लॉकडाउन के बीच विभिन्न प्रांतों से श्रमिकों को लेकर ट्रेने पहुँच रही है गोरखपुर

 लॉकडाउन के बीच विभिन्न प्रांतों से श्रमिकों को लेकर ट्रेने पहुँच रही है गोरखपुर

कोरोना से बचाव के लिए देश भर में लागू लॉकडाउन के बीच विभिन्न प्रांतों से श्रमिकों को लेकर ट्रेनों के गोरखपुर आने का सिलसिला लगातार जारी है. अब तक 242 ट्रेनों से 2.57 लाख श्रमिक आ चुके हैं. 

शुक्रवार को भी यह सिलसिला जारी है. ट्रेनों से आ रहे यात्रियों को लाइन में लगवाकर उतारा जा रहा है. इसके बाद सबकी बारी-बारी थर्मल स्‍क्रीनिंग हो रही है. शुक्रवार को कुल छह ट्रेनें श्रमिकों को लेकर आएंगी. इनमें तिरुवल्लूर, वैष्णो देवी कटरा, सूरत, चंडीगढ़ से एक-एक तथा दो वापी, गुजरात से दो ट्रेनें आनी हैं. 

गुरुवार को 16 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें आईं थीं. इनसे 11307 श्रमिक व उनके परिवार वाले आए. सभी को लाइन में लगवाकर उतारा गया व थर्मल स्क्रीनिंग कराकर भेजा गया. गोरखपुर में श्रमिकों को लेकर आईं ट्रेनों को प्लेटफॉर्म एक, दो और नौ पर लाया गया. यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर सांसद कमलेश पासवान व जीआरपी के सामुदायिक किचन की ओर से भिन्न-भिन्न स्टॉल लगाकर लंच पैकेट व नाश्ता दिया गया. वहीं जिला प्रशासन की ओर से भी लंच पैकेट व पानी की बोतलें दी गई. जीआरपी कंट्रोल रूम के आंकड़ों के मुताबिक झांसी से आई ट्रेन में 23 कोच लगे थे व यात्री मात्र 248 ही आए. इसी तरह पुणे से आई ट्रेन भी 24 कोच वाली थी व यात्री 639 उतरे. सूरत से आई ट्रेन में 259 तथा देहरादून से आई श्रमिक स्पेशल में 824 श्रमिक व उनके परिवार वाले आए. यात्रियों का मार्गदर्शन करने के लिए कौवाबाग चौकी इंचार्ज राजाराम द्विवेदी, असुरन चौकी इंचार्ज आनन्द मिश्रा, बबलू, टीटीई रवि पाण्डेय, टीएन पाण्डेय, शार्दुल, जेपी सिंह, मोहन पाण्डेय, संजय कश्यम, रंजीत प्रजापति व अफजल अहमद प्रमुख रूप से शामिल थे.  

पलायन के लिए महाराष्ट्र सरकार को जिम्मेदार मानते हैं श्रमिक
गुरुवार को दोपहर तीन बजे मुम्बई से गोरखपुर आई श्रमिक स्पेशल आए यात्रियों ने अपने इस पलायन का जिम्मेदार महाराष्ट्र सरकार को ठहराया है. भटनी के रहने वाले संजू ने बताया कि वह वहां स्कै्रप फैक्ट्री में कार्य करते थे. लॉकडाउन से बेरोजगार हो गए. बताया कि बेरोजगारी के बाद भी रह लेते अगर वहां भोजन मिलता रहता. अब जब मैं गोरखपुर आ गया तो वहां से फोन आ रहा है कि आ जाओ फैक्ट्री चलने वाली है. वहीं भाटपार रानी के चंदन भी अपनी इस दुदर्शा का जिम्मेदार महाराष्ट्र की सरकार को मानते हैं. चंदन का बोलना है कि वहां दशा बद से बदतर हो गए थे. अगर कुछ दिन व रहते तो कोरोना से पता नहीं भूख से जरूर मर जाते.