उत्तर प्रदेश

मुजफ्फरनगर में हमला और लूट का मुकदमा लिखवाने वाला अपने बयान से मुकरा

मुजफ्फरनगर में हुए 2013 के सांप्रदायिक दंगे के दौरान धावा और लूट का केस लिखवाने वाला अपने बयान से मुकर गया उसने शपथपत्र देकर कह दिया कि कुछ मौलवियों के बहकावे में आकर केस लिखवा दिया था जबकि एसआइटी ने छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी मुकदमे का वादी पक्षद्रोही होने पर न्यायालय ने छह आरोपितों को बरी कर दिया साथ ही बयान से मुकरे मुकदमे के वादी के खिलाफ भी केस चलाने का आदेश दिया है

 

सात सितंबर 2013 को जनपद में सांप्रदायिक तनाव फैल गया था गांव फुगाना निवासी अख्तर पुत्र गेंदा ने 27 सितंबर 2013 को केस दर्ज कराया था इल्जाम था कि आठ सितंबर को वह अपने परिवार के साथ घर पर उपस्थित था दिन में दो बजे गांव के कपिल और सचिन पुत्रगण नारायण, जितेन्द्र पुत्र वीरसैन, योगेश पुत्र भूषण और विकास पुत्र वेदु बनारसी तथा विनोद पुत्र मांगा सहित सैकड़ों अज्ञात लोगों ने धार्मिक विद्वेष के नारे लगाते हुए उनके घर पर धावा बोल दिया था

आरोप था कि गुस्साए लोगों ने उनको जान से मारने की नीयत से तबल और लाठी डंडों से धावा कर दिया जिसके बाद घर का सामान लूटकर आग लगा दी थी जिसमें उनका 10 लाख का हानि हुआ था एसआइटी ने मुद्दे की विवेचना कर न्यायालय में सभी छह आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी

मौलवियों पर कोरे कागज पर हस्ताक्षर कराने का आरोप

अभियोजन के अनुसार, घटना के मुकदमे की सुनवाई एडीजे-15 दिव्या भार्गव की न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान वादी केस अपने बयान से पलट गया था अख्तर ने अभियोजन साक्ष्य के दौरान शपथपत्र देकर कहा था कि 2013 में सांप्रदायिक दंगा भड़कने की जानकारी मिली थी जिसके चलते आठ सितंबर को सुबह ही वह अपने चारों भाईयों के साथ परिवार सहित जौला कैंप में चला गया था जहां 20 दिन बाद चार मुसलमान मौलवी आए थे और उन्होंने सरकारी योजनाओं का फायदा दिलाने की बात कहते हुए कोरे कागजों पर हस्ताक्षर और अंगूठा आदि लगवाए थे पुलिस स्टेशन पर दी गई तहरीर और पुलिस को दिए 161 सीआरपीसी के बयान के उल्टा न्यायालय में साक्ष्य देने पर वादी केस के खिलाफ 344 सीआरपीसी के अनुसार केस चलाए जाने का आदेश न्यायालय ने दिया

 

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