हिंदुस्तान के आर्मी प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने चाइना की बनाई 'सलामी स्लाइसिंग' रणनीति

हिंदुस्तान के आर्मी प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने चाइना की बनाई 'सलामी स्लाइसिंग' रणनीति

Ladakh में हिंदुस्तान व चाइना (India-China) के बीच सीमा पर तनाव (Border Tension) की स्थिति से निपटने के लिए जहां दोनों पक्षों के बीच वार्ता का दौर जारी है, वहीं हिंदुस्तान के आर्मी प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने चाइना की 'सलामी स्लाइसिंग' रणनीति से बताई है।

  General Rawat ने दशा को चिंताजनक बताते हुए हर स्थिति के लिए तैयार रहने की बात के दौरान जिस सलामी स्लाइसिंग रणनीति का ज़िक्र किया, उसके बारे में जानने से इतिहास से लेकर वर्तमान तक की समझ साफ होती है।

आखिर क्या है सलामी स्लाइसिंग?
सेना की ज़ुबान में कहें तो, सलामी स्लाइसिंग का अर्थ उस रणनीति से है, जिसके ज़रिये कोई देश धमकी व समझौतों की प्रक्रिया में बांटो व जीतो का खेल खेलते हुए नए क्षेत्रों पर अपना कब्ज़ा करता है। तो इस रणनीति में कई छोटे छोटे गुप्त एक्शन लिये जाते हैं क्योंकि इन्हें एक साथ या खुले तौर पर ज़ाहिर करना अवैध या कठिन होता है। कुल मिलाकर यह किसी भी देश के ​दामन पर एक दाग जैसा होता है।
 

सलामी स्लाइसिंग शब्द का पहली बार इस्तेमाल हंगरी के कम्युनिस्ट नेता Matyas Rakosi ने 1940 क दशक में किया था, जब उन्होंने गैर कम्युनिस्ट पार्टियों को सलामी स्लाइस (सामान्यतया सूअर के मांस से बनी डिश) की तरह काट देने के उदाहरण से अपनी नीति को समझाया था। सेनाओं की शब्दावली में इसे 'कैबेज स्ट्रैटजी' भी बोला जाता है।

कैसी है चाइना की सलाम स्लाइसिंग रणनीति?
दूसरे दुनिया युद्ध के बाद सिर्फ चाइना ही ऐसा देश है जो ज़मीन व समुद्र में अपनी सीमाएं लगातार बढ़ाने के लिए चालें चलता रहा है। तिब्बत का अधिग्रहण, अक्साई चिन पर कब्ज़ा व पैरासल आईलैंड को हथिया लेना चाइना के विस्तारवाद की नीति का भाग रहा है। अपने पड़ोसी राष्ट्रों की सीमाओं पर लार टपकाने वाले चाइना की इस नीति में हर तरफ एक पैटर्न दिखाई देता है।

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क्या है सीमा कब्ज़ाने का चाइना का पैटर्न?
हिंदुस्तान ही नहीं बल्कि तमाम पड़ोसी मुल्कों के साथ चाइना सीमाएं हथियाने के लिए पहले किसी क्षेत्र विशेष पर अपना दावा करता है। फिर हर मुमकिन मौके व मंच पर उसे ज़ोर से दोहराता है। इससे एक टकराव व तनाव का माहौल बन जाता है व फिर समझौते के लिए संवाद की प्रक्रिया प्रारम्भ होती है। फिर टकराव को सुलझाने के लिए चाइना सैन्य बल व कूटनीतिक ताकत का सहारा लेता है।

भारत में चाइना सलामी स्लाइसिंग रणनीति
दक्षिणी तिब्बत की सीमाओं से सटे हिंदुस्तान के अरुणाचल प्रदेश समेत करीब 90 हज़ार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र पर चाइना कब्ज़े की मंशा रखता रहा है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कश्मीर में भी चाइना कुछ हिस्सों पर अपने बेतुके दावे कर एक तरह का प्रोपेगैंडा खड़ा करने की प्रयास करता रहा है।
 

जम्मू व कश्मीर में काराकोरम के उत्तर का करीब 6000 वर्ग किमी का भाग पाक से चाइना कब्ज़ा चुका है। इसके साथ ही, सिक्किम स्थित डोकलाम पर चाइना की नज़र रही है क्योंकि इस हिस्से पर कब्ज़ा कर लेने से चाइना सिलीगुड़ी कॉरिडोर या 'चिकन नेक' पर नज़र रख सकता है यानी उस हिस्से पर जो उत्तर पूर्व हिंदुस्तान को शेष हिंदुस्तान से जोड़ता है।



चीन की सलामी स्लाइसिंग की कहानी
सीमाओं पर विस्तार की चाइना की इस रणनीति को सलामी स्लाइसिंग के तौर पर समझा जाता है। 1948 तक तिब्बत बौद्धों का एक स्वतंत्र भूभाग था, लेकिन इसके बाद चाइना की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने तिब्बत का पूरा प्रदेश हड़पने के लिए इस रणनीति का सहारा लिया। तिब्बत के साथ ही लद्दाख के पूर्व व तिब्बत के पश्चिम में बसे झिनझियांग क्षेत्र को भी कब्ज़ा कर चाइना ने अपना नक्शा दोगुना कर लिया।

वर्ष 1962 के युद्ध के चलते चाइना ने हिंदुस्तान के बड़े भूभाग पर कब्ज़ा करने की रणनीति अपनाई। हालांकि तब चाइना ने अपनी सेनाएं कुछ पीछे हटाईं लेकिन तबसे आधुनिक स्विटज़रलैंड के आकार के बराबर अक्साई चिन पर अपना दावा करना प्रारम्भ किया। इस हिस्से को पूरी तरह कब्ज़ाने के लिए चाइना ने कई चालें चलीं जैसे हान समुदाय के लोगों को लगातार इस इलाके में भेजा ताकि वो भारतीय गड़रियों को यहां से खदेड़ सकें।

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हिमालयीन क्षेत्रों में तिब्बत व हिंदुस्तान के क्षेत्रों तक ही नहीं, बल्कि चाइना 1974 में वियतनाम से पैरासल आईलैंड, 1988 ​में जॉनसन रीफ, 1995 में फिलीपीन्स से मिसचीफ रीफ व 2012 में स्कारबोरो शोअल को ​हथियाने के लिए भी इसी करता रहा। अब भी जापान के कुछ हिस्सों पर दावा कर आक्रामक प्रोपेगैंडा को चाइना हवा दे रहा है।