तब एक झटके में टूट गई थी लालू-रघुवंश की दोस्ती, एक नहीं कई थे कारण

तब एक झटके में टूट गई थी लालू-रघुवंश की दोस्ती, एक नहीं कई थे कारण

जिंदगी भर राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (lalu Prasad Yadav) के संकटमोचक रहे रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh Prasad Singh) ने जीवन के अंतिम दिनों में उनसे किनारा कर लिया था। करीब 32 साल का साथ एक झटके के साथ टूट गया। आरजेडी से इस्‍तीफा देने के बाद रघुवंश प्रसाद सिंह के जीवन की डोर भी ठीक एक साल पहले 13 सितंबर को टूट गई। उन्‍होंने लालू व आरजेडी से नाता तोड़ने का कोई कारण तो नहीं बताया, लेकिन यह सवाल तो खड़ा हो ही गया कि आखिर ऐसा क्‍या हुआ? आखिर इतनी लंबी व गहरी दोस्‍ती क्‍यों और कैसे टूट गई?

एक पत्र से टूट गया 32 साल पुराना नाता

करीब 32 साल की दोस्‍ती के बाद 74 साल की उम्र में बीमार रघुवंश प्रसाद सिंह ने लालू प्रसाद यादव को पत्र भेजकर आरजेडी से इस्तीफा दे दिया। पत्र में उन्‍होंने कर्पूरी ठाकुर (Karpoori Thakur) के निधन के बाद 32 वर्षों तक लालू प्रसाद यादव के पीछे-पीछे खड़े रहने की बात लिखी, साथ हीं पार्टी व आमजनों से मिले स्नेह को भी याद किया। यह भी लिखा कि अब और नहीं, मुझे क्षमा करें। हालांकि, यह भी तथ्‍य है कि लालू प्रसाद यादव ने रघुवंश प्रसाद सिंह के इस्‍तीफा को स्‍वीकार नहीं किया। बहुत संभव है, अगर उनका तुरंत निधन नहीं हो जाता, तो लालू उन्‍हें मनाने में सफल हो जाते, लेकिन रघुवंश प्रसाद सिंह के साथ यह संभावना खत्‍म हो गई।


धीरे-धीरे पार्टी में जाती रही पुरानी हैयिसत

रघुवंश प्रसाद सिंह व लालू प्रसाद यादव की दोस्‍ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों जननायक कर्पूरी ठाकुर के वक्‍त से ही साथ थे। कर्पूरी ठाकुर के निधन के बाद रघुवंश प्रसाद सिंह ने ही आगे बढ़ाया था। उन्‍होंने लालू के विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने में बड़ी मदद की थी। आरजेडी की स्‍थापना में भी रघुवंश प्रसाद सिंह की बड़ी भूमिका रही। पार्टी में रघुवंश प्रसाद सिंह की हैसियत लालू प्रसाद यादव जैसी रही, लेकिन बदलते वक्‍त के साथ सियासत बदली तो तेजस्वी यादव के साथ कई मुद्दों पर उनके मतभेद सामने आए। रघुवंश को कई बार बैकफुट पर जाना पड़ा। धीरे-धीरे पार्टी में उनकी पहले वाली हैायिसत जाती रही।

जगदानंद सिंह के खिलाफ उठाई आवाज

सवर्ण आरक्षण के मुद्दे पर रघुवंश प्रसाद सिंह एवं तेजस्‍वी यादव का मतभेद स्‍पष्‍ट दिखा। तेजस्‍वी नहीं झुके, रघुवंश को पीछे होना पड़ा। रघुवंश प्रसाद सिंह के विरोध को दरकिनार कर तेजस्‍वी यादव की पसंद जगदानंद सिंह को आरजेडी प्रदेश अध्‍यक्ष बनाया गया। जगदानंद सिंह द्वारा पार्टी में अनुशासन के नाम पर बनाए गए नियमों का विरोध आज भले हीं तेज प्रताप यादव कर रहे हों, लेकिन इसके खिलाफ पहली आवाज रघुवंश प्रसाद सिंह ने ही उठाई थी। इस मामले में भी रघुवंश प्रसाद सिंह की बातों को अहमियत नहीं दी गई।

 
रामा सिंह को पार्टी में लाले की कोशिश

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में आरजेडी की हार के बाद रघुवंश प्रसाद सिंह को राज्यसभा भेजे जाने के कयास लगाए जा रहे थे। रघुवंश को भी इसकी उम्‍मीद थी, लेकिन लालू ने अपने एक अन्‍य पुराने सहयोगी प्रेमचंद गुप्ता तथा व्‍यवसायी अमरेंद्र धारी सिंह को राज्यसभा भेज दिया। रही-सही कसर रघुवंश के विरोधी व उन्‍हें साल 2014 के लोकसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर हरा चुके रामा सिंह को पार्टी में लाने की कोशिशों ने पूरी कर दी। रामा सिंह ने भी कहा कि वे आरजेडी में जरूर आएंगे। साथ ही उन्‍होंने रघुवंश प्रसाद सिंह के खिलाफ बयान भी दे दिया। इसपर तेजस्वी यादव के मौन से भी रघुवंश की नाराजगी को हवा मिली। रामा सिंह को पार्टी में लाने की कोशिशों के बाद ही रघुवंश प्रसाद सिंह कड़े एक्‍शन में आते दिखे। उन्‍होंने पार्टी उपाध्‍यक्ष के पद से इस्‍तीफा दे दिया।

