लोगों ने अपने वीर लाल बबलू को अंतिम विदाई देते वक्त लगाए यह बड़े नारे

 लोगों ने अपने वीर लाल बबलू को अंतिम विदाई देते वक्त लगाए यह बड़े नारे

जब तक सूरज चांद रहेगा, बबलू तेरा नाम रहेगा. इस जयकारे के बीच शुक्रवार रात गांव पोखर पांडेय के लोगों ने अपने वीर लाल बबलू को अंतिम विदाई थी. शहीद बबलू के अंतिम दर्शन के लिए मानो पूरा गांव उमड़ पड़ा. गमगीन माहौल में शहीद बबलू का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. मुखाग्नि उनके छोटे भाई उमेश ने दी.

रात लगभग सवा दस बजे शहीद बबलू का मृत शरीर लेकर पांच गाड़ियों का काफिला गांव पोखर पांडेय पहुंचा. शहीद की याद में जयकारे लगने लगे. सोशल डिस्टेंस की परवाह न करते हुए गांव के लोग शहीद के घर पर इकट्ठे हो गए. हर किसी को गांव के लाल के अंतिम दर्शन करने थे. यहां शहीद के पार्थिव शरीर को आधे घंटे के लिए रखा गया. शहीद की बहनें  उसके मृत शरीर से लिपट कर रो रही थीं. पिता व भाइयों के भी आंसू रुक नहीं रहे थे. यहां जनप्रतिनिधियों व पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र चढ़ाए. गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. जयघोष के बीच घर के पास ही परिवार की व्यक्तिगत जमीन पर शहीद का राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार किया गया. मुखाग्नि छोटे भाई उमेश ने दी. 

इन्होंने दी श्रद्धांजलि 
लघु उद्योग प्रदेश मंत्री चौधरी उदयभान सिंह, विधायक जितेंद्र वर्मा, पूर्व विधायक छोटे लाल वर्मा, बीजेपी जिलाध्यक्ष गिर्राज कुशवाहा, एडीजी अजय आनंद, आईजी ए। सतीश गणेश, जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बबलू कुमार, एसडीएम एम। अरुन्मोली, सीओ विकास जयसवाल, तहसीलदार कृष्ण मुरारी दीक्षित, चैयरमैन आशा देवी चक ,ब्लॉक प्रमुख शमसाबाद पिन्टू यादव, ब्लॉक प्रमुख फतेहाबाद राकेश धनगर, सपा जिलाध्यक्ष रामगोपाल बधेल, पूर्व जिलाध्यक्ष रामसहाय यादव, कांग्रेस पार्टी जिलाध्यक्ष मनोज दीक्षित,पूर्व चैयरमैन शैलेश यादव.

तहसीलदार की ग्रामीणों से तकरार
जब शहीद का पार्थिव शरीर कानपुर से गांव के लिए रवाना हुआ तो यहां उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां प्रारम्भ हो गईं. अंतिम संस्कार के लिए जमीन खोजी जाने लगी. ग्रामीणों की मांग थी कि सड़क किनारे ग्राम सभा की जमीन है. वहीं, शहीद का अंतिम संस्कार किया जाए. वहीं शहीद का स्मारक बने. इस पर तहसीलदार ने बोला कि ग्राम समाज की जमीन पर अंतिम संस्कार के लिए प्रक्रिया होती है. बाद में सबकी सहमति से शहीद बबलू के परिवार की जमीन पर उनका राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार किया गया.