15 लाख में इंस्पेक्टर बनाने का ठेका लेता था गैंग, STF ने 3 को दबोचा

15 लाख में इंस्पेक्टर बनाने का ठेका लेता था गैंग, STF ने 3 को दबोचा

नयी दिल्ली: 15 लाख रुपये में दरोगा बनाने का ठेका लेने वाले एक गैंग के तीन सदस्यों को मंगलवार को गोरखपुर STF ने तारामंडल इलाके से हिरासत में लिया है. केंद्र संचालकों से मिलीभगत कर यह रैकेट बड़े स्तर पर अभ्यर्थियों को दरोगा की इम्तिहान पास कराने वाला था. STF को जानकारी मिली थी कि उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस और अन्य पदों की डायरेक्ट भर्ती की औनलाइन परीक्षा-2021 में गोरखपुर में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा होने वाला है.

इसके बाद टीम सक्रिय हुई, तो पता चला कि अश्वनी दूबे केन्द्र संचालक माडेंटो वेन्चर्स प्रा लि , अनुभव सिंह क्लस्टर हेड NSEIT गोरखपुर, आशीष शुक्ला केन्द्र संचालक कैवेलियर एनीमेशन सेंटर NSEIT गोरखपुर, दीपक, दिवाकर उर्फ रिन्टू एवं सेनापति केंद्र संचालक सिद्धि विनायक औनलाइन सेंटर गोरखपुर, नित्यानन्द गौड़, संतोष यादव, रजनीश दीक्षित, केंद्र संचालक ओम औनलाइन सेंटर मिलकर नकल कराने की षड्यंत्र रच रहे हैं.

सूचना में बताया गया था कि ये लोग देवरिया बाईपास मोड़ पर कुछ अभ्यार्थियों से इम्तिहान में उत्तीर्ण कराने के नाम पर रुपए लेने वाले हैं. सूचना पर इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश सिंह के नेतृत्व में टीम ने घेराबंदी कर तीन आरोपियों को अरैस्ट कर लिया.


आखिर कोलकाता पुलिस क्यों पहनती है सफेद यूनिफॉर्म क्या जानते हैं आप?

आखिर कोलकाता पुलिस क्यों पहनती है सफेद यूनिफॉर्म क्या जानते हैं आप?

देशभर में पुलिस खाकी वर्दी पहनती हैं और पश्चिम बंगाल में भी पुलिस द्वारा खाकी वर्दी ही पहनी जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पश्चिम बंगाल के कोलकाता में पुलिस द्वारा खाकी नहीं बल्कि सफेद वर्दी पहनी जाती हैं। इसके पीछे का कारण बेहद हैरान करने वाला हैं। आज इस कड़ी में हम आपको इसी से जुड़ी जानकारी देने जा रहे हैं।

खाकी वर्दी और सफेद वर्दी अंग्रेजों के जमाने से ही चली आ रही है। ब्रिटिश राज में जब पुलिस का गठन हुआ था, तब उनकी पुलिस सफेद रंग की वर्दी पहनती थी, लेकिन ज्यादा देर तक ड्यूटी करने के दौरान वो जल्द ही गंदी भी हो जाती थी। इस कारण पुलिसकर्मियों ने वर्दी को जल्दी गंदा होने से बचाने के लिए उसे अलग-अलग रंगों से रंगना शुरू कर दिया।

सफेद रंग की वर्दी पर अलग-अलग रंग लगाने की वजह से जवानों की यूनिफॉर्म अलग-अलग रंगों की दिखने लगती थी। ऐसे में यह पहचान पाना मुश्किल हो जाता था कि वो शख्स पुलिस का ही जवान है। इसी समस्या से निजात पाने के लिए अंग्रेज अफसरों ने खाकी रंग की वर्दी बनवाई, ताकि वो जल्दी गंदा न हो।

साल 1847 में अंग्रेज अफसर सर हैरी लम्सडेन ने पहली बार आधिकारिक तौर पर खाकी रंग की वर्दी को अपनाया था। तब से यही खाकी भारतीय पुलिस की वर्दी बन गई, जो अब तक चली आ रही है। आपको जानकर हैरानी होगी कि पश्चिम बंगाल में पुलिस खाकी वर्दी ही पहनती है, लेकिन वहीं की कोलकाता पुलिस सफेद। उस समय कोलकाता पुलिस को भी खाकी रंग की वर्दी पहनने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने उसे खारिज कर दिया था। इसके पीछे उन्होंने कारण दिया कि कोलकाता तटीय इलाका है और यहां काफी गर्मी और नमी रहती है। ऐसे में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सफेद रंग ज्यादा बेहतर है, क्योंकि इस रंग से सूरज की रोशनी परावर्तित हो जाती है और ज्यादा गर्मी नहीं लगती है।