बोकारो में महिला का कटा सिर मिला, धड़ तलाश करने में जुटी पुलिस

बोकारो में महिला का कटा सिर मिला, धड़ तलाश करने में जुटी पुलिस

बोकारो। झारखंड में बोकारो के सेक्टर-12 थाना क्षेत्र के बड़याडीह गांव के पास बुधवार को थैले में युवती का कटा सिर बरामद हुआ है। सिर लगभग 18 वर्षीया युवती का जान पड़ता है। पुलिसयुवती का धड़ तलाश करने में जुटी हुई है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि अभी भी युवती के धड़ का बरामद नहीं किया जा सका है। उन्होंने बताया कि पुलिस युवती का धड़ बरामद करने के लिए जंगलों में खोजबीन कर रही है।

बोकारो सेक्टर-12 थाना के प्रभारी जयगोविंद गुप्ता ने आज बताया कि सातनपुर के ग्रामीणों ने सूचना दी कि एक गर्दन से अलग सिर फेंका हुआ है जिसके बाद पुलिस ने वहां पहुंचकर सिर को अपने कब्जे में किया। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस युवती की शिनाख्त का प्रयास कर रही है। पुलिस इसे घरेलू हिंसा एवं किसी के द्वारा हत्या कर फेंके जाने सहित कई बिन्दुओ से देख रही है। थाना प्रभारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया युवती 18 से 20 वर्ष की प्रतीत होती है। पुलिस ने बताया कि घटनास्थल के निरीक्षण से ऐसा प्रतीत होता है कि युवती की हत्या कहीं और करके शव यहां फेंका गया है।


आखिर कोलकाता पुलिस क्यों पहनती है सफेद यूनिफॉर्म क्या जानते हैं आप?

आखिर कोलकाता पुलिस क्यों पहनती है सफेद यूनिफॉर्म क्या जानते हैं आप?

देशभर में पुलिस खाकी वर्दी पहनती हैं और पश्चिम बंगाल में भी पुलिस द्वारा खाकी वर्दी ही पहनी जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पश्चिम बंगाल के कोलकाता में पुलिस द्वारा खाकी नहीं बल्कि सफेद वर्दी पहनी जाती हैं। इसके पीछे का कारण बेहद हैरान करने वाला हैं। आज इस कड़ी में हम आपको इसी से जुड़ी जानकारी देने जा रहे हैं।

खाकी वर्दी और सफेद वर्दी अंग्रेजों के जमाने से ही चली आ रही है। ब्रिटिश राज में जब पुलिस का गठन हुआ था, तब उनकी पुलिस सफेद रंग की वर्दी पहनती थी, लेकिन ज्यादा देर तक ड्यूटी करने के दौरान वो जल्द ही गंदी भी हो जाती थी। इस कारण पुलिसकर्मियों ने वर्दी को जल्दी गंदा होने से बचाने के लिए उसे अलग-अलग रंगों से रंगना शुरू कर दिया।

सफेद रंग की वर्दी पर अलग-अलग रंग लगाने की वजह से जवानों की यूनिफॉर्म अलग-अलग रंगों की दिखने लगती थी। ऐसे में यह पहचान पाना मुश्किल हो जाता था कि वो शख्स पुलिस का ही जवान है। इसी समस्या से निजात पाने के लिए अंग्रेज अफसरों ने खाकी रंग की वर्दी बनवाई, ताकि वो जल्दी गंदा न हो।

साल 1847 में अंग्रेज अफसर सर हैरी लम्सडेन ने पहली बार आधिकारिक तौर पर खाकी रंग की वर्दी को अपनाया था। तब से यही खाकी भारतीय पुलिस की वर्दी बन गई, जो अब तक चली आ रही है। आपको जानकर हैरानी होगी कि पश्चिम बंगाल में पुलिस खाकी वर्दी ही पहनती है, लेकिन वहीं की कोलकाता पुलिस सफेद। उस समय कोलकाता पुलिस को भी खाकी रंग की वर्दी पहनने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने उसे खारिज कर दिया था। इसके पीछे उन्होंने कारण दिया कि कोलकाता तटीय इलाका है और यहां काफी गर्मी और नमी रहती है। ऐसे में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सफेद रंग ज्यादा बेहतर है, क्योंकि इस रंग से सूरज की रोशनी परावर्तित हो जाती है और ज्यादा गर्मी नहीं लगती है।