एलआइसी में हिस्सेदारी बेचने के फैसला से खफा अधिकारियों ने किया प्रदर्शन

एलआइसी में हिस्सेदारी बेचने के फैसला से खफा अधिकारियों ने किया प्रदर्शन

आम बजट में ज़िंदगी बीमा निगम (एलआइसी) में हिस्सेदारी बेचने के फैसला से खफा अधिकारियों और कर्मचारियों ने सरकार के विरूद्ध नारेबाजी की. उन्होंने बोला कि एलआइसी फायदा देने वाला उपक्रम है, ऐसे में सरकार को अपने निर्णय पर विचार करना चाहिए. कहा, कि आज वे एक घंटे की वॉक आउट हड़ताल कर अपना विरोध जताएंगे.

विकासनगर के लोकल एलआइसी ऑफिस के बाहर एलआइसी फेडरेशन ऑफ क्लास वन ऑफिसर्स एसोसिएशन, आल इंडिया इन्श्योरेंस एम्प्लाई एसोसिएशन और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंसोरेंस फील्ड वर्कर्स ऑफ इंडिया से जुड़े ऑफिसर और कर्मचारी एकत्र हुए.

इस दौरान उन्होंने एलआईसी को शेयर मार्केट में लिस्टिंग करने पर भी आक्रोश जताया. बोला कि एलआइसी ने 2019-20 के दौरान लाभांश के रूप में 2600 करोड़ रुपये सरकार को दिए हैं. वर्तमान में एलआइसी के प्रति 29 करोड़ बीमाधारकों का अटूट विश्वास है. 12 लाख अभिकर्ताओं की रोजी रोटी इससे चल रही है. वर्तमान सरकार की जन विरोधी इस प्रकार की नीतियों से सभी में आक्रोश है.

उन्होंने सरकार से इस निर्णय को वापस लेने की मांग की. लंच टाइम में नारेबाजी कर आक्रोश जताने वालों में मोहन सिंह चौहान, संदीप नैथानी, गोपाल रावत, जगत राम नेगी, दिनेश चौहान, सतेंदर सिंह चौहान, स्वेता राणा, अंकित शर्मा, रेनू, अजय, सुरेश, अरुण थापा, परवीन नेगी, राम किशन, विपिन कुमार, राजीव, उमेश भट्ट, जगत, कलम कखाड़ी, नरेंद्र कुमार आदि शामिल रहे.

भोजन माताओं के समर्थन में उतरे लोक कलाकार

विकासनगर के खंड एजुकेशन ऑफिसर ऑफिस के बाहर चल रहे भोजनमाता संगठन के धरने के समर्थन में लोक कलाकारों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. अंतर्राष्ट्रीय स्तर के लोक कलाकार नंदलाल भारती ने अपनी पूरी टीम के साथ धरनास्थल पर आकर भोजन माताओं का समर्थन किया. उन्होंने बोला भोजन माताएं बेहद निर्बल वर्ग से आती हैं, इसलिए सरकार को उनकी मांगों पर अहमियत के आधार पर निर्णय लेना चाहिए.

लोक कलाकार नंदलाल भारती ने अपने संबोधन में बोला भोजन माताओं के पद के साथ माता शब्द जुड़ा हुआ है, माता वह होती है, जिसके आंचल में हम सभी लोग अपना ज़िंदगी प्रारम्भ करते हैं. उन्होंने बोला माता के नाम का सम्मान हम सभी को करना चाहिए. इसके अतिरिक्त सरकारी विद्यालयों में मिड डे मील तैयार करने वाली भोजन माताओं की आर्थिक स्थिति भी किसी से छिपी नहीं है. आर्थिक रूप से बेहद निर्बल परिवारों से संबंध रखने वाली इन माताओं के मुद्दे में सरकार को पूरी जिम्मेदारी के साथ निर्णय लेना चाहिए.

उन्होंने बोला सरकार को उनकी मांग पर अहमियत के आधार पर फैसला लेना चाहिए. इस दौरान लोक गायक बारू निराला ने बोला बढ़ती महंगाई के मौजूदा समय में बड़ी तनख्वाह पाने वाले लोगों का गुजारा कठिन हो रहा है. ऐसे में सरकार को छह हजार मानदेय में अपने परिवार चलाने वाली भोजन माताओं की कठिनाई को समझना चाहिए. उन्होंने सरकार से अपील करते हुए उनका मानदेय बढ़ाने की मांग की. इस दौरान ममता चौहान, दीपा, प्रेमादेई, मीना, शल्लो देवी, निर्मला, मंजू, मानसी, मुन्नी, परभजोत, बलवंती, काजल गुप्ता, विरमा देवी आदि मौजूद रहे.