गर्भावस्था में कभी ना खाएं ये चीज़ें, हो सकता है नुकसान

गर्भावस्था में कभी ना खाएं ये चीज़ें, हो सकता है नुकसान

गर्भावस्था हर महिला के जीवन का अहम समय होता हैं। एक प्रेग्नेंट लेडी को अपना कितना ध्यान रखना होता है ये तो आप जानते ही हैं। लेकिन अगर ध्यान ना रखा जाये तो कई मुश्किलों का सामना भी करना पड़ सकता है। गर्भावस्था के समय महिलाओं को अपनी सेहत और खानपान पर बहुत ध्यान रखने की जरूरत होती हैं। इसलिए आज हम आपको कुछ ऐसे आहार के बारे में बताने जा रहे है जिनका गर्भावस्था के दौरान सेवन करना आपके सेहत के नुकसानदायक साबित हो सकता हैं। उन्हें भूलकर भी ना खाएं....

कैफीन 
गर्भावस्था में जितना हो सकें आपको चाय, कॉफ़ी का सेवन कम से कम करना चाहिए, क्योंकि इसमें काफ्फीन की मात्रा अधिक होती है, कई महिलाएं सारा दिन थोड़े थोड़े समय के बाद चाय का सेवन करती है, गर्भावस्था में इसके कारण गैस की समस्या उत्त्पन्न हो सकती है, और साथ ही इसके कारण पेशाब भी अधिक आने लगता है।

संतरा 
गर्भवस्था के दौरान खट्टे फल खाने से बचना बहुत जरूरी है ये आपके गर्भ को नुकसान पंहुचा सकते है, एक गर्भवती महिला को संतरा खाने से बचना चाहिए।

कच्चा पपीता 
पपीते में बहुत ज्यादा विटमैन और पोषक तत्व होते है जो भ्रूण के विकास के लिए बहुत उपयोगी होते है। लेकिन अगर आप गर्भवस्था में अच्छा पका हुआ पपीता नहीं कहते है को इससे आपके शिशु को बहुत नुकसान हो सकता है क्यूंकि कच्चे पपीते में लेटेक्स नमक एंजाइम होता है यह लेटेक्स गर्भशय के संकुचन की और जाता है। इसलिए कच्चा पपीता गर्भशय में हानिकारक है।

मछली 
सीफूड और कुछ विशेष प्रकार की मछलियों में जैसे - स्वॉर्डफिश आदि में उच्च मात्रा में मरकरी होती है जिसके सेवन से मिस्कैरेज होने का खतरा रहता है। इसलिए इस प्रकार के भोजन को करने से बचें या अच्छी तरह पकाकर खाएं।


क्या है ब्रेन फॉग? एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण और सावधानियां

क्या है ब्रेन फॉग? एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण और सावधानियां

Brain Fog Causes, Symptoms & Precautions: यदि आप छोटी-छोटी बातों को बार भूल रहे हैं या फिर आपके लिए अपनी ही कही बात को याद रखने में मुश्किल आ रही है, तो इसे ब्रेन फॉग (Brain Fog) कहते हैं ये कोई मेडिकल टर्म नहीं है बल्कि यह एक आम भाषा है, जिसके जरिए दिमाग से जुड़ी कई समस्याओं के ग्रुप के बारे में बताया जाता है, जैसे याददाश्त निर्बल होना, ध्यान न लगना, सूचना को समझने में परेशानी होना, थकावट रहना और इधर-उधर के विचार आना आदि ब्रेन फॉग के लक्षण दूसरी कई संभावित रोंगों में भी दिखाई देते हैं जैसे कैंसर और उसमें दी जाने वाली कीमोथेरेपी, डिप्रेशन, क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम और गर्भावस्था के दौरान भी ब्रेन फॉग की समस्या आ सकती है

हिंदुस्तान अखबार की न्यूज रिपोर्ट में एक अध्ययन के अनुसार लिखा है गया है कि कोविड-19 से ठीक हो चुके करीब 28 फीसदी लोगों ने ब्रेन फॉगिंग, मूड चेंज, थकान और एकाग्रता में कमी की कम्पलेन की है

क्या होते हैं ब्रेन फॉग के लक्षण?
दिल्ली के उजाला सिग्नस हॉस्पिटल (Ujala Cygnus Hospital) के निदेशक डॉ शुचिन बजाज (Shuchin Bajaj) ने इस न्यूज रिपोर्ट में बताया है कि ब्रेन फॉग के कारण आदमी के व्यवहार में तेजी से परिवर्तन आता है ऐसे लोगों में हमेशा थकान रहना, किसी कार्य में दिल न लगना, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, अपनी पसंद के कार्य भी रुचि का आभाव, लगातार सिर दर्द, नींद न आ पाना और छोटी-छोटी बातें भूल जाना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं डॉक्टर खून की जाँच में इसका पता लग सकते हैं जैसे शुगर या थायरॉइड का अनबैलेंस, किडनी आदि का फंक्शन सही न होना, या किसी संक्रमण का होना या शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी ब्रेन फॉग के रूप में दिखाई देती है

ब्रेन फॉग के कारण 
– नींद पूरी न होना
– स्क्रीन के साथ अधिक समय बिताना
– सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर प्रभाव डालने वाली समस्याएं, जैसे मल्टीपल स्केलेरोसिस
–  जिन रोगों में शरीर के अंदरूनी हिस्सों में सूजन आने की संभावना रहती है, या ब्लड शुगर का लेवल ऊपर-नीचे होने लगता है, उस वजह से भी ब्रेन फॉग की स्थिति हो सकती है जैसे डायबिटीज, हायपरथायरॉइड, डिप्रेशन, अल्जाइमर और एनीमिया

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कैंसर और कीमोथेरेपी
कैंसर के उपचार में दी जाने वाली कीमोथेरेपी में कुछ विशेष दवाएं होती हैं, जो याददाश्त पर प्रभाव डाल सकती हैं हालांकि, आमतौर पर यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती है

क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम
अधिक थकान यानी क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम की स्थिति 6 महीने या उससे अधिक समय तक बनी रह सकती है इसमें आदमी को मानसिक थकान होती है, जिससे गफलत रहने लगती है

दवाओं का असर
कुछ दवाओं के सेवन से भी ब्रेन फॉग हो सकता है, डिप्रेशन या इन्सोम्निया में दी जाने वाली दवाएं सोचने समझने पर प्रभाव डालती हैं

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खान-पान और सावधानियां
– अपनी डाइट में अमीनो एसिड, विटामिन ए, बी, सी और ओमेगा 3 फैटी एसिड नियमित रूप से शामिल करें
– दोपहर में कैफिन युक्त पेय न लें
– शराब और स्मोकिंग से परहेज करें
– रोज 15 मिनट धूप लें
– नियमित अभ्यास जरूर करें
– लक्षणों के आधार पर डॉक्टर से एक्स रे, सीटी स्कैन, एमआरआई, एलर्जी टेस्ट आदि की सलाह भी ले सकते हैं
– कई मामलों में दवाओं के साथ थेरेपी भी इस समस्या से निपटने में मददगार हो सकती है