लॉक डॉन के दौरान बिहार झारखंड से ई विमर्श में सीएम हेमंत सोरेन ने केन्द्र को लेकर दिया यह बड़ा बयान

लॉक डॉन के दौरान बिहार झारखंड से ई विमर्श में सीएम हेमंत सोरेन ने केन्द्र को लेकर दिया यह बड़ा बयान

कोरोना महामारी को लेकर जारी लॉक डॉन के बाद झारखंड का क्या होगा रोड मैप इस विषय पर जी बिहार झारखंड से ई विमर्श में सीएम हेमंत सोरेन ने बोला कि हम लोगों ने तो सबसे पहले मजदूरों को अपने प्रदेश में लाने का वकालत सबसे पहले किया था व यह सिलसिला अभी भी जारी है।  

उन्होंने बोला कि अभी मजदूरों के आने का सिलसिला जारी है। हमलोग बहुत मजबूती से सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा व रोजगार सृजन पर कार्य कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर मेहनतकश पहले ही आ चुके हैं। उनमें से कईयों की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। कई अच्छा हो कर अपने घर भी जा चुके हैं।

सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में तैयारी बेहतर
सीएम ने बोला कि सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में हमारी तैयारी बहुत ही बेहतर है। स्वास्थ्य सेवा में जरूर संसाधनों के अभाव की वजह से हम लोग पीछे हैं, लेकिन उसमें भी हमने बहुत चीजों को अपने कंट्रोल में रखा है व अभी तक कोई अप्रिय घटना की सूचना अपने प्रदेश से नहीं के बराबर ही मिली है।  

उन्होंने बोला कि झारखंड लौटे प्रवासी मजदूरों से वार्ता करने पर मालूम होगा कि स्थिति क्या है। उनका यह बोलना है कि झारखंड आने के बाद इतनी जल्दी हमें कार्य व रोजगार मिलेगा यह उम्मीद कम था। आज के दिन में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार में भी लगे हैं।  

प्रवासियों की दिया जा रहा है रोजगार
मुख्यमंत्री ने बोला कि अभी लॉकडाउन नहीं खुला इसलिए हम लोगों से अपील भी कर रहे हैं कि घर पर ही रहें ताकि उनका स्वास्थ्य अच्छा रहे। मुख्यमंत्री ने बोला कि वैसे प्रवासी जिनको रोजगार नहीं मिल पाया है, उनके लिए खाने के लिए सामुदायिक किचन की व्यवस्था की गई है।

साथ ही राशन बनवाने का कार्य बहुत ही तेजी से चल रहा है तो हम कह सकते हैं हमारे प्रदेश में कहीं भी उहा पोह की स्थिति नहीं है ना ही कोई किसी भी ढंग का परेशानी कहीं पर भी है। बिल्कुल शांत व शांत वातावरण व बिल्कुल बोला जा सकता है कि हम कंफर्टेबल ढंग से चीजों को आगे ले जा रहे हैं।

स्पेशल ट्रेन के जरिए मेहनतकश लौट रहे घर
प्रवासी मजदूरों को अपने घर लाने के लिए रेल मंत्रालय के लिए आपने प्रस्ताव रखे थे स्पेशल ट्रेन चलाने की लेकिन उतनी संख्या में आपको ट्रेन नहीं मिल पाया इसके बाद आप की क्या व्यवस्था है जिससे आप अपने मजदूरों को सुरक्षित अपने घर ला सकते हैं

सबसे पहले तो मजदूरों को लाने का वकालत हमेंने हीं किया था लेकिन परमिशन विलंब से मिला। सारे स्पेशल ट्रेन चलाएं भी गए जिससे बड़ी तादाद में हमारे मेहनतकश घर लौटे व अभी आप ही रहे लेकिन हमारे कई मेहनतकश ऐसे स्थान पर फंसे हुए हैं जहां पर यातायात की व्यवस्था नहीं के बराबर है।  

दुर्गम जगहों से लाने के लिए फ्लाइट की व्यवस्था
जो दुर्गम जगहों पर हैं, ऐसे में हमने केन्द्र सरकार से हवाई जहाज से उनको लाने का भी परमिशन मांगा है। परमिशन देने से पहले ही देश में हवाई सुविधा प्रारम्भ कर दी गई लेकिन फिर भी अब हमारी तैयारी लेह लद्दाख में फंसे मजदूरों को लाने का है जो कि आप सकुशल अपने घर लौट भी चुके हैं।

