राज्यसभा में वोटिंग के दौरान शिवसेना ने किया बहिष्कार

राज्यसभा में वोटिंग के दौरान शिवसेना ने किया बहिष्कार

लोकसभा के बाद बुधवार को राज्यसभा में भी नागरिकता संशोधन बिल पास हो गया. राज्यसभा में लंबी चर्चा के बाद वोटिंग से यह बिल पास हुआ. वोटिंग के दौरान बिल के पक्ष में 125 और उसके विरोध में सिर्फ 99 मत पड़े. जिसके बाद राज्यसभा में यह ऐतिहासिक बिल पास हो गया. अब नागरिकता विधेयक को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिल गई है. इसके बाद विधेयक पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाएगा.

शिवसेना ने चुना बीच का रास्ता

बुधवार को महाराष्ट्र में हाल ही में कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से सरकार बनाने वाली शिवसेना ने बीच का रास्ता चुना. शिवसेना ने राज्यसभा की वोटिंग प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला लिया और सदन से वॉकआउट कर लिया. यहां आपको यह भी बता दें कि लोकसभा में शिवसेना ने सिटिजनशिप अमेडमेंट बिल का समर्थन किया था. ऐसे में शिवसेना का यह कदम सबके लिए चौंकाने वाला था.

शिवसेना की वैचारिक मजबूरी

शिवसेना ने भले ही कुछ दिन पहले दो सेकुलर पार्टियों के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाई हो लेकिन उसकी विचारधारा हमेशा से हिन्दूवादी रही है. यही वजह है कि राज्यसभा में इस बिल का विरोध करना शिवसेना के लिए मुश्किल हो रहा था.

इस वजह से शिवसेना ने बदला फैसला

कांग्रेस के सूत्रों ने आजतक को बताया कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व शिवसेना द्वारा लोकसभा में बिल के पक्ष में वोट करने से खफा था. इससे जुड़ा स्पष्ट संदेश महाराष्ट्र में हाल ही बने गठबंधन तक पहुंचा दिया गया था. इसी वजह से शिवसेना ने 24 घंटों के भीतर बिल पर अपना स्टैंड बदल लिया.

संजय राउत ने दी सफाई

शिवसेना नेता और सांसद संजय राउत ने पार्टी के इस कदम पर सफाई पेश की है. संजय राउत ने कहा है कि मैंने और मेरी पार्टी ने तय किया कि इस बिल पर उठ रहे सवालों का जवाब सही ढंग से नहीं दिया गया है. इसलिए यह सही नहीं होगा कि बिल का समर्थन करें या विरोध.

संजय राउत ने आगे कहा कि हम यह नहीं कहते हैं कि शरणार्थियों को नागरिकता न दी जाए, उन्हें नागरिकता मिलनी चाहिए. लेकिन हम कहते हैं अगर वोट बैंक की राजनीति के लिए साजिश हुई है, जैसा कि आरोप लगाए भी गए हैं तो उन्हें अगले 25 सालों तक वोटिंग का अधिकार न दिया जाए.