केंद्र सरकार ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 की रूपरेखा में किए कई बदलाव

केंद्र सरकार ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 की रूपरेखा में किए कई बदलाव

स्वच्छता सर्वेक्षण के हालिया नतीजों के बाद अगले वर्ष के स्वच्छता प्रमाणीकरण की रूपरेखा तय हो गई है। शहरी मामलों के मंत्रालय ने 2022 के स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए क्वालिटी काउंसिल आफ इंडिया (क्यूसीआइ) की नियुक्ति कर दी है। क्यूसीआइ स्वच्छ सर्वेक्षण का त्रैमासिक मूल्यांकन करेगी। सर्वे में पहली बार शहर की साफ हवा व सफाई मित्रों की सुरक्षा भी देखी जाएगी। निकायों को कम से कम एक वार्ड आत्मनिर्भर बनाना होगा।

केंद्र सरकार ने नगर निकायों से सभी सफाई कर्मचारी व अधिकारियों की जानकारी मांगी है। शहरी विकास निदेशालय ने स्वच्छ सर्वेक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 10 निकायों पर एक मास्टर ट्रेनर नियुक्त कर दिए हैं। हल्द्वानी के सहायक नगर आयुक्त गौरव भसीन को अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों व नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. मनोज कांडपाल को नैनीताल व ऊधमसिंह नगर जिलों के निकायों का मास्टर ट्रेनर बनाया है। स्वच्छ सर्वेक्षण में इस बार हल्द्वानी 52 शहरों से पिछड़कर 281वें स्थान पर पहुंच गया था। ऐसे में हल्द्वानी समेत कुमाऊं के अन्य निकायों पर अपनी छवि सुधारने की चुनौती है।

आजादी के उत्सव से जुड़ी सफाई

स्वच्छ सर्वेक्षण इस बार 7500 अंकों का होगा। आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर सर्वेक्षण को आजादी 75 रखा है। अभी तक 6000 अंकों से मूल्यांकन होता था। सर्वे की शुरुआत फरवरी 2022 में करना तय किया है। पहली बार सर्वे में सफाई मित्रों यानी सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा अहम होगी। 31 दिसंबर तक शहरों को नवाचार करना होगा। जिसे 15 जनवरी तक पोर्टल पर अपलोड करना होगा।

इस तरह बदला नंबर गेम

सेवा प्रगति : 3000 अंक। पहले 2400 अंक थे। इसमें कूड़े का पृथक संग्रह, प्रसंस्करण व निपटान, सतत स्वच्छता, सफाई मित्र सुरक्षा, डिजिटल ट्रैकिंग व सीखना आदि कार्य देखा जाएगा।

सिटीजन फीडबैक : 2250 अंक। पहले 1800 अंक थे। इसके तहत प्रतिक्रिया, जुड़ाव, अनुभव, स्वच्छता एप, महामारी में प्रभावी तैयारी, नवाचार आदि की परख होगी।

प्रमाणीकरण : 2250 अंक। पहले 1800 अंक थे। इसमें कचरा मुक्त शहर, स्टार रेटिंग, ओडीएफ प्लस, ओडीएफ डबल प्लस या वाटर प्लस के आधार पर नंबर मिलेंगे।

पांच श्रेणियों में पुरस्कार : पहली श्रेणी प्लेटिनियम सिटी, दूसरी गोल्ड सिटी, तीसरी सिल्वर सिटी, चौथी कांस्य सिटी, अंतिम कापर सिटी रहेगी।

शत प्रतिशत वार्ड शामिल होंगे

सर्वेक्षण का दायरा बढ़ाकर 100 फीसद वार्ड कर दिया है। पिछली बार नव सम्मिलित वार्डों को सर्वे से बाहर रखा गया था। इस बार भवनों की जियो टैगिंग का मापक भी रखा गया है। शहर के सार्वजनिक शौचालय 24 घंटे खुले रहेंगे। उनमें सेनेटरी नैपकिन की उपलब्धता करनी होगी। सहायक नगर आयुक्त हल्द्वानी गौरव भसीन ने बताया कि स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 की तैयारी शुरू हो गई है। मास्टर ट्रेनर को आनलाइन माध्यम से दिल्ली से प्रशिक्षित किया जा रहा है। स्वच्छता की स्थिति सुधरे, इसके लिए अभी से कार्ययोजना बनाई जा रही है।


उत्तराखंड में कोरोना! 24 घंटे में सामने आए 2904 नए मामले, कोविड में अनाथ हुए बच्चों को मिलेगी आपदा राहत राशि

उत्तराखंड में कोरोना! 24 घंटे में सामने आए 2904 नए मामले, कोविड में अनाथ हुए बच्चों को मिलेगी आपदा राहत राशि

प्रदेश में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 2904 नए मामले सामने आए हैं, जबकि चार कोरोना संक्रमितों की मौत हो गई। दूसरी ओर, बुधवार को 1241 मरीजों ने कोरोना से जंग जीत ली।



स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में सामने आए 2904 नए मामलों में अल्मोड़ा में 19, बागेश्वर में 127, चमोली में 06, चंपावत में 30, देहरादून में 1016, हरिद्वार में 337, नैनीताल में 397, पौड़ी में 89, पिथौरागढ़ में 127, रुद्रप्रयाग में 252, टिहरी में 85, ऊधमसिंह नगर में 384 और उत्तरकाशी में 35 मामले शामिल हैं। प्रदेश में अब 32880 एक्टिव कोरोना केस हैं, जिनमें सर्वाधिक 14387 केस देहरादून जिले के हैं।

कोविड में अनाथ हुए बच्चों को मिलेगी आपदा राहत राशि

प्रदेश के कोविड में अनाथ हुए बच्चों को आपदा राहत राशि मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हलावा देते हुए मुख्य सचिव डॉ.एसएस संधू ने समस्त जिलाधिकारियों को इस संबंध में आदेश जारी किया है। कहा गया है कि 31 जनवरी तक इस तरह के बच्चों को राहत राशि उपलब्ध कराते हुए इससे शासन को अवगत कराएं।

मुख्य सचिव की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने बाल स्वराज पोर्टल पर अपलोड ऐसे बच्चे जिनके दोनों अभिभावक या एकमात्र जीवित अभिभावक की कोविड 2019 से मौत हो गई है, उन्हें आपदा राहत राशि दी जाए। बाल स्वराज पोर्टल पर 25 जनवरी 2022 तक उत्तराखंड के इस तरह के 162 बच्चे पंजीकृत हैं।

जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी व आईसीडीएस सुपरवाइजर की टीम बनाकर ऐसे बच्चों का सर्वेक्षण किया जाए। यह देखा जाए कि इन बच्चों को आपदा राहत राशि मिली या नहीं मिली। यदि इन बच्चों को यह राशि नहीं मिली तो उन्हें राशि उपलब्ध कराई जाए। जबकि एक फरवरी तक इस संबंध में रिपोर्ट सचिव आपदा प्रबंधन को उपलब्ध कराई जाए।