किसी वर्ग का नहीं, सबका होता है मुख्यमंत्री: योगी आदित्यनाथ

किसी वर्ग का नहीं, सबका होता है मुख्यमंत्री: योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री किसी वर्ग का नहीं, सबका होता है। पद के नाते फलक बढ़ गया है। उत्तर प्रदेश की 24 करोड़ से अधिक जनता मेरा परिवार है। उनकी बेहतरी और प्रदेश का विकास मेरा फर्ज है। पश्चिम बंगाल की जनता भाजपा को सत्ता सौंपने का मन बना चुकी है। 2 मई के बाद बंगाल में पूर्ण बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है।

उत्तर प्रदेश धनवान हो रहा है। ग्रॉस स्टेट डोमैस्टिक प्रोडक्ट मामले में 5वें पायदान से दूसरे नंबर पर आ गया है। इसका मतलब क्या है? उत्तर प्रदेश की 24 करोड़ की आबादी पर इसका क्या असर पड़ेगा?

मार्च 2017 में जब सरकार बनी, हमारा पहला उद्देश्य था कि वर्षों से उपेक्षित प्रदेश को विकास से जोड़ा जाए। पिछली सरकारों की गलत नीति और नीयत से आमजन का जो भरोसा टूटा था, उसे बहाल करना था। एक ऐसे प्रदेश में जहां संभावनाओं और संसाधनों की कोई कमी नहीं, फिर भी उद्योग-धंधों का अभाव था, हमने दायित्व ग्रहण के पश्चात हर क्षेत्र में व्यापक बदलाव का रोडमैप तैयार किया। सभी वर्गों से संवाद कर उनकी अपेक्षाओं को जाना  और फिर उस अनुरूप नीतियां तैयार कर नियोजित प्रयास किए गए। आज यह कहते हुए आत्मिक संतुष्टि हो रही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में 4 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने ओवरऑल पर्सेप्शन को बदल दिया है। प्रदेश के बारे में देश व दुनिया में एक सकारात्मक माहौल देखने को मिला है। अर्थव्यवस्था जो पहले 5वें-6वें स्थान पर थी, अब दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरी है। इन्फ्रास्ट्रक्चर, लोक कल्याण, एम.एस.एम.ई. और कृषि क्षेत्र में सार्थक कार्यों का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश बीमारू से एक समर्थ और सक्षम राज्य बन गया है। वर्ष 2015-16 में उत्तर प्रदेश ‘ईज ऑफ डूइंग’ बिजनैस’ के मामले में देश में 14वें स्थान पर था, जो सरकार की नीतियों से दूसरे स्थान पर आ गया है। इन्वैस्टर्स समिट का नतीजा है कि देश और दुनिया के निवेशक उत्तर प्रदेश में निवेश करना चाहते हैं। राज्य सरकार द्वारा कोरोना काल में औद्योगिक विकास के लिए, एम.एस.एम.ई. सैक्टर में उल्लेखनीय कार्य किया गया। पहले हर प्रकार का निवेश चीन जाता था। अब चीन से प्रदेश में वापस आ रहा है। देश के पहले डिस्प्ले यूनिट की प्रदेश में स्थापना पर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। अब हम प्रदेश को एक ट्रिलियन की इकोनॉमी की तरफ ले जा रहे हैं।

2022 में उत्तर प्रदेश में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। क्या 2017 में मोदी लहर की तरह प्रचंड बहुमत का करिश्मा बीजेपी फिर दोहरा पाएगी?
हम 300 से ज्यादा सीटें जीत कर उत्तर प्रदेश में 2022 में फिर सरकार बनाएंगे। प्रदेश की जनता विकास और सुशासन के साथ डट कर खड़ी है। तुष्टीकरण, जाति, मत मजहब और परिवार की राजनीति करने वालों की दाल अब उत्तर प्रदेश में नहीं गलने वाली। भ्रष्टाचार और वंशवाद की राजनीति करने वालों को उत्तर प्रदेश की जनता ने हाशिए पर पहुंचा दिया है। हमारी सरकार ने चार साल में ही वो कर दिखाया है जो वर्षों में नहीं हो पाया था। अयोध्या  में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो रहा है। वाराणसी, मथुरा और प्रयागराज का सांस्कृतिक वैभव पूरी दुनिया देख रही है। 4 लाख से अधिक नौजवानों को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। कौशल विकास के माध्यम से 7 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। 3 लाख से अधिक को कौशल प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ा जा चुका है। स्किल मैपिंग कराए गए 3784255 श्रमिकों को सेवायोजित किया जा चुका है। विभिन्न विभागों में 941267 श्रमिकों को रोजगार से जोड़ा गया है। रोजगार मेले के माध्यम से 4 लाख युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराया गया है। आऊटसोर्सिंग और संविदा के जरिए 3 लाख से अधिक युवाओं को नौकरियां दी गई हैं। प्रदेश के करीब 59 हजार सामुदायिक शौचालयों में सफाईकर्मियों, केयर टेकर की नियुक्ति की गई है।

