मेडिकल स्टोर्स पर मास्क न मिलने से लोगों की बढ़ी कठिनाई, जाने युवक ने की मदद

मेडिकल स्टोर्स पर मास्क न मिलने से लोगों की बढ़ी कठिनाई, जाने युवक ने की मदद

वैश्विक महामारी घोषित हो चुके कोरोनावायरस (Coronavirus) के बढ़ते खतरे के बीच प्रदेश के 15 जिलों को पूरी तरह से सील करने के साथ ही बिना मास्क लगाए सड़क पर निकलना पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। 

ऐसे में पहले से ही मार्केट से गायब चल रहे मास्क की डिमांड अब व भी बढ़ गई है। लेकिन मेडिकल स्टोर्स पर मास्क न मिलने से लोगों की कठिनाई व भी बढ़ गई है। ऐसे में फतेहपुर (Fatehpur) जिले की एक युवती खादी के कपड़ो का मास्क बनाकर लोगों को निशुल्क वितरित करने में लगी हुई है। इस कार्य में उसके पड़ोसी भी पूरी मदद कर रहे हैं।

रोजाना बना रहीं 150 से 200 मास्क

फतेहपुर शहर के चित्रांशनगर इलाके की रहने वाली रिंकी गांधी आश्रम से खादी के कपड़े मंगवाकर सूती कपड़े का ट्रिपल लेयर मास्क बना रही हैं। घर में मास्क तैयार होने के बाद उसे लोगों के बीच निशुल्क वितरित किया जाता है। घर में रखी हाथ से चलने वाली छोटी सिलाई की मशीन पर ही मास्क बना रही रिंकी दिनभर में 150 से 200 मास्क तैयार कर लेती हैं। मास्क बांटने में इस बात का खास ध्यान रखा जाता है कि निशुल्क वितरित होने वाला यह मास्क गरीबों व मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों तक पहुंचाया जा सके। मास्क बांटने जाने वाले लोग सोशल डिस्टेंसिग का ध्यान तो रखते ही हैं व जिन्हें मास्क का वितरण किया जाता है उन्हें कोरोना के खतरे से अवगत भी कराते हैं। साथ ही उन्हें मास्क पहनने से होने वाले कोरोना के बचाव के बारे में भी बताया जाता है।

मां को है लकवा

कोरोना योद्धा के रूप में कार्य कर रही रिंकी का बोलना है कि दुकानें बंद होने के चलते उसे मार्केट से प्लास्टिक की डोरी नही मिल पा रही है, जिसके विकल्प के रूप में वह सूती कपड़े की डोरी बनाकर मास्क के दोनों कोनों पर सिल देती हैं, जिससे मास्क लगाने में कोई परेशानी न हो। मास्क बना रही रिंकी की मां पार्वती को कुछ दिन पहले लकवा मार गया था। जिसके चलते उसकी मां चल फिर नहीं सकतीं। उसके बावजूद रिंकी अपने मां की सेवा करने के साथ ही लोगों को कोरोना के खतरे से बचाने में लगी हुई हैं।

इस कार्य मे रिंकी का योगदान करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता राजेश पटेल बताते हैं कि लॉकडाउन होने के चलते रिंकी को खादी भंडार से जाकर वहां से वस्त्र लाने में बहुत ज्यादा परेशानी हो रही थी। जिसपर वह खादी आश्रम से कपड़े लाकर रिंकी को उपलब्ध कराते है व मास्क तैयार होने के बाद उसके वितरण की जिम्मेदारी भी राजेश व उनके साथियों के ऊपर रहती है।