कोरोना वायरस के चलते देश के कई शहरों में कल से लगा नाइट कर्फ्यू

कोरोना वायरस के चलते देश के कई शहरों में कल से लगा नाइट कर्फ्यू

भारत में कोरोना के संक्रमण ने फिर गति पकड़ ली है. कुछ रिपोर्ट्स का भी दावा है कि ठंड के दिनों में संक्रमित मरीजों की संख्या में वृद्धि हो सकती है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तो बीते कई दिनों से लगातार इसके मुद्दे बढ़ रहे हैं. कई राज्यों ने अपने बड़े-बड़े शहरों में नाइट कर्फ्यू लगाने की भी घोषणा की है.

मध्य प्रदेश के इंदौर, गुजरात के सूरत और राजकोट में 21 नवंबर की रात से नाइट कर्फ्यू लगा दी गई है. इंदौर में लोग रात दस बजे से लेकर प्रातः काल छह बजे तक अपने घरों से बाहर नहीं निकल सकते हैं. साथ ही गुजरात के दोनों शहरों में इसकी समय सीमा रात नौ बजे से लेकर प्रातः काल छह बजे तक रखी गई है.

हालांकि, नाइट कर्फ्यू के दौरान फैक्टरी में कार्य करने वाले मजदूरों और आवश्यक सेवा में शामिल लोगों को छूट दी गई है. आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि इंदौर में कल कोरोना के 546 नए पॉजिटव केस सामने आए हैं. इसके साथ ही संक्रमण का कुल आंकड़ा 37,661 हो गया है. वहीं यदि गुजरात की बात करें तो कल यहां 1,515 नए मुद्दे सामने आए. इसके साथ ही यहां कोरोना के कुल मामले 1,95,917 हो गए. इनमें 13,285 एक्टिव केस हैं.

राजस्थान के 8 शहरों में नाइट कर्फ्यू, मास्क नहीं लगाने पर अब 500 रुपये जुर्माना
राजस्थान सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण के मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित आठ जिला मुख्यालयों में रात्रिकालीन कर्फ्यू लगाने का निर्णय किया है. इसके साथ ही सार्वजनिक स्थलों पर मास्क नहीं पहनने पर जुर्माना बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है. वहीं राजधानी जयपुर में धारा 144 लगाई गयी है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में शनिवार रात को प्रदेश मंत्रिपरिषद की मीटिंग में ये निर्णय किए गए. मीटिंग में सर्दी और त्योहारी सीजन के कारण संक्रमण के बढ़ते मामलों को नियंत्रित करने के तरीकों पर विचार हुआ.

बैठक में यह फैसला किया गया कि संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित आठ जिला मुख्यालयों (जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर, उदयपुर, अजमेर, अलवर और भीलवाड़ा) के नगरीय क्षेत्र में बाजार, रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल और अन्य वाणिज्यिक संस्थान शाम सात बजे तक ही खुले रहेंगे. इन आठ जिला मुख्यालयों के नगरीय क्षेत्र में रात आठ बजे से प्रातः काल छह बजे तक रात्रिकालीन कर्फ्यू रहेगा. वहीं मास्क नहीं पहनने पर लगाया जाने वाला जुर्माना 200 रुपये से बढ़ाकर अब 500 रूपये कर दिया गया है. हालांकि इस दौरान शादी समारोह में जाने वाले, दवाइयों सहित अति आवश्यक सेवाओं से संबंधित लोगों तथा बस, ट्रेन और हवाई जहाज में सफर करने वालों को आवागमन की छूट होगी. 


किसानों से बातचीत से पहले PM मोदी की बड़ी बैठक

किसानों से बातचीत से पहले PM मोदी की बड़ी बैठक

नई दिल्ली: केंद्रीय सरकार द्वारा लाये गए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान दिल्ली बॉर्डर पर आज 10वें दिन भी जमे हुए हैं। सरकार और किसानों के बीच हो चुकी दो बार की वार्ता फेल हो चुकी है जिसका कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। इस बीच गृहमंत्री अमित शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचे। शनिवार को किसान संगठनों के साथ अगले दौर की बैठक से पहले ये बड़ी मीटिंग हुई। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी मौजूद हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी पहुंचे।

दोपहर 2 बजे किसानों के साथ एक बैठक
पीएम मोदी के साथ किसान आंदोलन को लेकर गृहमंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल की बैठक करीब 11:40 बजे खत्म हो गई। यह बैठक करीब दो घंटे चली। बैठक से पहले केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आज दोपहर 2 बजे किसानों के साथ एक बैठक निर्धारित है। मुझे बहुत उम्मीद है कि किसान सकारात्मक सोचेंगे और अपना आंदोलन समाप्त करेंगे।

आज की बैठक में किसानों की शंकाओं को दूर किया जाएगा-कैलाश चौधरी
केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि केंद्र के साथ आज की बैठक में किसानों की शंकाओं को दूर किया जाएगा। हाल की बैठकों में, कुछ मुद्दों को स्पष्ट किया गया था। यह विपक्ष की राजनीति है, वे विरोध-प्रदर्शन को और भड़का रहे हैं. बैठक फलदायी होगी और हमें उम्मीद है कि किसान विरोध वापस लेंगे।

सरकार, तीन काले कानूनों को वापस ले-रामपाल जाट
दूसरी ओर किसान महापंचायत के नेता रामपाल जाट ने कहा कि सरकार को तीन काले कानूनों को वापस लेने की घोषणा करनी चाहिए और उसे लिखित में देना होगा कि एमएसपी जारी रहेगी। अगर आज की वार्ता से कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकलता है, तो राजस्थान के किसान एनएच-8 के साथ दिल्ली की ओर मार्च करेंगे और जंतर मंतर पर डेरा डालेंगे।

किसान कृषि कानून वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं। किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर ठोस भरोसा चाहते हैं। केंद्र सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की बात तो नहीं मान रही है लेकिन किसानों की कुछ ऐसी मांग हैं जिनपर वह राजी होती दिखाई दे रही है।

 किसानों का चिल्ला बॉर्डर (दिल्ली-नोएडा लिंक रोड) पर भी प्रदर्शन जारी
अभी फिलहाल किसानों का चिल्ला बॉर्डर (दिल्ली-नोएडा लिंक रोड) पर भी प्रदर्शन जारी है। एक किसान ने कहा कि अगर सरकार के साथ बातचीत में आज कोई नतीजा नहीं निकला तो फिर संसद का घेराव करेंगे। कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर पिछले नौ दिन से डटे हुए हैं और उनके प्रदर्शन का 10वां दिन है। तमाम मसलों को लेकर दो बार केंद्र सरकार के साथ चर्चा हुई है। मगर अभी तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आाया है।


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