मनरेगा में ही 40 करोड़ मानव दिवस सृजित कर हमने एक नया कीर्तिमान रचा है। करीब 1 करोड़ 10 लाख श्रमिकों को हमने मनरेगा के तहत रोजगार दिया। 58,758 ग्राम पंचायतों में महिलाओं को बैंकिंग कॉरसपोंडैंट सखी के रूप में तैनात कर ग्रामीण क्षेत्रों में महिला रोजगार की एक नई राह खोली है। अगले कुछ दिनों में 1 लाख 22 हजार बैंकिंग सखी भर्ती करने का लक्ष्य है। इन्वैस्टर समिट के जरिए देशी, विदेशी कंपनियों के साथ 4.68 लाख करोड़ रुपए के निवेश एम.ओ.यू. सरकार ने किया। इनमें से करीब 3 लाख करोड़ रुपए निवेश की 371 परियोजनाएं क्रियान्वित हैं। जिनसे लगभग 35 लाख लोगों को रोजगार मिलने जा रहा है। उत्तर भारत का सबसे बड़ा डाटा सैंटर नोएडा में 6000 करोड़ की लागत से बन रहा है, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 50 हजार युवाओं को रोजगार मिलना तय है। नोएडा में फिल्म सिटी की स्थापना निवेश और रोजगार के बड़े अवसर देगी। आईकिया द्वारा नोएडा में 5500 करोड़ का निवेश किया गया है। ओ.डी.ओ.पी. योजना के तहत 25 लाख से अधिक लोगों को रोजगार और स्वरोजगार मिल चुका है। पूर्वांचल एक्सप्रैस-वे और बुंदेलखंड एक्सप्रैस-वे का निर्माण कार्य पूरा होने को है। गंगा एक्सप्रैस-वे का निर्माण कार्य शुरू हो रहा है। डिफैंस कॉरीडोर और मैट्रो परियोजनाओं पर काम हो रहा है। 

उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां एक साथ पांच एक्सप्रैस-वे और पांच इंटरनैशनल एयरपोर्ट बन रहे हैं। आजादी के 70 सालों बाद भी महज दो एयरपोर्ट संचालित थे, लेकिन अब आठ हवाई अड्डों से उड़ान भरी जा रही है, 13 और नए हवाई अड्डे बनाए जा रहे हैं। मेरठ-गाजियाबाद-दिल्ली रैपिड रेल परियोजना सहित 10 शहरों में मैट्रो, ग्रेटर नोएडा में विश्वस्तरीय मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब बन रहा है। लखनऊ से गाजीपुर जिले तक 22,496 करोड़ की लागत से बन रहे 341 कि.मी. लंबे पूर्वांचल एक्सप्रैस-वे का कार्य करीब 80 फीसदी हो चुका है। 27 कि.मी. लंबे बलिया लिंक एक्सप्रैस-वे को भी मंजूरी दी गई है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रैस-वे आजमगढ़ जिले से गोरखपुर तक करीब साढ़े 91 कि.मी. लंबा बन रहा है। निवेश और उद्योगों के लिए बेहतर माहौल तैयार हुआ है। 

