उत्तराखण्ड

धार्मिक आस्था के साथ जैव विविधता का केंद्र बनेगा थलकेदार

उत्तराखंड में पाए जाने वाली जैव विविधता को बचाए रखने के लिए जंगलों के संरक्षण की आवश्यकता है जिसके अनुसार अनेक योजनाओं को धरातल में उतारे जाने के कयास अब शासन-प्रशासन द्वारा किए जा रहे है आज हम बात कर रहे हैं पिथौरागढ़ मुख्यालय के सबसे घने जंगल थलकेदार की पहाड़ी के बारे में जिसे अब इको टूरिज्म के क्षेत्र में संवारा जाएगा

थलकेदार वन क्षेत्र से 60 से अधिक गांव लगे हुए हैं जहां बांज देवदार, बुरांश और काफल के जंगलों की संख्या अधिक है और इस वन क्षेत्र में जंगली जानवरों की तादात भी अधिक है 50,000 से अधिक की जनसंख्या इन वनों से निकलने वाले पानी पर ही निर्भर करती है यही कारण भी है कि इसे संरक्षित करने के लिए लंबे समय से कोशिश चल रहा हैं जिसे आगे बढ़ाते हुए जिला प्रशासन अब थल केदार के वन क्षेत्र को ईको टूरिज्म का हब बनाने की तैयारी कर रहा है

ईको टूरिज़्म का हब बनेगा थलकेदार
पिथौरागढ़ की जिलाधिकारी रीना जोशी ने जानकारी देते हुए कहा कि थलकेदार वन क्षेत्र को इको टूरिज्म के अनुसार विकसित किया जाएगा | जिसके लिए एक्शन प्लान भी तैयार किया जा चुका है जिसमें पर्यटन विभाग वन विभाग और जिला प्रशासन ने मिलकर इस क्षेत्र में इको हट्स और एडवेंचर्स से जुड़ी अनेक गतिविधियों को इस प्लान में शामिल किया गया है जिसमें जल्द काम प्रारम्भ किया जाएगाथलकेदार वन क्षेत्र में यदि प्रशासन द्वारा बनाए गए इस प्लान पर काम होता है तो निश्चित ही यह वन क्षेत्र और इससे जुड़े गांव निश्चित तौर पर पर्यटन की गतिविधियों से जुड़ पाएंगे इससे क्षेत्र का विकास होना संभव है यहां के लोग लंबे समय से इस क्षेत्र में पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों के प्रारम्भ होने का प्रतीक्षा कर रहे हैं

थलकेदार में टूरिज्म की अपार संभावनाएं
यहां पिथौरागढ़ के निवासी और सामाजिक सरोकारों से जुड़े राकेश पंत बताते हैं कि थलकेदार क्षेत्र जो कि मुख्यालय से काफी निकट है जहां टूरिज्म की अपार संभावनाएं होने के साथ ही यह क्षेत्र यहां के लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है, उन्होंने इसके महत्व बताते हुए बोला कि थलकेदार वन क्षेत्र सबसे घना और काफी फैला हुआ है जो प्रकृति प्रेमियों के लिए परफेक्ट स्थान है उन्होंने इसके संरक्षण की बात भी की है

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