पिथौरागढ़ में शोपीस बने कई पशु अस्पताल

पिथौरागढ़ में शोपीस बने कई पशु अस्पताल

पिथौरागढ़ उत्तराखंड का पिथौरागढ़ जिला पर्वतीय क्षेत्र होने के साथ मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन से जुड़ा है यहां ग्रामीण अंचलों में रहने वाली जनसंख्या का पशुपालन ही आजीविका का मुख्य साधन है वहीं, पशुओं की संख्या अधिक होने के कारण उनमें (पशुओं) रोंगों का खतरा भी अधिक रहता हैवहीं, पशुओं के बीमार होने पर ग्रामीणों की समस्याएं काफी बढ़ जाती हैं क्योंकि जिले के पशु हॉस्पिटल में डॉक्टरों की भारी कमी है यहां के ग्रामीण उपचार और दवाइयों के लिए जिला मुख्यालय की दौड़ लगाने को विवश हैं

दूध बेचकर गुजारा करने वाले ग्रामीण पशु डॉक्टर और अन्य कोई सुविधा न मिल पाने से काफी हताश हैं, जिसको लेकर यहां के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग लंबे समय से पशु डॉक्टरों की मांग करते आए हैं, लेकिन परेशानी जस की तस बनी हुई है यहां बंगापानी क्षेत्र के जनप्रतिनिधि प्रकाश गोस्वामी ने बोला कि पशु डॉक्टरों की तैनाती की मांग को लेकर वह अनशन भी कर चुके हैं, लेकिन गवर्नमेंट उनकी इस आवश्यकता को अनदेखा कर रही है वहीं, देवलथल के क्षेत्रीय निवासी जगदीश कुमार का बोलना है कि लंबे समय से पशु सेवा केंद्र महज शोपीस बनकर रह गए हैं

पिथौरागढ़ के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डाक्टर योगेश भारद्वाज ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में पशु चिकित्सा अधिकारी के 15 पद, फार्मासिस्ट के 8 पद और पशुधन प्रसार अधिकारी के 59 पद रिक्त चल रहे हैं, जिन्हें भरे जाने के संबंध में शासन से पत्राचार किया गया है

ग्रामीण इलाकों में जानवरों का उपचार न हो पाने से जिला मुख्यालय पर भी काफी दबाव बढ़ता है ग्रामीण दूरदराज से यहां अपने पशुओं के लिए दवाइयां लेने पहुंचते हैं, जो उनके लिए बहुत खर्चीला हो जाता है पिथौरागढ़ मुख्यालय के एकमात्र पशु हॉस्पिटल में एक ही जानकार चिकित्सक मनोज जोशी काम कर रहे हैं, जिनके ऊपर ग्रामीण क्षेत्रों के जानवरों सहित शहर के पालतू और आवारा मवेशियों के उपचार का भी जिम्मा है