सीएम ने बोला कि स्वास्थ्य क्षेत्र में अगर हम बात करें तो जिस तरह से आरंभ के दिनों में अफरातफरी की स्थिति मची थी, प्रदेश सरकार के सामने आज व्यक्तिगत अस्पताल में डिमांड रख रहे थे व प्रदेश सरकार भी केन्द्र सरकार से डिमांड कर रही थी, पीपीटी वेंटीलेटर की सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए थी। हालांकि बहुत हद तक स्थिति नियंत्रण में है।

टेस्टिंग टारगेट को जल्द करेंगे पूरा
हेमंत सोरेन ने बोला कि प्रदेश में कोई अफरातफरी की स्थिति नहीं है। हमारे पास पर्याप्त मात्रा में पीपीई की व उनसे जुड़े सामान उपलब्ध हैं। टेस्टिंग को लेकर जो टारगेट हमने निश्चित किया था, वह अब तक पूरा नहीं हो पाया है क्योंकि मशीन नहीं मिल पा रहा था व अब जो मशीन मिल रहा है तो व उनके अंदर जो कंपोनेंट होते हैं उसके कमी के कारण हम उतने टेस्ट नहीं कर पा रहे थे लेकिन हम अब अपनी जाँच के दायरे को बढ़ाएंगे।

करंट इन सेंट्रल को लेकर सवाल उठते हैं कि जिस तरह से आप बाहर से आए प्रवासियों को रखते हैं कई राज्यों की फोटोज़ विचलित करने वाली सामने आई थी लेकिन झारखंड सरकार ने किस तरह से तैयारी की है झारखंड में भी बड़े पैमाने पर मेहनतकश वापस लौट रहे हैं

सबको उपलब्ध कराया जा रहा है राशन
उन्होंने बोला कि जो प्रवासी मेहनतकश अपने प्रदेश वापस लौट रहे हैं, उनको राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। जिनके पास राशनकार्ड नहीं है, उनका कार्ड भी बनवाया जा रहा है व राशन की व्यवस्था की जा रही है। इसके अतिरिक्त हमारे प्रदेश से सड़क पर होते हुए जो मेहनतकश भी जा रहे हैं, उनके लिए भी हाइवे पर खाने की व्यवस्था की गई है, चाहे वह किसी भी प्रदेश के हो उन्हें सुरक्षित भोजन खिलाना व अपने घरों तक पहुंचाने का आदेश हमने अपने अधिकारियों को दे रखा है।

हाइवे पेट्रोलिंग टीम है सड़कों पर एक्टिव
हाइवे पर पेट्रोलिंग टीम की भी तैनाती की गई है कि कहीं भी पैदल चलते हुए नजर आए तो उन्हें अपने गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाएं। हमारे मरीज अच्छा होकर अपने घर जा रहे हैं। हमारे प्रदेश में कोरोनावायरस कम्युनिटी एक्सप्रेस की बातें सामने नहीं आई है जो भी संक्रमित के दायरे में आते हैं वह सभी अच्छा होकर अपने घर लौट रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चे भी अच्छा होकर अपने घर वापस लौट रहे हैं।

खनिज संपदा से भरपूर है झारखंड
हेमंत सोरेन से जब मजदूरों के लिए रोजगार के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने बोला कि जो भारी संख्या में श्रमिक घर लौट आए हैं उनके सामने रोजगार की समस्या है, लेकिन झारखंड खनिज संपदा से भरा पड़ा एक संपूर्ण प्रदेश जरूर है लेकिन तमाम नियंत्रण केन्द्र सरकार का होता है। इन सब चीजों पर हमारी कड़ी नजर है। प्रदेश को भी अपने पैर पर खड़ा करने के लिए काम योजना तैयार कर चुकी है।

शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में दिया जा रहा रोजगार
कई योजनाओं को हमने लॉन्च भी कर दिया व जो काम योजना है, उसको भी बहुत जल्द ही आपके सामने रखेंगे। शहरी क्षेत्र व ग्रामीण क्षेत्र में ही हम लोगों को रोजगार दे पाएं, हम इसकी तैयारी कर रहे हैं। पहले लोग संक्रमण से अच्छा हो जाएं, स्वास्थ्य वर्धक हो जाएं व वह कार्य पर ठीक ढंग से लौट आएं। फिर हम लोग उसके तैयारी में जुटे हैं कि श्रमिकों को किस स्कीम के वह कार्य कर सकते हैं उन्हें उस तरह की रोजगार देने के लिए हम तैयारी कर रहे हैं।

