कार्ड क्‍लोन‍िंग गैंग का सरगना चढ़ा क्राइम ब्रांच के हत्‍थे , दर्ज थे 9 मामले

कार्ड क्‍लोन‍िंग गैंग का सरगना  चढ़ा क्राइम ब्रांच के हत्‍थे , दर्ज थे 9 मामले

नई द‍िल्‍ली द‍िल्‍ली पुल‍िस (Delhi Police) की अपराध शाखा (Crime Branch) की NR-II यूनिट ने ऐसे रैकेट का पर्दाफाश क‍िया है जोक‍ि लोगों के डेबिट कार्ड की अदला-बदली और क्लोनिंग कर उनसे ठगी कर रहा था ग‍िरोह के सदस्‍य कमजोर लोगों जैसे वृद्ध, कम साक्षर या अनपढ़ लोगों को टारगेट बनाते थे जोक‍ि यह नहीं जानते कि एटीएम मशीनों के कियोस्क को कैसे संचालित करना होता है

इस ग‍िरोह के टारगेट पर वो सभी एटीएम (ATM Kiosk) होते थे ज‍िन पर गार्ड की तैनाती नहीं होती थी इस पूरे मुद्दे में अपराध शाखा ने कार्ड क्लोनिंग गैंग (Card Cloning Gang) के मुखिया हर‍ियाणा के ह‍िसार ज‍िला न‍िवासी कुलदीप को धरदबोचा है ज‍िस पर हरियाणा के अतिरिक्त पंजाब, हिमाचल प्रदेश समेत अन्‍य राज्यों में धोखाधड़ी, चोरी, जालसाजी आदि के 9 मामलों में शाम‍िल रहा है

द‍िल्‍ली पुल‍िस की अपराध ब्रांच-3 के डीसीपी व‍िच‍ित्र वीर के मुताब‍िक अपराध शाखा की NR-II यूनिट को कार्ड क्लोनिंग गैंग के बारे में इनपुट मिले थे जो दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी काम कर रहा था इसमें शामिल लोगों के बारे में अधिक जानकारी जुटाने के ल‍िए इन मामलों से संबंधित सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया गया और यह पाया गया कि रैकेट ने मूल रूप से कमजोर, वृद्ध, कम साक्षर या अनपढ़ लोगों को अपना टारगेट बनाया है

यह सभी एटीएम मशीनों का प्रयोग करने में सक्षम नहीं होते हैं ब‍िना गार्ड के चलने वाले एटीएम क्‍योस्‍क पर सिंडिकेट के सभी सदस्य एक-एक करके पहुंच जाते हैं और उसके चारों ओर भीड़ लगा लेते हैं ज‍िससे क‍ि एटीएम प्रयोग करने वाला भ्रमित हो जाए इसके बाद वह या तो उनका डेबिट/क्रेडिट कार्ड बदल देते थे या स्किमर्स (मशीन की क्लोनिंग के लिए उपकरण) के माध्यम से इसे स्वाइप कर देते थे इसके बाद वे एक-एक कर मौके से निकल जाते थे और फिर पैसे निकाल कर आपस में बांट लेते थे

डीसीपी ने मुद्दे की व‍िस्‍तृत जानकारी देते हुए बताया क‍ि वर्तमान मुद्दे में एक वृद्ध आदमी सिंडिकेट का निशाना बना, जबकि उसके द्वारा एटीएम कियोस्क में लेन-देन किया जा रहा था सिंडिकेट के सदस्यों ने वृद्ध को विचलित किया और बाद में उनके खाते से 2.53 लाख रुपये निकाले गए इस घटना को लेकर जनकपुरी थाने में एफआईआर संख्या 558/18 यू/एस 420/120बी/34 आईपीसी के अनुसार मामला दर्ज कराया गया ज‍िसके बाद मुद्दे को जांच के लिए अपराध शाखा को ट्रांसफर कर दिया गया था

इस संबंध में एसीपी नरेंद्र सिंह के न‍िरीक्षण में इंस्‍पेक्‍टर दीपक पांडेय के संचालन में एसआई सतेंदर, हैड कांस्‍टेबल अचोक, प्रदीप एनआर-द्वितीय / क्राइम शाखा की एक टीम गठ‍ित की गई और अपराध‍ियों की धरपकड़ करने की कार्रवाई प्रारम्भ की गई

टीम ने घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज को खंगाला और सीसीटीवी फुटेज में व्यक्तियों की पहचान करने के लिए क्षेत्रीय स्रोतों को भी एक्टिव किया गया इसमें व्यक्तियों की पहचान करने के बाद उनके वर्तमान ठिकाने के बारे में खुफिया जानकारी न‍िकाली गई सूचना के आधार पर टीम ने हिसार, हरियाणा और सुल्तानपुरी, दिल्ली में छापेमारी की और सिंडिकेट के दो सदस्यों को अरैस्ट करने में सफल रही ग‍िरफ्तार सदस्‍यों में धर्मबीर @ धापी निवासी / जिला हिसार, हरियाणा उम्र – 45 साल और सुनील कुमार निवासी सुल्तानपुरी, दिल्ली आयु-40 साल शाम‍िल हैं

गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ में पता चला कि कुलदीप रैकेट का मुखिया है टीम ने आवासीय पते और अन्य संभावित ठिकानों पर छापेमारी की लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली दिल्ली और पड़ोसी राज्यों में ऐसे अपराधियों की गिरफ्तारी के रिकॉर्ड भी नियमित रूप से चेक किए जा रहे थे कुलदीप के बारे में इनपुट आईसीजेएस पोर्टल (इंटर-ऑपरेबल अपराधी जस्टिस सिस्टम) के माध्यम से प्राप्त हुआ था, जिसमें यह पाया गया कि कुलदीप को एफआईआर संख्या 254/22, पीएस सदर कुल्लू, एचपी और एफआईआर नंबर 216/22, पीएस बल्ह, जिला मंडी, हिमाचल प्रदेश में एक ही तरह के मुद्दे में अरैस्ट किया गया है

वर्तमान मुद्दे में उसको पुलि‍स ने 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भी लिया आरोपी आदमी के पास से पुलिस ने क्रेडिट और डेबिट कार्ड की क्लोनिंग के लिए उपयोग किए गए एक स्कीमर (डिवाइस) के साथ कुल 12 क्रेडिट/डेबिट कार्ड बरामद किए गए हैं