कोरोना काल से जहां सभी चीजों में गिरावट आई है, वहीं उत्तर प्रदेश ने शानदार प्रदर्शन किया। किस तरह की रणनीति रही आपकी सरकार की? कोरोना पर कैसे काबू पाया? 
कोरोना महामारी इस सदी की सबसे बड़ी त्रासदी रही है। इसके सामने दुनिया की बड़ी-बड़ी ताकतें पस्त हो गईं। लेकिन हम सब आभारी हैं प्रधानमंत्री जी के जिनके मार्गदर्शन में देश के 135 करोड़ लोगों को कोरोना से सुरक्षित किया गया। प्रदेश में कोरोना प्रबंधन में पूरी प्रतिबद्धता और टीमवर्क के साथ कार्य किया गया। कोरोना प्रबंधन में जनता द्वारा दिए धन का उपयोग हैल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने में किया गया। प्रदेश में कोरोना का जब पहला केस आया था उस समय टैस्टिंग क्षमता शून्य थी। अब 2 लाख प्रतिदिन की हो गई है। हर जनपद में कोविड अस्पतालों की स्थापना कर 1.5 लाख बैड की व्यवस्था की गई। कोरोना के प्रारंभ में सैनिटाइजर का अभाव था। इसके दाम काफी ज्यादा थे। प्रदेश सरकार ने चीनी मिलों को सैनिटाइजर बनाने के लिए प्रेरित किया। उत्तर प्रदेश पहला राज्य है, जिसने श्रमिकों, स्ट्रीट वैंडर्स, रिक्शा चालकों, कुलियों, पल्लेदारों आदि को भरण-पोषण भत्ता ऑनलाइन उपलब्ध कराया तथा सभी को राशन एवं राशन किट उपलब्ध कराया गया है। भरण-पोषण के रूप में उपलब्ध करवाई गई धनराशि ने उनका जीवन बचाने का कार्य किया। संगठित क्षेत्र के श्रमिकों को दो बार और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को एक बार भरण-पोषण भत्ता दिया गया। निवासी हों या प्रवासी सभी के जीवन और जीविका को सुरक्षित रखा। उत्तर प्रदेश ने टीम वर्क का अच्छा उदहारण पेश किया।

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र  मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बाद आप ही पोस्टर बॉय के रूप में सबसे लोकप्रिय नेता के रूप में सामने आते हैं। क्या कारण हैं कि जहां भी चुनाव होते हैं आपको एक बड़े स्टार प्रचारक के रूप में लिया जाता है, जबकि विरोधी खेमे के नेता आप पर ध्रुवीकरण करने का आरोप लगाते हैं? 
प्रधानमंत्री जी और पार्टी का जो मुझमें विश्वास है, उसके लिए धन्यवाद ज्ञापित करता हूं, लेकिन मुझ पर ध्रुवीकरण का आरोप लगाने वाले विपक्षी दल जरा अपने गिरेबान में झांक कर देखें। पिछली सरकार में जहां सांप्रदायिक दंगों, जाति संघर्षों और सामाजिक अपराधों की बाढ़ थी, मेरे चार साल के कार्यकाल में एक भी सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ है। एन.सी.आर.बी. की रिपोर्ट से भी इन सब तथ्यों की पुष्टि होती है कि पूर्व सरकार के मुकाबले सभी संज्ञेय एवं असंज्ञेय अपराधों की संख्या में कमी आई हैं। संगठित अपराध के खिलाफ मेरी सरकार की मुहिम रंग ला रही है। अपराध और भू-माफिया के राज्य में हौसले पस्त हैं और जनता में सुरक्षा की भावना बलवती हुई है। पांच राज्यों के चुनावों की जो आपने बात की है तो उक्त राज्यों के मतदाता भी यू.पी. में सकारात्मक एवं विकासात्मक कार्यों की अनदेखी नहीं करेंगे, ऐसा मेरा विश्वास है। मैं अभी पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम से लौटा हूं, हर जगह जनभावना भारतीय जनता पार्टी के साथ है।

