विवेक की आर्ट गैलरी से जुड़े देश-दुनिया के 12 धर्मों के चित्रकार

विवेक की आर्ट गैलरी से जुड़े देश-दुनिया के 12 धर्मों के चित्रकार

किसी भी कलाकार के पास जीवन को देखने-समझने की दृष्टि सबसे खूबसूरत होती है। समाज को जानने-समझने का उनका अपना नजरिया होता है... जो उनकी कृतियों में साफ देखा जा सकता है। अलग-अलग विषयों को अपने चित्रों में दर्शाने वाले हल्‍द्वानी निवासी विवेक बिष्‍ट ने लीक से हटकर कुछ अलग करने की कोशिश की है। उन्‍होंने 20 देशों के 12 से अधिक धर्मों के आध्यात्मिक चित्रकारों को एक मंच पर ला दिया है। अस्तित्वम् गैलरी नाम की आध्यात्मिक कला गैलरी का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आध्यात्मिकता, समानता व रचनात्मकता का संदेश देना है।

सकारात्मक परिणाम लाता है सृजन

अस्तित्वम् गैलरी सभी इंटरनेट प्लेटफार्म पर तकनीकी रूप से संचालित हो रही है। कला गैलरी के संस्थापक विवेक बिष्ट बताते हैं कि किसी वस्तु, विचार या रचना का सृजन सकारात्मक परिणाम लेकर आता है। सृजनात्मक गुण व्यक्ति को उत्साह-उमंग से भर देता है और जीवन में बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक साबित होता है।

20 देशों के चित्रकार अस्तित्‍वम का हिस्‍सा

अस्तित्वम् गैलरी सभी धर्मों के आध्यात्मिक चित्रकारों को अपने धर्मगुरुओं या ईश्वर को समर्पित करते हुए कलाकृतियां बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। भारत, सोवियत संघ, अमेरिका, जापान, कनाडा, इजराइल, चीन, सिंगापुर, फ्रांस समेत 20 देशों के 100 से अधिक चित्रकार आध्यात्मिक गैलरी का हिस्सा हैं। सह संस्थापक मोहित लोहनी बताते हैं कि ब्रह्मांड में विद्यमान ऊर्जा के अध्ययन व अनुभव पर आधारित कला श्रृंखला को गैलरी में शामिल किया गया है।

इस तरह हुई शुरुआत

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले 26 वर्षीय विवेक चित्रकार हैं। विवेक बताते है कि पिछले डेढ़ वर्षों से वह श्रीमद्भगवत गीता व अन्य ग्रंथों का अध्ययन कर रहे हैं। समझा कि सभी धर्मों का उद्देश्य समाज में प्रेम, समानता, शांति का संदेश देना है। चित्रकार में भी इसमें भागीदार बने, इसी से सभी धर्मों के आध्यात्मिक चित्रकारों को साथ लाने का विचार आया। तीन माह में 12 से अधिक धर्मों के कलाकार गैलरी का हिस्सा बच चुके हैं।

बेहतर समाज बनाना उद्देश्य

अस्तित्वम् गैलरी का ट्रेड मार्क कराया गया है। विभिन्न देशों के आध्यात्मिक चित्रकार विवेक की सकारात्मक सोच को पसंद कर रहे हैं। गैलरी बेहतर समाज बनाने में योगदान देना चाहती है। विवेक कहते हैं कि सभी धर्मों को ध्यान में रखकर तैयार की गई यह इकलौती आध्यात्मिक कला गैलरी है।

चित्र पहले से दिमाग में फ्रेम होता है

विवेक को खुद की बनाई पेंटिंग बहुत पसंद है। कहते हैं कलाकार के लिए कोई पेंटिंग कम या अधिक उपयोगी नहीं होती। वह हर चित्र को पूरे शिद्दत से उकेरता है। दूसरे चित्रकारों में विजय विश्वाल विवेक के पसंदीदा हैं। उनहोंने बताया कि पेंटिंग शुरू करने से पहले पेंटिंग का पूरा फ्रेम उनके दिमाग में रहता है। इसी पेंटिंग के दौरन बस रेखाओं और रंगों का खास ध्‍यान रखना पड़ता है।

