पहली बार मानवरहित ड्रोन से भरा गया अमेरिकी विमान में ईंधन, नेवी और बोइंग का संयुक्त प्रयास हुआ सफल

पहली बार मानवरहित ड्रोन से भरा गया अमेरिकी विमान में ईंधन, नेवी और बोइंग का संयुक्त प्रयास हुआ सफल

अमेरिका की इतिहास में पहली बार देश की नौसेना (US Navy) और बोइंग कंपनी ने मिलकर मानवरहित ड्रोन (Unmanned Drone) के सहारे विमान में ईंधन डाला। नौसेना व बोइंग कंपनी के संयुक्त प्रयास से मानवरहित ड्रोन एमक्यू-25 टी 1 (MQ-25 T1) से हवा में उड़ान के दौरान एक विमान में ईधन भरने में सफलता प्राप्त की गई है।

नौसेना के रियर एडमिरल ब्राइन कोरे (Rear Admiral Brian Corey) ने कहा कि यह कार्य पूरी सफलता से किया गया। अब यह सुनिश्चित हो गया है कि नौसेना के हवा में ईंधन भरने की प्रक्रिया की मानकों के अनुसार एमक्यू-25 हमारी टैंकर मिशन की जरूरतों को पूरा कर सकता है। इससे हमारे विमान वाहकों की क्षमता में भी वृद्धि होगी। इस परीक्षण में नौसेना का विमान एफ/ए -18 सुपर हार्नेट हवा में ही बोइंग कंपनी के मानवरहित ड्रोन एमक्यू-25 टी 1 संपर्क में आया। टी 1 ने अपने एरियल रिफ्यूलिंग स्टोर से एफ/ए 18 में सफलता के साथ ईंधन स्थानांतरित कर दिया। 

नौसेना के मानवरहित कैरियर एविएशन प्रोग्राम आफिस के मैनेजर कैप्टन चाउ रीड ने कहा कि यह मिशन हमारे लड़ाकू विमानों को बहुत बड़ी ताकत देगा। इससे ईंधन की बड़ी समस्या से मुक्ति मिलेगी। यह हमारी नौसेना के लिए महत्वपूर्ण और रोमांचक क्षण है।


दस वर्ष बाद पहली बार आज मिलेंगे बाइडन और पुतिन, तनातनी के बीच जानें

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विश्‍व की दो महाशक्तियों के बीच बुधवार को जिनेवा में एक बेहद खास मुलाकात होने वाली है। ये दो महाशक्तियां अमेरिका और रूस हैं। काफी लंबे समय से चली आ रही तनातनी के अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन और रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली ये मुलाकात कई मायनों में खास है। आपको बता दें कि इन दोनों के बीच 10 मार्च 2011 को मास्‍को में आखिरी मुलाकात हुई थी। हालांकि, उस वक्‍त बाइडन अमेरिका के उपराष्‍ट्रपति थे और पुतिन रूस के प्रधानमंत्री थे। वर्तमान मुलाकात के दौरान दोनों के के ही पद बदल चुके हैं।

यहां पर ये भी बता दें कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति बाइडन ने जहां 20 जनवरी 2021 से राष्‍ट्रपति का पदभार संभाला है व्लादिमीर पुतिन 1999 से 2008 तक राष्ट्रपति रहे। 2008 से 2012 तक प्रधानमंत्री। 2012 से वे रूस के राष्ट्रपति हैं। वे 1999 से 2000 तक प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं। देश और दुनिया में उनकी गिनती एक ताकतवर नेता के रूप में होती आई है। पुतिन और बाइडन के बीच आज होने वाली मुलाकात के बीच इस बात को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं कि आखिर इन दोनों के बीच बातचीत का एजेंडा क्‍या होगा। आपको बता दें कि बीते कुछ वर्षों में अमेरिका और रूस के बीच जो खटास पैदा हुई है उसकी एक नहीं, कई बड़ी वजह हैं। इनमें से एक अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव को प्रभावित करना भी है, जिसको काफी अहम मुद्दा माना जा रहा है।


इसके अलावा अमेरिकी एजेंसियों और निजी कंपनियों पर किए गए साइबर अटैक के लिए भी रूसी राष्‍ट्रपति को ही जिम्‍मेदार ठहराया जाता रहा है। अमेरिका राष्‍ट्रपति पुतिन के सामने उनके विरोधी नेताओं को जहर देकर मारने की कोशिश करने का भी मुद्दा उठा सकता है। पुतिन के घोर विरोधी नेता एलेक्‍सी नवलनी के साथ जो कुछ हुआ उसको लेकर अमेरिका समेत कई देश रूस के खिलाफ हैं। इसके अलावा ब्रिटेन में पूर्व रूसी एजेंट और उनकी बेटी को नर्व एजेंट से मारने की कोशिश के लिए साजिश रचने का आरोप पुतिन पर ही लगा था। नवलनी की गिरफ्तारी और उसके बाद हुए प्रदर्शनों को दबाने और इसके लिए बल प्रयोग करने पर भी अमेरिका और अन्‍य देश पुतिन के खिलाफ हैं। अमेरिका कई बार रूस पर मानवाधिकार उल्‍लंघन का आरोप लगाता रहा है।


दोनों देशों के बीच हथियार एक बड़ा मुद्दा है। हाल के कुछ समय में रूस की रक्षा प्रणाली एस 400 इसकी एक बड़ी वजह बनी है। अमेरिका नहीं चाहता है कि रूस की इस प्रणाली को कोई भी देश खरीदे। इसको लेकर रूस और अन्‍य देशों पर दबाव भी डाला जा रहा है। तुर्की और भारत पर भी ये दबाव डाला गया है। हालांकि दोनों ही देश इससे पीछे हटने से साफ इनकार कर चुके हैं। इसके अलावा सीरिया में पुतिन का सरकार को समर्थन और वहां पर ताबड़तोड़ हमले करना साथ ही सीरियाई फौज को मदद करना हमेशा से ही अमेरिका को नापसंद रहा है। ऐसा ही कुछ यू्क्रेन और लीबिया में भी है। बाइडन के राष्‍ट्रपति बनने के बाद से दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्‍तों में भी काफी हद तक गिरावट देखी गई है। पुतिन जहां अमेरिकी जेलों में बंद अपने नागरिकों की रिहाई की बात कर सकते हैं वहीं, बाइडन की रूस की जेलों में बंद अपने नागरिकों के लिए ऐसी ही मांग कर सकते हैं।


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