लव जेहाद पर तो आप खुलकर बोलते रहे हैं। अब तो इसको लेकर उत्तर प्रदेश में कानून भी आ चुका है। क्या आपको लगता है कि यह सब कुछ एक सोची समझी साजिश के तहत किया जा रहा है? इसके पीछे आप कौन सी सोच, ताकतों और चेहरों को देख पाते हैं?
विकास सबका पर तुष्टीकरण किसी का नहीं, यह हमारी नीतियों का केन्द्रीय भाव है। हमारी सरकार ने शपथ लेने के बाद से ही जीरो टॉलरैंस की नीति पर काम किया। इसमें जनविरोधी काम करने वाले सरकार के निशाने पर थे। हमने कानून-व्यवस्था में सुधार को शीर्ष वरीयता पर रखा। अपराधियों-माफियाओं को उनके साम्राज्यों सहित नेस्तोनाबूद किया गया है। गुंडे-माफिया दूसरे राज्यों में मुंह छुपाए बैठे हैं। जो गुंडे सत्ता का सरपरस्त बनकर सत्ता का संचालन करते थे। अब वे दूसरे राज्यों में जाकर जान की भीख मांगकर वहां मुंह छुपाए बैठे हुए हैं। अब रही बात लव जेहाद की तो उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध कानून लागू किया है, यह आवश्यक था। छल प्रपंच और प्रलोभन के माध्यम से केवल विवाह के लिए धर्म परिवर्तन नहीं किया जा सकता। व्यापक जनहित में ऐसा किया जाना जरूरी था। आखिर केरल की मौजूदा सरकार उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी इस संबंध में कोई कानून क्यों लेकर नहीं आई? यह वही तत्व हैं जो समाज को धर्म एवं सांप्रदायिकता के आधार पर बांटना चाहते हैं और तुष्टीकरण की राजनीति करते हैं। 

तीन कृषि कानूनों को लेकर हो रहा किसान आंदोलन आपके नजरिए में क्या है ? इसके पीछे कौन लोग हैं और क्यों कृषि कानून का विरोध इस तरह से कर रहे हैं? 
वर्ष 2014 से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों के फलस्वरूप किसान राजनीति के एजैंडे में आया। अन्नदाता किसानों के लिए सरकार के मन में बहुत सम्मान है। आजादी के बाद ईमानदारी के साथ भारत के अन्नदाता किसानों को एम.एस.पी. का लाभ किसी ने दिलाया है, तो प्रधानमंत्री मोदी ने दिलाया है। किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है। सरकार किसानों के हित के लिए प्रतिबद्ध और तत्पर है तथा इसके लिए पूरी ईमानदारी से कार्य कर रही है। कॉन्ट्रैक्ट खेती में फसल के संबंध में कॉन्ट्रैक्ट किया जाता है, खेत के संबंध में नहीं। केन्द्र सरकार द्वारा किसानों के हितों में तीन अधिनियम बनाए गए हैं, जो किसानों के हितों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। इस कानून में यह सुविधा दी है कि किसान उत्पाद कहीं भी बेच सकता है। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होने पर किसान को लाभ होगा। खुली प्रतिस्पर्धा से किसान के जीवन में आमूल-चूल परिवर्तन आएगा। भोले भाले किसानों को बहकाकर अपना राजनीतिक अस्तित्व तलाशने की कोशिश कर रहे लोग बेनकाब हो चुके हैं। जनता और खुद किसान उनकी असलियत जान चुके हैं। उत्तर प्रदेश में कहीं भी आंदोलन का कोई असर नहीं है।

