GF अरबों की मालिक, राष्ट्रपति का सीक्रट हुआ लीक

GF अरबों की मालिक, राष्ट्रपति का सीक्रट हुआ लीक

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की कथित गर्लफ्रेंड करोड़ों की मालिक है। वो हर साल 75 लाख पाउंड (लगभग 75 करोड़ रुपये) कमा रही हैं। वह क्रेमलिन समर्थक एक मीडिया कंपनी की मालिक भी हैं। वैसे तो पुतिन के बारे में जानकारियां सार्वजनिक नहीं होती हैं पर अभी हाल ही में लीक हुए टैक्स जानकारियों में यह बात सामने आई है। ऐसे में अलीना कबाएवा को पुतिन के करीबी अरबपति यूरी कोवालचुक सैलरी देते हैं।

सभी दोस्तों से संपर्क तोड़ दिया
बताया जाता है कि पेशे से जिमनास्ट अलीना राष्ट्रपति पुतिन से 2001 में मिली थीं। उस समय वह 18 साल की थीं और आज तक क्रेमलिन दोनों के बीच रिलेशनशिप का खंडन करता आया है। बीते महीने एक दोस्त ने दावा किया था कि अलीना ने जुड़वां बच्चों को जन्म देने के बाद सभी दोस्तों से संपर्क तोड़ दिया है।

इसके बाद साल 2004 में ओलिंपिक का गोल्ड मेडल जीत चुकीं अलीना बाद में गायब हो गईं। लेकिन सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, वह आज दर्जनों गुना ज्यादा कमाई कर रही हैं। मीडिया ग्रुप डायरेक्टर्स की सालाना रिपोर्ट प्रकाशित नहीं करता है। कंपनी ने कभी इस पर मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दिया और अलीना की आय के बारे में पता नहीं चला।

साथ ही फेडरल टैक्स सर्विस के डेटाबेस के अनुसार, उनकी आधिकारिक आय 78.54 करोड़ रुबल है। नैशनल मीडिया ग्रुप के कई आउटलेट्स में शेयर्स हैं जिन्हें सरकारी सब्सिडी मिली है। वहीं इस रिपोर्ट में कहा गया है कि उनकी सैलरी पूर्व जर्मन चांसलर जेरार्ड श्रोडर के आसपास है जो रूसी एनर्जी कंपनी Rosneft के चेयरमैन के तौर पर 4.5 लाख पाउंड है।

प्राइवेट लाइफ का बहुत कम ही जिक्र
इसके अलावा रिपोर्ट में सवाल किए गए हैं कि आखिर बॉल और हूप के साथ काम करने वाली जिमनास्ट रूस की सबसे बड़ी मीडिया होल्डिंग की हेड बन गईं? राष्ट्रपति के पूर्व पार्टनर की कंपनी अलीना को इतनी कीमत कैसे दी जा रही है? अलीना और पुतिन के बीच क्या कनेक्शन है? जिमनास्ट के करीबी लोगों को सफल लोगों से हमेशा कुछ मिलता रहता है। देश में सालाना औसतन आय 5,867 पाउंड है।

लेकिन क्रेमलिन ने पुतिन और अलीना के बीच के रिश्ते का खंडन किया है। वहीं पुतिन ने अपनी पत्नी ल्यूडमिला को 2014 में तलाक दे दिया था हालाकिं उनकी प्राइवेट लाइफ का बहुत कम ही जिक्र करता है। उनके दोस्तों या परिवार के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।


राष्ट्रपति बाइडेन ने लिया ये बड़ा फैसला, अमेरिका जाने वाले लोगों की बढ़ी मुसीबतें

राष्ट्रपति बाइडेन ने लिया ये बड़ा फैसला, अमेरिका जाने वाले लोगों की बढ़ी मुसीबतें

वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति  जो बाइडेन ने कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए  बड़ा फैसला लिया है।  अमेरिका आने वाले हर यात्री को क्वारंटीन रहना होगा, निगेटिव रिपोर्ट आने पर ही आगे जाने की अनुमति होगी।

अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बावजूद चीन और पाकिस्तान के प्रति नीतियों में बदलाव नहीं होगा। नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का प्रशासन भी भारत के साथ सीमा विवाद में चीन के साथ सख्ती की नीति पर चलता रहेगा। बिडेन प्रशासन की ओर से पाकिस्तान को आतंकियों को मदद करने के खिलाफ आगाह किया गया है।

अमेरिका के भावी रक्षा मंत्री जनरल (रिटायर्ड) लॉयड ऑस्टिन ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान को अपना रवैया बदलना होगा। लश्कर ए तोयबा और अन्य भारत विरोधी आतंकियों को मदद पहुंचाने की नीयत से बाज आना होगा।

उन्होंने चीन के खिलाफ भी सख्त रवैये का संकेत दिया। इससे साफ है कि बिडेन प्रशासन चीन और पाकिस्तान दोनों देशों के खिलाफ पहले की तरह सख्त नीति अपनाएगा।

चरमपंथी संगठनों पर लगाम लगाए पाक
ऑस्टिन ने साफ किया कि मेरा उद्देश्य भारत के साथ रक्षा संबंधों के लिए साझेदारी को जारी रखना होगा। ऑस्टिन ने सीनेट सशस्त्र सेवा समिति के सदस्यों को बताया कि वे अमेरिका और भारतीय साझा सैन्य हितों के सहयोग के लिए प्रयास करेंगे।

उन्होंने सदस्यों को बताया कि वे पाकिस्तान से साफ तौर पर कहेंगे कि वह हिंसक चरमपंथी संगठनों और आतंकवादियों को अपनी जमीन का इस्तेमाल करने से रोके।

कार्रवाई न करने पर जताई नाराजगी
उन्होंने आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई न करने पर पाकिस्तान के प्रति गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि भारत विरोधी आतंकी संगठनों लश्कर और जैश ए मोहम्मद के खिलाफ पाकिस्तान सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि बिडेन प्रशासन की ओर से पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया गया है।

पाक को बदलना होगा रवैया
ऑस्टिन ने कहा कि 2019 में हुए पुलवामा हमले के बाद आतंकी हमलों की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि पाकिस्तान आतंकियों पर लगाम लगाने में मदद नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान को अपना रवैया बदलना होगा और आतंकियों पर नकेल कसनी होगी। हमें आतंकियों के साथ नरम रवैया की नीति मंजूर नहीं है।

उन्होंने भविष्य में भी भारत के साथ रक्षा सहयोग जारी रखने का एलान करते हुए कहा कि हम क्वाड के जरिए रक्षा सहयोग के दायरे को और बढ़ाने की कोशिश करेंगे। क्वाड में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ भारत भी शामिल है।

विदेश मंत्री का सहयोग जारी रखने का संकेत
अमेरिका के नामित विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकन ने भी भारत के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की नीति जारी रखने का संकेत दिया है। ब्लिंकन ने सीनेट की विदेशी मामलों की समिति के सामने रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत नीति का समर्थन किया।

चार घंटे से भी ज्यादा समय तक चली इस बैठक में उन्होंने कहा कि भारत के साथ सहयोग की नीति क्लिंटन प्रशासन के आखिरी दिनों में शुरू हुई थी। ओबामा प्रशासन के दौर में रक्षा खरीद और सूचना साझेदारी में सहयोग बढ़ा। ट्रंप प्रशासन ने इसे आगे बढ़ाकर हिंद प्रशांत सहयोग की रणनीति पर काम किया।

चीन की चुनौती का करेंगे सामना
उन्होंने कहा कि इस बात में तनिक भी संदेह नहीं है कि एक राष्ट्र के तौर पर हमारे हितों को सबसे अधिक चुनौती चीन की ओर से पेश की जा रही है। अमेरिका को इस चुनौती का सामना करना है और हम पूरी मजबूती से इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि हम भारत के साथ यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे कि चीन समेत कोई भी देश भारतीय संप्रभुता को चुनौती न दे सके। आतंक के मुद्दे पर भी हम भारत के साथ हैं। दोनों देशों के आपसी रिश्तो को मजबूत बनाने के लिए बहुत सारे रास्ते हैं और हम निश्चित रूप से भारत के साथ दोस्ती का रुख बनाए रखेंगे।


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