राज्य को पैसों के लिए केन्द्र पर निर्भर रहना पड़ता है
20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज पर सीएम ने बोला झारखंड सरकार को एक-एक रुपए के लिए केन्द्र सरकार की तरफ देखना पड़ता है। सिर्फ संक्रमण के समय की बात नहीं है, वह हमेशा से पैसों को लेकर के केन्द्र पर ही निर्भर रहना पड़ता है।

जब से GST इंपोज हुआ है तब से प्रदेश सरकार को आर्थिक संकटों से व भी अधिक जूझना पड़ता है। इस आर्थिक पैकेज को लेकर आर्थिक विशेषज्ञों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि ऊंट के मुंह में जीरा के फौरन की तरह ये पैकेज है। इससे हमारा प्रदेश आगे नहीं बढ़ सकता। इसे हम एक छोटा सा संगीत ही कह सकते हैं, मदद नहीं कह सकते हैं।

झारखंड के साथ किया जाता है सौतेला व्यवहार
केन्द्र की ओर से सौतेला व्यवहार किए जाने पर सीएम ने बोला कि अभी इस संक्रमण से पहले हम सभी निकल जाएं फिर केन्द्र के साथ जरूर बैठेंगे व इस विषय पर वार्ता करेंगे कि आखिर हमारे साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जाता है।  

उन्होंने बोला कि कोयला हमारे यहां से निकलता है लेकिन हमें उससे कुछ भी प्राप्त नहीं होता है। आखिर ऐसा क्यों होता है जो हमारा पिछला बकाया है उसके पेमेंट को लेकर भी हमने एक आवेदन भेजा है। झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों में सबसे पहले जो निवासी हैं, उनका अधिकार होना चाहिए।

आत्मनिर्भर हिंदुस्तान को लेकर सीएम ने बोला अर्थव्यवस्था का सीन सारे देश में टूट चुका है अर्थव्यवस्था को अच्छा करने की चुनौती अब देश के सामने हैं। देश व प्रदेश को मिलकर इस वक्त चलाना होगा प्रदेश सरकार को व केन्द्र सरकार को।  

केंद्र सरकार को प्रदेश सरकार का मदद करना होगा तभी इस संकट से हम निकल सकते हैं, लेकिन इस आर्थिक व्यवस्था को अच्छा करने के लिए केन्द्र को अपनी मुट्ठी जरूर खोलनी होगी।

किसान अब भी भगवान भरोसे
किसानों के स्थिति पर सीएम ने बोला 80 प्रतिशत लोग हमारे यहां कृषि पर निर्भर हैं। खेती से ही जोड़कर अपने ज़िंदगी चलाते हैं। आज के दिन भी बोला जा सकता है कि किसान भगवान के भरोसे ही चलते हैं ना कि सरकार के भरोसे। कब कौन सी आपदा का सामना किसानों को करना पड़े, इसका कोई हिसाब नहीं है।  

झारखंड ही नहीं सारे देश में किसानों की स्थिति बद्तर है इसलिए हमारी अहमियत है कि किसानों के लिए हमारे प्रदेश में कई ऐसी फसलें हैं जो हमारे प्रदेश में उसे तैयार करने में देरी नहीं लगेगी जैसे कि फूल का उत्पादन सबसे ज्यादा हमारे प्रदेश में होता है।  

देश में सबसे ज्यादा उत्पादन झारखंड में
देश में सबसे ज्यादा उत्पादन होता है तो वह हमारे प्रदेश में होता है लेकिन पता नहीं किस कारणों से पीछे रह जाता है इसी पर हम गंभीर होकर आगे इसकी स्थिति को सुधारने में जुटे हैं। सबसे अधिक देश में माइका का भी उत्पादन यही से होता है लेकिन क्यों उसकी स्थिति बेकार है इसको भी अच्छा करने में जुटे हैं।  

कहीं ना कहीं इससे पहले की व्यवस्था ने लोगों को नजरअंदाज किया है, हम इसे अच्छा करने को लेकर आगे की काम योजना बनाने में जुटे हैं। इस प्रदेश में व्यवसाय व व्यापारी को भी कोई परेशानी ना हो इसके लिए भी हम काम योजना बना रहे हैं। बंद पड़े उद्योगों को भी आरंभ करने की दिशा में हमने कदम बढ़ाया है। संक्रमण का दायरा समाप्त होने के बाद सभी चीजों को फिर से पटरी पर लाने की प्रयास हमारी है।