हमारे देश में क्रिकेट और राजनीति पर बहुत चर्चा होती है। बच्चे, बुजुर्ग, युवा और महिलाएं भी इसमें शामिल होती हैं। आपने उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली पारी में ही बजट को 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक तक पहुंचा कर दोगुना से अधिक कर दिया है। यह किसी क्रिकेटर द्वारा पहले टैस्ट मैच की पहली पारी में दोहरा शतक लगाने जैसा है। यह कैसे संभव हो सका? 
प्रदेश की छवि को एक नई दिशा में ले जाने के लिए अभी बहुत कुछ करना है। हमारे प्रयासों के चलते प्रदेश के अंदर हुए विकास कार्यों से राज्य की अर्थव्यवस्था में तेजी आई है, प्रदेश की राजस्व आय एक लाख करोड़ रुपए है। यह संभव हुआ है राज्य में निवेश बढ़ाने और कारोबार के लिए बेहतर माहौल देने के ‘फाइव पी’ फॉर्मूले पर काम करने से। ‘फाइव पी’ मतलब पॉलिसी, पोटैंशियल, प्लानिंग, परफार्मैस और परफैक्शन। इसी फॉर्मूले की वजह से यू.पी. संभावनाओं का प्रदेश बना है। इस फार्मूले व सरकार के वित्तीय अनुशासन का नतीजा यह रहा कि वर्ष 2016-17 की तुलना में चार वर्षों में कमोबेश सभी अहम सरकारी विभागों ने राजस्व वसूली में 10 से 143 फीसदी तक की वृद्धि हुई। चार वर्ष में उत्तर प्रदेश देश की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। जब सरकार बनी तो वर्ष 2017 में किसी के लिए यह कल्पना करना भी संभव नहीं था कि राज्य दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। अब राज्य ईज आफ डूइंग बिजनैस में देश में दूसरे नंबर पर रहा। वर्ष 2017 में बेरोजगारी दर 17.5 फीसदी थी, जो वर्ष 2021 में घटकर 4.1 फीसदी रह गई है। यही नहीं प्रति व्यक्ति आय भी चार वर्षों में बढ़ी है। अब प्रदेश को एक ट्रिलियन की इकोनॉमी की तरफ ले जा रहे हैं। यही हमारा अगला लक्ष्य है।

जिन जिम्मेदारियों की उम्मीद आपसे देश का एक बड़ा तबका रखने लगा है, उनको मद्देनजर रखते हुए क्या आप अपनी छवि बदलने का प्रयास करेंगे/करते हैं?
आप किसी तबके की बात क्यों कर रहे हैं। एक जनप्रतिनिधि/मुख्यमंत्री किसी वर्ग का नहीं सबका होता है। मैं 1998 में जब पहली बार सांसद बना तबसे न जाने कितनी बार यह बात कह चुका हूं। क्षेत्र का विकास और लोगों का हित ही उसका फर्ज होता है। उस दौरान सड़क से लेकर संसद तक जो भी संघर्ष किया वह सब क्षेत्र के विकास के लिए ही था। इन्सेफेलाइटिस को लेकर चला लंबा संघर्ष भी उनमें से एक था। मुख्यमंत्री के रूप में भी वही कर रहा हूं। पद के नाते फलक बढ़ गया है। अब 24 करोड़ से अधिक जनता मेरा परिवार है। उनकी बेहतरी और प्रदेश का विकास मेरा फर्ज है। कर भी रहा हूं।

हमारे देश में राजा जनक जैसे शासकों का इतिहास रहा है जो कि राजा होने के साथ-साथ तपस्वी भी थे और आध्यात्मिकता के सर्वोच्च शिखर पर भी थे। आपके अनुसार धर्म का राजनीति में क्या संदर्भ है और राजधर्म क्या है?
धर्म राजनीति का अनुशासन होता है। वह राजनीति का नियंत्रक होता है। हमारे यहां जो भी महान राजा हुए सबके अपने और महान धर्म गुरु थे। उनकी हर बात राजा के लिए आदेश जैसी होती थी। इसके कई उदाहरण हैं। बिना भेदभाव के पूरी पारदर्शिता के साथ प्रजा का कल्याण ही राजधर्म है। मैं वही कर रहा हूं। बात चाहे लाभार्थी परक योजनाओं की करें या सरकारी नौकरियों की। सबकी एक मात्र कसौटी सिर्फ और सिर्फ पात्रता/मैरिट रही है। यही राजधर्म है।


पश्चिम बंगाल और केरल में जिस तरह से अराजकता का माहौल है उसे पूरा देश देख रहा है। आने वाले चुनावों में इसका परिणाम भी देखने को मिल जाएगा। रही बात यू.पी. की, तो यहां महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों की तो एन.सी.आर.बी. की रिपोर्ट सभी के लिए सार्वजनिक है, जिसमें बताया गया है कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं के प्रति अपराध काफी घटे हैं।

