मंगल को लेकर NASA ने किया ये बड़ा दावा

 मंगल को लेकर  NASA ने किया ये बड़ा दावा

अमेरिकी अं​तरिक्ष शाखा नासा-जेपीएल के एक शीर्ष ऑफिसर ने जोर देते हुए बोला कि जैसा कि मानव जाति ने अभी से कुछ सालों में मंगल जैसे अंतरिक्ष अभियानों के लिए लक्ष्य रखा है।

 

 इस समय नासा व भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) जैसी अंतरिक्ष एजेंसियों के माध्यम से उपलब्ध humongous डेटा को लोकतंत्रीकरण करने का है जो अगली जीन क्लाउड कंप्यूटिंग के माध्यम से अंतरिक्ष अनुसंधान को बढ़ावा दे सकता है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 2022 में आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा से लॉन्च के लिए निर्धारित, NASA-ISRO सिंथेटिक एपर्चर रडार (NISAR) मिशन अमेरिका व भारतीय अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच एक दोहरी आवृत्ति वाली सिंथेटिक एपर्चर रडार को विकसित करने व लॉन्च करने के लिए पृथ्वी अवलोकन उपग्रह एक संयुक्त परियोजना है। उपग्रह दोहरी आवृत्तियों (एल व एस बैंड) का उपयोग करने वाला पहला रडार इमेजिंग होगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इसरो द्वारा 788 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की आसार है, जबकि इस जरूरी परियोजना पर JPL का कार्य का भाग $ 800 मिलियन से अधिक होने की उम्मीद है। उन्नत रडार इमेजिंग जो कि पृथ्वी का एक अभूतपूर्व, विस्तृत दृश्य प्रदान करेगी, NISAR उपग्रह को निरीक्षण व कुछ माप लेने के लिए बनाया गया है। साथ ही ये गृह की सबसे जटिल प्रक्रियाएं - पारिस्थितिकी तंत्र की गड़बड़ी, बर्फ की चादर ढहना व भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी व भूस्खलन जैसे प्राकृतिक खतरे के बारे में भी बताएगा।