पुलिस के हत्थे चढ़ा 'सीरियल मोलेस्टर', मासूम बच्चियों को देख खो बैठता था आपा और फिर

पुलिस के हत्थे चढ़ा 'सीरियल मोलेस्टर', मासूम बच्चियों को देख खो बैठता था आपा और फिर

नयी दिल्ली: देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पुलिस ने एक सीरियल मोलेस्टर को अरेस्ट कर लिया है जो छोटी बच्चियों को शिकार बनाता था. इस सीरियल मोलेस्टर पर 8 केस दायर हैं. इस सीरियल मोलेस्टर के कारण क्षेत्र में दहशत थी.

आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि दिल्ली की डिफेंस कॉलोनी पुलिस स्टेशन की टीम ने सीरियल मोलेस्टर को अरेस्ट किया है. पुलिस 5वीं कक्षा में पढ़ने वाली मासूम के साथ बलात्कार के आरोप में सीरियल मोलेस्टर को अरेस्ट किया है. क्रिमिनल की पहचान 27 साल के यश के रूप में हुई है जो दिल्ली के पहाड़गंज का रहवासी है. क्रिमिनल यश एक इलेक्ट्रिशियन है.

वही क्रिमिनल से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि उसके विरूद्ध दिल्ली के भिन्न-भिन्न थानों में पॉक्सो एक्ट के कई केस दर्ज हैं. बता दे कि दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी थाने में 23 नवंबर को 10 वर्षीय बच्ची के परिवार वालों ने केस दर्ज करवाया था. कम्पलेन के मुताबिक, बच्ची घर के पास खेल रही थी तभी क्रिमिनल बच्ची को जबरन अपने साथ ले गया तथा घिनौनी वारदात को अंजाम दिया. जिसके पश्चात् पुलिस ने क्रिमिनल के विरूद्ध आईपीसी (IPC) की धारा 363, 354, 376, 506 तथा POCSO एक्ट के अनुसार केस दर्ज किया था. कम्पलेन दर्ज करने के पश्चात् पुलिस ने क्रिमिनल को अरैस्ट कर लिया.


आखिर कोलकाता पुलिस क्यों पहनती है सफेद यूनिफॉर्म क्या जानते हैं आप?

आखिर कोलकाता पुलिस क्यों पहनती है सफेद यूनिफॉर्म क्या जानते हैं आप?

देशभर में पुलिस खाकी वर्दी पहनती हैं और पश्चिम बंगाल में भी पुलिस द्वारा खाकी वर्दी ही पहनी जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पश्चिम बंगाल के कोलकाता में पुलिस द्वारा खाकी नहीं बल्कि सफेद वर्दी पहनी जाती हैं। इसके पीछे का कारण बेहद हैरान करने वाला हैं। आज इस कड़ी में हम आपको इसी से जुड़ी जानकारी देने जा रहे हैं।

खाकी वर्दी और सफेद वर्दी अंग्रेजों के जमाने से ही चली आ रही है। ब्रिटिश राज में जब पुलिस का गठन हुआ था, तब उनकी पुलिस सफेद रंग की वर्दी पहनती थी, लेकिन ज्यादा देर तक ड्यूटी करने के दौरान वो जल्द ही गंदी भी हो जाती थी। इस कारण पुलिसकर्मियों ने वर्दी को जल्दी गंदा होने से बचाने के लिए उसे अलग-अलग रंगों से रंगना शुरू कर दिया।

सफेद रंग की वर्दी पर अलग-अलग रंग लगाने की वजह से जवानों की यूनिफॉर्म अलग-अलग रंगों की दिखने लगती थी। ऐसे में यह पहचान पाना मुश्किल हो जाता था कि वो शख्स पुलिस का ही जवान है। इसी समस्या से निजात पाने के लिए अंग्रेज अफसरों ने खाकी रंग की वर्दी बनवाई, ताकि वो जल्दी गंदा न हो।

साल 1847 में अंग्रेज अफसर सर हैरी लम्सडेन ने पहली बार आधिकारिक तौर पर खाकी रंग की वर्दी को अपनाया था। तब से यही खाकी भारतीय पुलिस की वर्दी बन गई, जो अब तक चली आ रही है। आपको जानकर हैरानी होगी कि पश्चिम बंगाल में पुलिस खाकी वर्दी ही पहनती है, लेकिन वहीं की कोलकाता पुलिस सफेद। उस समय कोलकाता पुलिस को भी खाकी रंग की वर्दी पहनने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने उसे खारिज कर दिया था। इसके पीछे उन्होंने कारण दिया कि कोलकाता तटीय इलाका है और यहां काफी गर्मी और नमी रहती है। ऐसे में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सफेद रंग ज्यादा बेहतर है, क्योंकि इस रंग से सूरज की रोशनी परावर्तित हो जाती है और ज्यादा गर्मी नहीं लगती है।