पश्चिम बंगाल की जनता भाजपा को सत्ता सौंपने का मन बना चुकी है। 2 मई के बाद बंगाल में पूर्ण बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है। बंगाल की पहचान को पुनस्र्थापित करने और विकास की राह पर ले जाने के लिए परिवर्तन होना है। मोदी जी के नेतृत्व में एक भारत, श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को साकार करते हुए बंगाल के युवाओं के रोजगार के लिए परिवर्तन होना है। बंगाल के नौजवानों को भी रोजगार के अच्छे अवसर चाहिएं। गरीबों को शासन की सुविधा का लाभ मिलना चाहिए। बंगाल के किसानों को भी प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना का लाभ मिलना चाहिए। लोगों को स्वास्थ्य बीमा की योजना का लाभ भी मिलना चाहिए। यह सब टी.एम.सी. की भ्रष्ट सरकार के रहते नहीं हो सकता है। बंगाल में दुर्गा पूजा पर रोक लगाई जाती है।

बंगाल में जय श्री राम का नारा लगाना प्रतिबंधित है। भ्रष्टाचार चरम पर है। हर तरफ अराजकता है। कानून व्यवस्था नाम की चीज नहीं रह गई है। बंगाल की हालत देखकर दुख होता है। आज से 25-30 साल पहले भारत का नौजवान रोजी के लिए बंगाल आता था, लेकिन यहां की सरकारों ने बंगाल को बर्बाद कर दिया। सत्ता प्रायोजित अराजकता यहां की व्यवस्था को ध्वस्त कर चुकी है। टी.एम.सी. के लोग बंगाल में गुंडागर्दी कर रहे हैं। इनका इलाज भाजपा की सरकार में ही संभव है। भाजपा की सरकार बनने के बाद उत्तर प्रदेश की तरह बंगाल मे टी.एम.सी. के गुंडे भी गले में तख्ती बांधकर जान की भीख मांगते नजर आएंगे। इसमें कोई संदेह नहीं है।


इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में इस वर्ष नहीं बढ़ेगी फीस, योगी सरकार का बड़ा फैसला

इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में इस वर्ष नहीं बढ़ेगी फीस, योगी सरकार का बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने छात्र हित में प्रदेश के सभी इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में इस साल फीस में बढ़ोतरी नहीं करने का एक बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों में शैक्षिक सत्र 2021-22 में फीस नहीं बढ़ाई जाएगी। इस बड़े फैसले से एकेटीयू से लगभग 750 इंजीनियरिंग कॉलेज और प्राविधिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश से संबद्ध निजी क्षेत्र के 1247 डिप्लोमा स्तरीय और 19 अनुदानित संस्थाओ में पढ़ने वाले छात्र छात्रओ को इसका लाभ मिलेगा।

सचिव (प्राविधिक शिक्षा) आलोक कुमार ने बताया कि कोरोना महामारी को देखते हुए इस बार फीस बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। जो फीस पिछले शैक्षिक सत्र 2020-21 में निर्धारित की गई थी, वही इस साल भी ली जाएगी। प्राविधिक शिक्षा विभाग के इस फैसले से करीब चार लाख विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिल गई है।


उत्तर प्रदेश के 750 इंजीनियरिंग कॉलेजों में अलग-अलग 60 हजार रुपये से लेकर 1.20 लाख रुपये वार्षिक फीस है। वहीं 1,371 पॉलिटेक्निक संस्थानों में 10 हजार रुपये से लेकर 45 हजार रुपये तक सरकारी व निजी पॉलिटेक्निक संस्थानों की फीस निर्धारित है। सभी इंजीनियरिंग व पॉलिटेक्निक संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वह पिछले वर्ष तय की गई फीस ही इस सत्र में भी लें। अगर कोई संस्थान इससे अधिक फीस वसूलेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


प्राविधिक शिक्षा विभाग के सचिव आलोक कुमार ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है। प्रदेश में 1247 पॉलिटेक्निक कॉलेज व 750 इंजीनियरिंग कॉलेज हैं और 17 अनुदानित संस्थाओं के विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा। पिछले वर्ष भी कोरोना संक्रमण के कारण फीस वृद्धि पर रोक लगाई थी। इसे चालू शैक्षिक सत्र में भी जारी रखा जाएगा। इस सत्र में फीस 2020-21 के सत्र की ही मान्य होगी।


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