अमेरिका ने रूस के राजनयिकों को दिया देश छोड़ने का आदेश

अमेरिका ने रूस के राजनयिकों को दिया देश छोड़ने का आदेश

अमेरिका और रूस के बीच की तल्खियां अब भी कम नहीं हुई हैं। वाशिंगटन ने रूस के 24 राजनयिकों को देश छोड़कर चले जाने का आदेश दिया है। अमेरिका के आदेश के मुताबिक इन सभी को 3 सितंबर तक देश छोड़कर जाना होगा। अमेरिका में रूस के राजदूत ने इसकी जानकारी दी है। शिन्‍हुआ समाचार एजेंसी के हवाले से एएनआई ने बताया है कि दूतावास से लगभग सभी राजनियकों को अब जाना होगा। इन राजनयिकों की जगह दूसरे राजनयिकों भी रूसी दूतावास में तैनात नहीं हो सकेंगे। इसकी वजह ये है कि अमेरिका से इन्‍हें वीजा नहीं मिला है।

रूसी राजदूत एंटोली एंटोनोव ने कहा है कि उन्‍हें एक आदेश मिला है जिसमें 3 सितंबर तक उनके 24 राजनयिकों को देश छोड़ने का आदेश दिया गया है। दिसंबर 2020 में अमेरिका और रूस के बीच ये समझौता हुआ था जिसमें कहा गया था कि अमेरिका में रूसी राजनयिक तीन वर्षों तक रह सकेंगे। एंटोनोव ने ये भी कहा कि फिलहाल जितना वो जानते हैं कि ये दूसरे देशों के राजनयिकों पर लागू नहीं है।

उनका ये बयान एक इंटरव्‍यू के दौरान सामने आया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता नेड प्राइस ने एंटोनोव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उनकी स्थिति के बारे में फिलहाल कुछ पता नहीं है, गलत है। उन्‍होंने ये भी कहा कि तीन वर्षों की वीजा अवधि कोई नई बात नहीं है। ज वीजा की अवधि खत्‍म हो जाती है तो राजनयिकों को जाना ही होता है, या फिर उन्‍हें वीजा की अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन करना होता है।

अप्रेल में रूसी विदेश मंत्रालय ने यूएस डिप्‍लोमेटिक मिशन पर रूसी नागरिकों को हायर करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। इसके अलावा प्रशासनिक कार्यों के लिए और तकनीकी सहायता के लिए भी किसी तीसरे देश के नागरिक की नियुक्‍त पर प्रतिबंध लगा दिया था। ये सब कुछ रूस के राजनयिकों को अमेरिका से बाहर जाने का आदेश सामने आने के बाद किया गया था।

अमेरिका और रूस के राष्‍ट्रपति के बीच पिछले माह स्विजरलैंड में वार्ता हुई थी, जिसमें रिश्‍तों पर जमी बर्फ को हटाने का प्रयास किया गया था। 


अफगानिस्तान में लौटेगा मौत की सजा का दौर, तालिबानी नेता मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी का बयान

अफगानिस्तान में लौटेगा मौत की सजा का दौर, तालिबानी नेता मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी का बयान

अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद अब कट्टर इस्लामी कानूनों को लागू किया जाएगा। तालिबान के संस्थापकों में से एक और पूर्व कार्यकाल में इस्लामी कानूनों को कठोर व्याख्या के साथ लागू करने करने वाले एक प्रमुख प्रवर्तक ने कहा कि अफगानिस्तान में फिर से फांसी देने और हाथ काटने जैसी सजाएं देने का दौर लौटेगा। द एसोसिएटेड प्रेस के साथ एक साक्षात्कार में, मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी ने अतीत में तालिबान के फांसी देने के तरीके पर दुनिया के ऐतराज को खारिज कर दिया है।

उल्लेखनीय है तालिबान के पिछले कार्यकाल में अक्सर चोरी करने वालों के हाथ काटने जैसी सजाएं स्टेडियम में भीड़ के सामने दी जाती थीं। तुराबी ने दुनिया को अफगानिस्तान के नए शासकों के मामले में हस्तक्षेप करने के खिलाफ चेतावनी दी।तुराबी ने कहा, स्टेडियम में दंड के लिए सभी ने हमारी आलोचना की। लेकिन हमने कभी उनके कानूनों और सजा देने के तरीके के बारे में कुछ नहीं कहा। हम नहीं चाहते कि कोई हमें बताए कि हमारे कानून क्या होने चाहिए। हम इस्लाम का पालन करेंगे और कुरान के मुताबिक अपने कानून बनाएंगे।


अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे से अमेरिका को सताने लगा हमले का डर

फेडरल ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआइ)के निदेशक क्रिस्टोफर रे ने चेतावनी दी कि अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा अमेरिका स्थित चरमपंथियों को अमेरिकी जमीन पर हमले की साजिश रचने के लिए प्रेरित कर सकता है। रे ने मंगलवार को सीनेट होमलैंड सिक्योरिटी एंड गवर्नमेंटल अफेयर कमेटी के समक्ष यह आशंका जाहिर की।दि हिल की रिपोर्ट के मुताबिक, रे ने कहा कि 2020 के मध्य से घरेलू आतंकवाद के मामले आसमान छू रहे हैं। मामले एक हजार से 2700 तक पहुंच गए हैं, जिनकी जांच अभी जारी है। चरमपंथी संगठनों ने कभी भी अमेरिकी जमीन पर हमलों की साजिश रचना बंद नहीं किया है।


इतना ही नहीं, नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के निदेशक क्रिस्टाइन अबीजेद ने भी कमेटी के समक्ष कहा कि दो दशक पूर्व की तुलना में अमेरिका में आतंकी हमलों की आशंका अधिक बढ़ गई है। अबीजेद ने यह भी कहा कि अमेरिकी अधिकारियों को इस बात पर ध्यान देना होगा कि अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट किस प्रकार अपनी ताकत में इजाफा कर सकते हैं और अमेरिका में हमलों की साजिश रच सकते हैं।