 
नीतीश को बनाना चाहते थे सीएम फेस

रघुवंश प्रसाद सिंह मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार को महागठबंधन में रखने तथा उन्‍हें मुख्‍यमंत्री चेहरा बनाने के पक्षधर थे। वे नीतीश कुमार को तेजस्वी यादव का राजनीतिक गुरु बनाने की बात करते थे। जबकि, लालू प्रयसाद यादव अपने छोटे बेटे तेजस्‍वी यादव के राजनीतिक भविष्‍य से जुड़े इस मसले पर मौन साध गए। ऐसे में रघुवंश प्रसाद सिंह फिर बेकफुट पर नजर आए।

 
तेज प्रताप के बयानों ने पूरी कर दी कसर

रघुवंश प्रसाद सिंह का लालू प्रसाद यादव के परिवार से गहरे जुड़े थे। लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के तलाक के मामले में वे चंद्रिका राय और लालू परिवार के रिश्ते बनाए रखने के पक्ष में थे। रघुवंश प्रसाद सिंह के इस स्‍टैंड से तेज प्रताप यादव सहमत नहीं दिखे। कालक्रम में रघुवंश प्रसाद सिंह के खिलाफ तेज प्रताप यादव के हमलों ने उन्‍हें बेहद आहत किया। पार्टी में नाराज रघुवंश की तुलना तेज प्रताप यादव ने आरजेडी के समंदर में एक लोटा पानी से कर दी। कहा कि अगर आरजेडी के समंदर से रघुवंश का एक लोटा पानी निकल भी जाए तो कोई फर्क नहीं पड़ने जा रहा।


बिहार की शिक्षा व्‍यवस्‍था पर उठे सवाल, गया सदर के स्‍कूलों में बगैर पुस्तक पढ़ रहे 30 हजार विद्यार्थी

बिहार की शिक्षा व्‍यवस्‍था पर उठे सवाल, गया सदर के स्‍कूलों में बगैर पुस्तक पढ़ रहे 30 हजार विद्यार्थी

सरकारी विद्यालयों में नामांकित विद्यार्थियों का पढ़ाई-लिखाई बेहतर हो, इसके लिए सरकार काफी प्रयास कर रही है। विद्यार्थियों को पुस्तक खरीदने के लिए बैंक में खाता खोलाकर राशि भेजी गई। उन्हें समय पर पुस्तक मिले इसके लिए बीआरसी एवं सीआरसी स्तर पर कैंप लगाने की जिम्मेवारी एक पुस्तक कंपनी ने उठाया। लेकिन कंपनी ने दो-चार जगह पर ही कैंप लगाई। जिसके कारण सभी विद्यार्थियों के पास पुस्तक उपलब्ध नहीं हुआ। नगर निगम के 127 और नगर प्रखंड के 115 प्राथमिक एवं मध्य विद्यालय में शिक्षा सेवकों के द्वारा सर्वे कराया गया। इसमें 238 विद्यालय का रिपोर्ट केआरपी के पास जमा हुई। 238 विद्यालय में 52298 छात्र-छात्रा नामांकित हैं। इसमें 9915 विद्यार्थियों के पास नया पुस्तक उपलब्ध है। 5903 विद्यार्थियों के पास पुरानी पुस्तक है। 6019 विद्यार्थियों के पास कुछ नया और कुछ पुराना पुस्तक है। जबकि 30461 छात्र-छात्रा के पास एक भी पुस्तक नहीं है।

छह माह बाद भी नहीं मिली पुस्तक 

गया सदर के 238 विद्यालय में नामांकित 52298 छात्र-छात्रा में 30461 विद्यार्थियों के पास एक भी पुस्तक नहीं है। उक्त विद्यार्थियों को मार्च माह में ही वर्गवार पुस्तक उपलब्ध करा देना था। लेकिन छह माह बाद भी 30461 विद्यार्थियों को पुस्तक उपलब्ध नहीं कराया गया। इन बच्चों का पठन-पाठन कैसे होता होगा इसका आकलन आप भी लगा सकते हैं।


कैंप लगता तो बच्चे खरीद लेते पुस्तक

नगर प्रखंड के मध्य विद्यालय नीमा के शिक्षा सेवक ने कहा कि 316 विद्यार्थी नामांकित हैं। जिसमें 59 छात्र-छात्रा के पास पुस्तक है। जबकि 257 विद्यार्थियों के पास एक भी पुस्तक नहीं है। उक्त छात्र-छात्रा का कहना है कि अगर कैंप लगाकर पुस्तक दी जाए तो हमलोग पुस्तक खरीद लेगें। डुमरा प्राथमिक विद्यालय के प्रभारी मो अजीम का कहना है कि हमारे विद्यालय में भी काफी बच्चों के पास पुस्तक नही है। बगैर पुस्तक के बच्चों का पढ़ाई-लिखाई सही से नहीं हो रहा है। बीआरसी में जाने के बाद जानकारी मिली थी कि कैंप लगाकर विद्यार्थियों को पुस्तक दिया जाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। जिसके कारण बच्चों के पास एक भी पुस्तक नहीं है। मध्य विद्यालय चौहर के प्रधानाध्यापक बद्री नारायण प्रजापति का कहा कि किताब खरीदने के लिए कैंप नहीं लगी है। जिसके कारण विद्यार्थियों के पास पुस्तक नहीं है।


रखी जाएगी बात 

केआरपी दशरथ प्रसाद का कहना है कि गया सदर के 242 प्राथमिक एवं मध्य विद्यालय में शिक्षा सेवक के द्वारा सर्वे कराया गया। जिसमें 238 विद्यालय की रिपोर्ट आई। जहां 30461 छात्र-छात्रा के पास एक भी पुस्तक नहीं है। उक्त विद्यार्थियों को पुस्तक जल्द से जल्द उपलब्ध कराने की बात संबंधित अधिकारियों से कही जाएगी।