उत्तराखण्ड

इंसान ही नहीं जानवरों के लिए भी फायदेमंद है ये पेड़

 उत्तराखंड राज्य जड़ी-बूटियों का हब है. यहां कई ऐसे बेशकीमती औषधीय पेड़-पौधे पाये जाते हैं, जो अपने आप में कई रोगों को ठीक करने की क्षमता रखते हैं. ऐसा ही एक है बेड़ू का पेड़. इस पेड़ पर बेड़ू नाम का पहाड़ी फल लगता है, जिसका प्रयोग यहां के स्थानीय लोग खाने के साथ औषधि के रूप में भी करते हैं, लेकिन क्या आपको मालूम है कि बेड़ू के फल के साथ इसका पूरा पेड़ ही काम का है. यह इंसानों से लेकर जानवरों तक के लिए फायदेमंद है.

दरअसल बेड़ू उत्तराखंड का एक पहाड़ी फल है. हिमाचल प्रदेश में भी यह फल पाया जाता है, जिसे वहां फागो के नाम से जाना जाता है. वहीं इसके अलावा कश्मीर समेत सूडान, नेपाल, अफगानिस्तान में भी बेड़ू की प्रजातियां पाई जाती हैं. पूरे विश्व में इस फल की 800 प्रजातियां पाई जाती हैं.

पेन किलर के रूप में होता है प्रयोग
बेड़ू पर काम कर रहे श्रीनगर गढ़वाल के ग्रामीण उद्यम त्वरण परियोजना के कुलदीप बिष्ट जानकारी देते हुए बताते हैं कि बेड़ू एक ऐसा फल है, जिसका प्रयोग औषधि के रूप में प्राचीन समय से चला आ रहा है. पहले लोग पेन किलर के रूप में भी इसका प्रयोग करते थे. इसके साथ पेट साफ करने समेत बॉडी ग्रोथ के लिए भी यह कारगर है. वह आगे कहते हैं कि बेड़ू के कई उत्पाद बाजार में भी बिक रहे हैं.

बेड़ू का केवल फल ही नहीं इस पेड़ का प्रत्येक हिस्सा फिर चाहे वह टहनी हो, पत्ते हो व अन्य, सभी किसी न किसी काम आते हैं. बेड़ू के फल से निकलने वाले सफेद दूध की तरह के तरल पदार्थ को अगर चोट पर लगाएं, तो घाव जल्दी भरता है. वहीं उत्तराखंड के कई हिस्सों में बेड़ू की सब्जी भी बनाई जाती है.

 

पालतू जानवरों के लिए भी फायदेमंद
इंसानों के साथ जानवरों के लिए भी बेड़ू फायदेमंद है. अगर पालतू जानवरों को बेड़ू के पत्ते खिलाये जाये, तो जानवरों में अच्छी ग्रोथ देखने को मिलती है. अगर दुधारू पशुओं को बेड़ू के पत्ते लगातार चारे के रूप में दिया जाये, तो उनके दूध की क्वालिटी भी काफी अच्छी हो जाती है. उत्तराखंड के इस पहाड़ी फल को अब वैश्विक स्तर पर भी पहचान मिल चुकी है. यही कारण है कि अब बेड़ू के कई उत्पाद बाजार में बिक रहे हैं और लोग इसके औषधीय गुणों का लाभ ले रहे हैं.

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