जाने क्या मिला वैज्ञानिकों को कोरोना वायरस को लेकर अपनी खोज में

जाने क्या मिला वैज्ञानिकों को कोरोना वायरस को लेकर अपनी खोज में

 पिछले तीन महीनों में कोरोना वायरसने दुनियाभर में कोहराम मचा रखा है। लेकिन इन सबके बीच को अभी तक की सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात ये है कि इस वायरस की वजह से बुजुर्गों की मृत्यु सबसे ज्यादा हो रही है। 

वरिष्ठ नागरिकों की मृत्यु की गुत्थी सुलझ नहीं रही थी। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने अपनी पड़ताल में ये गुत्थी सुलझा ली है। इस समाचार को पढ़ें क्योंकि ये आपके किसी करीबी की जान बचाने में मददगार हो सकती है।

क्या मिला वैज्ञानिकों को अपनी खोज में?
अमेरिकी साइंटिस्टों ने चाइना व अन्य राष्ट्रों में कोरोना वायरस से मरे बुजुर्गों की सघन जाँच की है। इसमें पता चला है कि कोरोना वायरस उन वरिष्ठों के लिए ज्यादा खतरनाक है जो पहले से ही दिल, किडनी, फेफड़े की बीमारी से ग्रसित हैं। ये वायरस उन लोगों पर भी ज्यादा गंभीर साबित हो रहा है जो डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं। वैज्ञानिकों का बोलना है कि 60 वर्ष से ज्यादा आयु के लोग पहले से ही किसी गैर-संक्रामक रोग से ग्रसित होते हैं। साथ ही इस आयु में इम्यूनिटी भी कम हो जाती है। यही कारण है कि बुजुर्गों के लिए कोरोना वायरस खतरनाक साबित हो रहा है।

सार्स व मर्स से बेहद अलग होना भी मृत्यु का एक बड़ा कारण
वैज्ञानिकों के एक टीम ने कोरोना वायरस के हमले की भी जाँच की है। अपने शोध में इन्होने पाया कि कोरोना वायरस सार्स व मर्स जैसे फ्लू वायरस से बिलकुल अलग है। सार्स व मर्स किसी आदमी पर सीधे अटैक करते थे व इसका प्रभाव एकदम प्रारम्भ में ही दिखने लगता है। लेकिन कोरोना इनसे अलग है। ये मरीज में बहुत ज्यादा धीरे-धीरे अपना प्रभाव दिखाना प्रारम्भ करता है। यही वजह है कि जब तक मरीज अस्पताल में इसकी शिकायत करता है बहुत ज्यादा देर हो चुकी होती है। वैज्ञानिकों का बोलना है कि जरा भी सांस में तकलीफ या हल्का बुखार भी लगता है तो बुजुर्गों को तत्काल चिकित्सक के पास ले जाना लाभकारी साबित होने कि सम्भावना है।

3.81 लाख से ज्यादा लोग है प्रभावित
जॉन हॉपकिंस की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक पूरी संसार में कोरोना वायरस से 3,81 लाख लोग संक्रमित हो चुके है। इनमें से 16,559 लोग अब तक दम तोड़ चुके हैं। लेकिन इसके साथ ही एक अच्छी बात ये है कि अब तक कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बावजूद 1.01 लाख लोग अच्छा भी हो चुके हैं।