कोलंबो: नागरिक की मॉब लिंचिंग पर श्रीलंकाई सरकार की मांग, मृतक के परिवार को मुआवजा दे पाकिस्तान

कोलंबो: नागरिक की मॉब लिंचिंग पर श्रीलंकाई सरकार की मांग, मृतक के परिवार को मुआवजा दे पाकिस्तान
पाकिस्तान के सियालकोट में भीड़ द्वारा श्रीलंकाई नागरिक की नृशंस हत्या का विरोध बढ़ता ही जा रहा है। श्रीलंका में जहां लोग सड़क पर उतरकर न्याय की मांग कर रहे हैं वहीं श्रीलंकाई सरकार ने भी अब पाकिस्तान से मुआवजे की मांग कर दी है। उद्योग मंत्री विमल वीरावांसा ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन करते हुए मृतक के परिवार के लिए इमरान खान सरकार से मुआवजे की मांग की। दरअसल, बीते शुक्रवार को लाहौर से 100 किलोमीटर दूर सियालकोट में एक श्रीलंकाई नागरिक प्रियंथा दियावदाना की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। इसके बाद उसके शव को जला दिया गया था। मृतक पर ईशनिंदा का आरोप लगाया था। खबरों के मुताबिक, व्यक्ति एक कपड़ा फैक्ट्री में जनरल मैनेजर के रूप में कार्य करता था। भीड़ ने फैक्ट्री पर हमला बोला और श्रीलंका के नागरिक को बाहर खींच कर मार डाला। ईशनिंदा का आरोप, 118 लोग गिरफ्तार
पाक अधिकारियों का कहना था कि व्यक्ति ने कथित तौर पर कट्टरपंथी संगठन टीएलपी के एक पोस्टर को फाड़ दिया था। इस पोस्टर पर कुरान की आयतें लिखी हुईं थीं, मामला सामने आते ही टीएलपी समर्थकों ने व्यक्ति को घेर लिया और पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस मामले में 800 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं 118 लोग गिरफ्तार किए हैं, जिसमें 13 मुख्य आरोपी हैं। 
राजपक्षे ने की थी निंदा 
घटना के बाद श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने घटना की निंदा की थी। उन्होंने कहा था कि हम उम्मीद करते हैं कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री दोषियों को सजा दिलाने के अपने वादे पर खड़ा उतरेंगे और पाकिस्तान में मौजूद श्रीलंकाई नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। घटना के बाद इमरान खान का भी ट्वीट सामने आया था, उन्होंने इस घटना को पाकिस्तान के लिए शर्म का दिन बताया था। 

मिस्र की इतनी साल पुरानी ममी के पेट में 28 महीने का भ्रूण, जानिए अब तक कैसे रहा सुरक्षित?

मिस्र की इतनी साल पुरानी ममी के पेट में 28 महीने का भ्रूण, जानिए अब तक कैसे रहा सुरक्षित?

 मिस्र में एक के पेट से मिले 28 महीने के भ्रूण के रहस्य को सुलझा लिया गया है। यह भ्रूण पिछले 2000 साल से ममी के पेट में सुरक्षित था। 2021 में खोज के बाद से ही यह वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बना हुआ था। अब बताया गया है कि महिला के शरीर के विघटित होने के बाद इस भ्रूण को अम्लीकरण के जरिए सुरक्षित रखा गया था। यह प्रक्रिया ठीक ऐसी है, जैसे किसी अचार को सुरक्षित रखा जाता है। वारसॉ विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की टीम ने पिछले साल अप्रैल में सीटी और एक्स-रे स्कैन के जरिए अजन्मे बच्चे के अवशेषों की उपस्थिति का

खुलासा किया था।माना जाता है कि यह दुनिया के सबसे पुराना भ्रूण है। इस भ्रूण को मिस्र से आज से करीब 200 साल पहले पोलैंड लेकर जाया गया था। दिसंबर 1826 में इस ममी को वारसॉ विश्वविद्यालय को दान में दिया गया था। तब माना जा रहा था कि यह ममी एक महिला की है लेकिन 1920 के दशक में इस पर मिस्र के पुजारी का नाम लिखा पाया गया। विश्वविद्यालय की टीम 2015 से इस प्राचीन मिस्र की ममी पर काम कर रही है। पिछले साल स्कैन में जब ममी के पेट के अंदर एक छोटा सा पैर दिखा, तब उन्हें समझ आया कि उनके हाथ क्या लगा है।(Photo-Warsaw Museum Project)

प्रसव के दौरान नहीं हुई थी महिला की मौत

शोधकर्ताओं ने भ्रूण की स्थिति और बर्थ कैनाल का अध्ययन कर बताया कि इस रहस्यमय महिला की प्रसव के दौरान मौत नहीं हुई थी। मौत के समय इस महिला के पेट में मौजूद भ्रूण 26 से 30 हफ्ते का था। टीम ने आशा जताई है कि यह बहुत संभव है कि अन्य गर्भवती ममी भी दुनिया के अलग-अलग सग्रहालयों में रखी हों। ऐसे में हमें उन सबकी जांच करने की आवश्यक्ता है। इस रहस्यमय महिला और उसके अजन्मे बच्चे का अध्ययन पोलैंड के वारसॉ विश्वविद्यालय के पुरातत्वविद् और पैलियोपैथोलॉजिस्ट मार्जेना ओलारेक-स्ज़िल्के और उनके सहयोगियों ने किया है।

एक्सपर्ट के लिए बनी हुई थी बड़ी पहेली

एक्सपर्ट्स के सामने एक बड़ी पहेली यह थी कि आखिर महिला के अंदर भ्रूण कैसे रह गया था। ममी बनाने के लिए मृतक के अंगों को निकाल दिया जाता था तो भ्रूण को क्यों नहीं अलग किया गया। पहले माना जा रहा था कि इसके पीछे कोई धार्मिक कारण हो सकता है। जांच टीम ने संभावना जताई ती कि हो सकता है उन्हें लगता हो कि अजन्मे बच्चे की आत्मा नहीं होती है और वह अगले दुनिया में सुरक्षित रहेगा या हो सकता है कि उसे निकालने में महिला के शरीर को नुकसान का खतरा रहा हो।