गर्वनर की नियुक्ति में राज्य की भूमिका

गर्वनर की नियुक्ति में राज्य की भूमिका

राज्यपाल किसी विधेयक को कितने दिन तक रोक कर रख सकते हैं, इसे लेकर कानून बनना चाहिए. गवर्नर की नियुक्ति में सीएम की किरदार नहीं होनी चाहिए लेकिन राज्य के पास यह अधिकार होना चाहिए कि वह गवर्नर को हटा सके. राज्य को इसके लिए एक प्रस्ताव पास कर राष्ट्रपति के पास भेजने का अधिकार मिलना चाहिए.

राज्यपाल की नियुक्ति में राज्य की किरदार सहित गवर्नर के कर्तव्य और उसकी कार्य शैली पर झारखंड विधानसभा के स्थापना दिवस के मौके पर चर्चा हुई. विधानसभा में केंद्र-राज्य संबंध पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था. राष्ट्रीय विधि यूनिवर्सिटी रायपुर के प्रो उदय शंकर ने गवर्नर की किरदार पर पक्ष रखा है. इस संबोधन में प्रोफेसर ने गवर्नर की नियुक्ति और किरदार के संबंध में कई अहम पक्ष रखे.

गर्वनर और राष्ट्रपति की शपथ एक जैसी
प्रोफेसर ने बताया कि गर्वनर और राष्ट्रपति का शपथ एक जैसा है. यह संविधान की रक्षा के लिए शपथ लेते है, राज्य के जन कल्याण की भी शपथ लेते हैं. गवर्नर के शपथ में राज्य का भलाई जुड़ा होता है. कई बार गवर्नर केंद्र के एजेंट के रूप में काम करते हैं, ऐसे में गवर्नर को लेकर राज्य के पास भी अधिकार होने चाहिए.

गर्वनर की नियुक्ति में राज्य की भूमिका
प्रोफेसर ने कहा,गर्वनर की नियुक्ति में राज्य की क्या किरदार होनी चाहिए, इस पर कई बार चर्चा हुई है. गवर्नर की नियुक्ति में मुख्यमंत्री की किरदार नहीं होनी चाहिए, ऐसा होने पर गवर्नर की निष्पक्षता प्रभावित होगी. गवर्नर को लेकर कोई गाइडलाइन नहीं है, विधेयक कब पास होंगे कितना समय लगेगा इसे लेकर कोई कानून नहीं है. यह देखा जाता है कि केंद्र में गवर्नमेंट बदलती है, तो गवर्नर बदल दिए जाते हैं. केंद्र भी अपनी सत्ता और सुविधाओं के मुताबिक गवर्नर की नियुक्ति करता है, इसे लेकर उच्चतम न्यायालय ने बोला है कि जब तक कोई आधार नहीं है, तब तक गवर्नर को नहीं हटाया जाए. समय से पहले हटाए जाने पर गर्वनर न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं.

कोर्ट क्या कहता है
गर्वनर की नियुक्ति को लेकर उच्चतम न्यायालय ने भी साफ टिप्पणी की है, प्रोफेसर ने बताया कि गर्वनर के संबंध में न्यायालय ने साफ किया है कि राज्य और केंद्र के संबंध को बेहतर ढंग से बनाकर चलना है ना कि केंद्र के प्रवक्ता के रूप में काम करना चाहिए. गर्वनर के पद के संबंध में जब विचार किया जा रहा था तो चुनाव को इसलिए हटा दिया गया क्योंकि सीएम भी चुन कर आयेंगे और गवर्नर भी चुन कर आयेंगे तो मतभेद होगा. आज क्या परिस्थितियां बदली हैं, क्या इस समय गवर्नर की नियुक्ति को बदलने की आवश्यकता है.
केंद्र की भूमिका
केंद्र गवर्नमेंट को यदि लगे कि गवर्नर संविधान की रक्षा नहीं कर रहा तो उसे हटा सकता है. कई बार चर्चा होती है कि गवर्नर की नियुक्ति में सीएम की किरदार होनी चाहिए. प्रो उदय शंकर ने कहा, मेरा अपना मानना है कि इसमें सीएम की किरदार नहीं होनी चाहिए. गर्वनर की नियुक्ति में यदि गवर्नर की किरदार होगी तो यह प्रभावित होगी.
राज्य भलाई में काम ना करने वाले गवर्नर को हटा सके राज्य

राज्य के भलाई में काम ना करने वाले गवर्नर को हटाने में किरदार जरूर होनी चाहिए. राज्य यदि ये कहता है कि गवर्नर का योगदान नहीं है तो इस संबंध में राज्य को अधिकार दिया जाना चाहिए. गर्वनर को यह बताना चाहिए कि आप किसी विधेयक पर कितना समय लेंगे. यदि इसे आगे भेज रहे हैं तो कब तक भेजेंगे ? कितना समय लगेगा. आज तकनीक बहुत आगे बढ़ गयी है इन चीजों को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए. गवर्नर की किरदार बहुत अहम है जो राज्य और केंद्र के संबंध को बेहतर करता है. अभी भी गवर्नर की किरदार बहुत अहम है. गर्वनर संपर्क साधते हैं. केंद्र की जिम्मेदारी है कि देश संविधान के आधार पर चले. गर्वनर एक बहुत अहम कड़ी है.