300 से ज्यादा पेंटिंग बना चुके विवेक

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले विवेक ने नौ साल पहले शौकिया तौर पर पेंटिंग बनानी शुरू की। बाद में इसे प्रोफेशन बना लिया। अब तक 300 से ज्यादा पेंटिंग बना चुके हैं। विवेक ऐतिहासिक धरोहरों के साथ कहानी, कविता के लिए चित्रों के जरिये बयां करते हैं।

पहाड़ की पीड़ा पर ब्रश चला चुके हैं वि‍वेक

विवेक पहाड़ की पीड़ा को समझते हुए पलायन को लेकर भी पेंटिंग बना चुके हैं। वह पहाड़ की जीवनशैली, ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहर को कैनवास पर उतार कर देश-विदेश में रहने वाले प्रवासी उत्तराखंडियों के मन में पहाड़ की याद जगाने की कोशिश, ताकि अपनी मिट्टी की खुशबू को महसूस करने वाले लोग किसी न किसी बहाने अपनी जड़ों से जुड़े रहें।


उत्तराखंड में कोरोना! 24 घंटे में सामने आए 2904 नए मामले, कोविड में अनाथ हुए बच्चों को मिलेगी आपदा राहत राशि

उत्तराखंड में कोरोना! 24 घंटे में सामने आए 2904 नए मामले, कोविड में अनाथ हुए बच्चों को मिलेगी आपदा राहत राशि

प्रदेश में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 2904 नए मामले सामने आए हैं, जबकि चार कोरोना संक्रमितों की मौत हो गई। दूसरी ओर, बुधवार को 1241 मरीजों ने कोरोना से जंग जीत ली।



स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में सामने आए 2904 नए मामलों में अल्मोड़ा में 19, बागेश्वर में 127, चमोली में 06, चंपावत में 30, देहरादून में 1016, हरिद्वार में 337, नैनीताल में 397, पौड़ी में 89, पिथौरागढ़ में 127, रुद्रप्रयाग में 252, टिहरी में 85, ऊधमसिंह नगर में 384 और उत्तरकाशी में 35 मामले शामिल हैं। प्रदेश में अब 32880 एक्टिव कोरोना केस हैं, जिनमें सर्वाधिक 14387 केस देहरादून जिले के हैं।

कोविड में अनाथ हुए बच्चों को मिलेगी आपदा राहत राशि

प्रदेश के कोविड में अनाथ हुए बच्चों को आपदा राहत राशि मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हलावा देते हुए मुख्य सचिव डॉ.एसएस संधू ने समस्त जिलाधिकारियों को इस संबंध में आदेश जारी किया है। कहा गया है कि 31 जनवरी तक इस तरह के बच्चों को राहत राशि उपलब्ध कराते हुए इससे शासन को अवगत कराएं।

मुख्य सचिव की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने बाल स्वराज पोर्टल पर अपलोड ऐसे बच्चे जिनके दोनों अभिभावक या एकमात्र जीवित अभिभावक की कोविड 2019 से मौत हो गई है, उन्हें आपदा राहत राशि दी जाए। बाल स्वराज पोर्टल पर 25 जनवरी 2022 तक उत्तराखंड के इस तरह के 162 बच्चे पंजीकृत हैं।

जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी व आईसीडीएस सुपरवाइजर की टीम बनाकर ऐसे बच्चों का सर्वेक्षण किया जाए। यह देखा जाए कि इन बच्चों को आपदा राहत राशि मिली या नहीं मिली। यदि इन बच्चों को यह राशि नहीं मिली तो उन्हें राशि उपलब्ध कराई जाए। जबकि एक फरवरी तक इस संबंध में रिपोर्ट सचिव आपदा प्रबंधन को उपलब्ध कराई जाए।