दिन पिता ने बनभूलपुरा पुलिस को जानकारी देने के साथ मुकदमा भी दर्ज कराया। जांच के दौरान मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने महाराष्ट्र के नासिक से किशोरी को बरामद करने के साथ जितेश प्रवीन घनराडे निवासी अगस्ती नगर निफाड़ जिला नासिक को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि गुमशुदगी से तीन माह पहले दोनों के बीच फोन से संपर्क हुआ था। जिसके बाद जितेश ने उसे झांसा दिया कि वह उसके संग शादी करना चाहता है।


17 फरवरी को युवक हल्द्वानी पहुंचा। और ट्रेन से उसे लेकर नासिक चला गया। वहां एक मंदिर में शादी कर ली। उसके बाद कई बार शारीरिक संबंध भी बनाए। लेकिन किशोरी को घर ले जाने की बजाय इधर-उधर घूमाता रहा। 12 मार्च 2019 को पुलिस ने पीडि़ता को बरामद करने के साथ जीतेश को गिरफ्तार किया था। शासकीय अधिवक्ता नवीन चंद्र जोशी के मुताबिक अदालत में छह गवाहों का परीक्षण करवाया गया था। काल डिटेल, लोकेशन, बयान व जांच के आधार पर नासिक के युवक को दोषी ठहरा बीस साल की सजा सुनाई गई।


स्वास्थ्य विभाग अपने कर्मचारियों की जिंदगी को लेकर बना लापरवाह

स्वास्थ्य विभाग अपने कर्मचारियों की जिंदगी को लेकर बना लापरवाह

भले ही स्वास्थ्य विभाग आमजन को कोरोना के प्रति जागरूक करने के दावे कर रहा हो। लेकिन, हकीकत यह है कि स्वास्थ्य विभाग अपने कर्मचारियों की जिंदगी को लेकर लापरवाह बना हुआ है। स्वास्थ्य कर्मी बिना पीपीई किट पहने बाहरी राज्यों से आने वाले व्यक्ति व पुलिस कर्मियों की कोरोना जांच कर रहे हैं। ऐसे में यदि कोई भी व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाया गया तो वह स्वास्थ्य कर्मी व उसके परिवार को खतरे में डाल सकता है।

शासन की गाइडलाइन के अनुसार, कोरोना जांच करते समय स्वास्थ्य कर्मी का पीपीई किट पहनना अनिवार्य है। यह सुरक्षा कवच ही स्वास्थ्य कर्मी को ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण से बचाएगा। लेकिन, कोटद्वार का स्वास्थ्य विभाग इस गाइडलाइन को अनदेखा कर रहा है। दिल्ली, हरियाणा सहित अन्य राज्यों से आने वाले व्यक्तियों की उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड की सीमा पर स्थित कौड़िया चेकपोस्ट पर बिना पीपीई किट पहने जांच की जा रही है। मंगलवार को भी स्वास्थ कर्मी चेक पोस्ट पर इसी लापरवाही के साथ पुलिस कर्मियों की जांच करते हुए नजर आए। यह सब देखने के बाद भी पुलिस अधिकारियों ने स्वास्थ्य कर्मी को पीपीई किट पहनने की सलाह नहीं दी। जबकि, दो दिन पूर्व राष्ट्रपति की ड्यूटी पर गए कई पुलिस कर्मी कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।

शहर में प्रवेश से पूर्व जांच जरूरी कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए पुलिस व प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। कौड़िया चेक पोस्ट से शहर में प्रवेश करने वाले बाहरी राज्यों के व्यक्तियों की कोरोना जांच करवाई जा रही है। यही नहीं प्रत्येक व्यक्ति से वैक्सीन लगवाने का प्रमाण पत्र भी मांगा जा रहा है। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक विजय ¨सह ने बताया कि बाहरी राज्य से आने वाले व्यक्तियों का फोन नंबर सहित अन्य जानकारियां भी रजिस्टर में दर्ज की जा रही हैं।