मथुरा: चलती कार में चीखती रही लड़की, लड़के करते रहे सामूहिक दुष्कर्म

मथुरा: चलती कार में चीखती रही लड़की, लड़के करते रहे सामूहिक दुष्कर्म

मथुरा: आजकल क्राइम के बढ़ते मामलों के बीच एक समाचार मथुरा से आई है. जहाँ एक महिला के साथ दिल दहलाने वाली वारदात हुई है. इस मुद्दे में मिली जानकारी के अनुसार आगरा से एसआई की इम्तिहान देकर लौट रही महिला के साथ युवकों ने चलती कार में गैंग रेप को अंजाम दिया है. इस मुद्दे में मिली जानकारी के अनुसार वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी महिला को घायल हालत में थाना कोसीकलां इलाके के नेशनल हाईवे पर फेंककर फरार हो गए. बताया जा रहा है यह केस बीते मंगलवार का है.

जी दरअसल, बीते मंगलवार प्रातः काल कोसीकलां की रहने वाली एक महिला आगरा में दारोगा भर्ती इम्तिहान देने गई थी. उसकी इम्तिहान शाम 4 बजे से 6 बजे तक हुई. वहीं इसके बाद हरियाणा के पलवल जिले का रहने वाला तेजवीर उसे अपने साथ कार में बैठाकर ले गया. उस दौरान कार ड्राइवर चला रहा था और तेजवीर पीछे बैठा. कुछ ही दूर चलने पर तेजवीर का साथी कार में बैठ गया. उसके बाद सभी ने मिलकर चलती कार में ही महिला के साथ गैंग रेप किया और रास्ते में कोसी बाईपास पर फेंककर फरार हो गए.

कहा जा रहा है लुटेरे व्यक्ति महिला को घायल हालत में कोसी बाईपास पर फेंककर वहां से झटपट निकल गए. इस मुद्दे में महिला किसी तरह थाने पहुंची और उसने 2 लोगों के विरूद्ध केस दर्ज कराया है. वहीं खबरों के मुताबिक अब पुलिस ने पीड़िता का डॉक्टरी परीक्षण कर आरोपियों की तलाश प्रारम्भ कर दी है. इस मुद्दे के सामने आने के बाद से महिला के परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश है.


आखिर कोलकाता पुलिस क्यों पहनती है सफेद यूनिफॉर्म क्या जानते हैं आप?

आखिर कोलकाता पुलिस क्यों पहनती है सफेद यूनिफॉर्म क्या जानते हैं आप?

देशभर में पुलिस खाकी वर्दी पहनती हैं और पश्चिम बंगाल में भी पुलिस द्वारा खाकी वर्दी ही पहनी जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पश्चिम बंगाल के कोलकाता में पुलिस द्वारा खाकी नहीं बल्कि सफेद वर्दी पहनी जाती हैं। इसके पीछे का कारण बेहद हैरान करने वाला हैं। आज इस कड़ी में हम आपको इसी से जुड़ी जानकारी देने जा रहे हैं।

खाकी वर्दी और सफेद वर्दी अंग्रेजों के जमाने से ही चली आ रही है। ब्रिटिश राज में जब पुलिस का गठन हुआ था, तब उनकी पुलिस सफेद रंग की वर्दी पहनती थी, लेकिन ज्यादा देर तक ड्यूटी करने के दौरान वो जल्द ही गंदी भी हो जाती थी। इस कारण पुलिसकर्मियों ने वर्दी को जल्दी गंदा होने से बचाने के लिए उसे अलग-अलग रंगों से रंगना शुरू कर दिया।

सफेद रंग की वर्दी पर अलग-अलग रंग लगाने की वजह से जवानों की यूनिफॉर्म अलग-अलग रंगों की दिखने लगती थी। ऐसे में यह पहचान पाना मुश्किल हो जाता था कि वो शख्स पुलिस का ही जवान है। इसी समस्या से निजात पाने के लिए अंग्रेज अफसरों ने खाकी रंग की वर्दी बनवाई, ताकि वो जल्दी गंदा न हो।

साल 1847 में अंग्रेज अफसर सर हैरी लम्सडेन ने पहली बार आधिकारिक तौर पर खाकी रंग की वर्दी को अपनाया था। तब से यही खाकी भारतीय पुलिस की वर्दी बन गई, जो अब तक चली आ रही है। आपको जानकर हैरानी होगी कि पश्चिम बंगाल में पुलिस खाकी वर्दी ही पहनती है, लेकिन वहीं की कोलकाता पुलिस सफेद। उस समय कोलकाता पुलिस को भी खाकी रंग की वर्दी पहनने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने उसे खारिज कर दिया था। इसके पीछे उन्होंने कारण दिया कि कोलकाता तटीय इलाका है और यहां काफी गर्मी और नमी रहती है। ऐसे में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सफेद रंग ज्यादा बेहतर है, क्योंकि इस रंग से सूरज की रोशनी परावर्तित हो जाती है और ज्यादा गर्मी नहीं लगती है।