UN मानवाधिकार परिषद में भारत ने पाक और OIC को लगाई लताड़, कहा...

UN मानवाधिकार परिषद में भारत ने पाक और OIC को लगाई लताड़, कहा...

भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (यूएनएचआरसी) के 48 वें सत्र में कश्मीर का मुद्दा उठाने पर पाकिस्तान और इस्लामिक देशों के संगठन ओआइसी को खूब खरी खरी सुनाई है। भारत ने पाकिस्तान को दुनिया में अल्पसंख्यकों को प्रताडि़त करने वाले सबसे बदनाम देश के तौर पर चिह्नित किया है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान, आतंकवाद को एक सरकारी नीति के तौर पर मदद पहुंचाता है।

यूएनएचआरसी में कश्मीर मुद्दा उठाने पर ओआइसी को भी लताड़ा

वहीं इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) से भी दो टूक कहा है कि वो कश्मीर के मुद्दे पर नाक घुसाने की कोशिश नहीं करे, वह भारत का अभिन्न अंग है। ओआइसी को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। ओआइसी को भारत ने यह सुझाव दिया है कि इस संगठन को किसी एक देश के एजेंडे के सामने असहाय नहीं होना चाहिए। यह ओआइसी के सदस्यों को तय करना है कि क्या पाकिस्तान को ऐसा करने की अनुमति देना उनके हित में है। भारत पाकिस्तान को यह भी याद दिलाया है कि वह यह नहीं भूले कि दुनिया उसे आतंकवाद का सबसे बड़ा गढ़ मानती है।


पाक जैसे नाकाम देश से लोकतंत्र की हमें सीख लेने की जरूरत नहीं

यूएनएचआरसी के 48वें सत्र की बैठक को संबोधित करते हुए भारतीय प्रतिनिधि पवन बेढे ने कहा है कि पाकिस्तान को दुनिया में खुलेआम आतंकवाद को समर्थन देने वाला, वित्तीय पोषण करने वाला और हथियार उपलब्ध कराने वाला देश माना जाता है। पाकिस्तान खुद आतंकवाद का केंद्र है और मानवाधिकारों का सबसे बड़ा शोषक है। ऐसे में भारत को पाकिस्तान जैसे एक असफल देश से लोकतंत्र की सीख लेने की जरूरत नहीं है। पाकिस्तान की यह पुरानी आदत है कि वह इस मंच का इस्तेमाल हमेशा भारत के खिलाफ अपने प्रोपेगंडा में करता है। इसके पीछे उसका मकसद अपनी सरकार के गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन की तरफ से दुनिया का ध्यान भटकाना है।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय के हालात बदतर

भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान में सिख, हिंदुओं, ईसाइयों और अहमदिया मुसलमानों की स्थिति की तरफ भी दुनिया का ध्यान आकर्षित करवाया। बेढे ने कहा कि, पाकिस्तान में हर साल अल्पसंख्यक समुदाय की हजारों नाबालिग लड़कियों को अगवा कर, मतांतरण कर उनकी शादी करवाई जा रही है। अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक प्रतिष्ठानों पर भी लगातार हमले किए जा रहे हैं।


अफगानिस्तान में लौटेगा मौत की सजा का दौर, तालिबानी नेता मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी का बयान

अफगानिस्तान में लौटेगा मौत की सजा का दौर, तालिबानी नेता मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी का बयान

अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद अब कट्टर इस्लामी कानूनों को लागू किया जाएगा। तालिबान के संस्थापकों में से एक और पूर्व कार्यकाल में इस्लामी कानूनों को कठोर व्याख्या के साथ लागू करने करने वाले एक प्रमुख प्रवर्तक ने कहा कि अफगानिस्तान में फिर से फांसी देने और हाथ काटने जैसी सजाएं देने का दौर लौटेगा। द एसोसिएटेड प्रेस के साथ एक साक्षात्कार में, मुल्ला नूरुद्दीन तुराबी ने अतीत में तालिबान के फांसी देने के तरीके पर दुनिया के ऐतराज को खारिज कर दिया है।

उल्लेखनीय है तालिबान के पिछले कार्यकाल में अक्सर चोरी करने वालों के हाथ काटने जैसी सजाएं स्टेडियम में भीड़ के सामने दी जाती थीं। तुराबी ने दुनिया को अफगानिस्तान के नए शासकों के मामले में हस्तक्षेप करने के खिलाफ चेतावनी दी।तुराबी ने कहा, स्टेडियम में दंड के लिए सभी ने हमारी आलोचना की। लेकिन हमने कभी उनके कानूनों और सजा देने के तरीके के बारे में कुछ नहीं कहा। हम नहीं चाहते कि कोई हमें बताए कि हमारे कानून क्या होने चाहिए। हम इस्लाम का पालन करेंगे और कुरान के मुताबिक अपने कानून बनाएंगे।


अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे से अमेरिका को सताने लगा हमले का डर

फेडरल ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआइ)के निदेशक क्रिस्टोफर रे ने चेतावनी दी कि अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा अमेरिका स्थित चरमपंथियों को अमेरिकी जमीन पर हमले की साजिश रचने के लिए प्रेरित कर सकता है। रे ने मंगलवार को सीनेट होमलैंड सिक्योरिटी एंड गवर्नमेंटल अफेयर कमेटी के समक्ष यह आशंका जाहिर की।दि हिल की रिपोर्ट के मुताबिक, रे ने कहा कि 2020 के मध्य से घरेलू आतंकवाद के मामले आसमान छू रहे हैं। मामले एक हजार से 2700 तक पहुंच गए हैं, जिनकी जांच अभी जारी है। चरमपंथी संगठनों ने कभी भी अमेरिकी जमीन पर हमलों की साजिश रचना बंद नहीं किया है।


इतना ही नहीं, नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के निदेशक क्रिस्टाइन अबीजेद ने भी कमेटी के समक्ष कहा कि दो दशक पूर्व की तुलना में अमेरिका में आतंकी हमलों की आशंका अधिक बढ़ गई है। अबीजेद ने यह भी कहा कि अमेरिकी अधिकारियों को इस बात पर ध्यान देना होगा कि अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट किस प्रकार अपनी ताकत में इजाफा कर सकते हैं और अमेरिका में हमलों की साजिश रच सकते हैं।