आगरा: वृद्ध महिलाएं समाज की बंदिशों को तोड़ कर मिटा रही हैं अज्ञानता का अंधियारा

आगरा:  वृद्ध महिलाएं समाज की बंदिशों को तोड़ कर मिटा रही हैं अज्ञानता का अंधियारा

आगरा: बहुत से काम हम सिर्फ इस वजह से नहीं कर पाते हैं कि लोग क्या कहेंगे, लेकिन लोगों की परवाह न किए बगैर 55 वर्ष की उम्र में ये बुजुर्ग महिलाएं अब विद्यालय जा रही हैं अब उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग क्या कहेंगे हम आपको ऐसी स्त्रियों से मिलाने जा रहे हैं, जिन्होंने रूढ़िवादी सोच से अपने आप को आजाद किया है यह आजादी इन्हें इस बात से मिली है कि अब ये किसी भी उम्र में विद्यालय जा कर पढ़ सकती हैं आगरा के दयालबाग की बुजुर्ग महिलाएं 55 वर्ष की उम्र में विद्यालय जा रही हैं जिस विद्यालय में उनके घर के छोटे बच्चे पढ़ते हैं, उसी विद्यालय में वह भी पढ़ कर अज्ञानता के अंधकार को मिटा रही हैं

यहां पोता-पोतियों के साथ विद्यालय जाती हैं दादियां
आगरा के दयालबाग के खेल गांव स्थित ‘एक पहल पाठशाला’ है इस पाठशाला में 55 से 60 उम्र की अनेक महिलाएं अब विद्यालय आती हैं खास बात यह है कि इसी विद्यालय में उनके पोते और पोतियां भी पढ़ती हैं एक ही विद्यालय में दादी पढ़ाई करते हैं तो वहीं दूसरी क्लास में उनके पोते और पोतियां साथ ही घर पहुंच कर पोते पोतियां दादियों को ट्यूशन भी देते हैं घर वालों का भी पूरा योगदान मिल रहा है

पढ़ने लिखने की नहीं होती कोई उम्र
दयालबाग के आसपास के क्षेत्रों की लगभग 60 महिलाएं ऐसी हैं जिनमें से कई 55 वर्ष की उम्र पूरी कर चुकी हैं सबकी भिन्न-भिन्न कहानियां हैंइनमें से एक दयालबाग की ही रहने वाली गुड्डी देवी हैं जो राशन की दुकान पर जब राशन लेने के लिए जाती थीं तो वहां उन्हें हर बार अंगूठा लगाना पड़ता था जिससे उन्हें शर्मिंदगी भी महसूस होती थी इसी शर्मिंदगी को उन्होंने हथियार बनाया और अब वह विद्यालय में पढ़ रही हैं गुड्डी देवी जैसी अनेक स्त्रियों हैं, जिन्होंने उम्र की सीमाओं को त्याग कर साक्षर बन रही हैं

एक पहल पाठशाला दे रही निःशुल्क शिक्षा
‘एक पहल पाठशाला’ की बदौलत ही संभव हो पाया कि ये बुजुर्ग महिलाएं अब विद्यालय जा रही हैं.2009 में इसी आशा के साथ मनीष राय और सहयोगी ने ‘एक पहल पाठशाला’ एनजीओ की आरंभ की थीअब वे अनेक गरीब बच्चों और स्त्रियों को निःशुल्क शिक्षा देकर उन्हें स्वाबलंबी बना रहे हैंवर्तमान में इस पाठशाला में लगभग 600 से अधिक बच्चे निःशुल्क पढ़ते हैं और इसी विद्यालय में 60 से अधिक महिलाएं हैं भी शिक्षा ग्रहण कर रही हैं

आसान नहीं था इन बुजुर्ग स्त्रियों को विद्यालय तक लाना
एक पहल पाठशाला की सदस्य शुभांगी बताती है कि आरंभ में आसान नहीं थामहिलाओं को इस उम्र के पड़ाव पर विद्यालय तक लाना आरंभ में इन स्त्रियों को जोड़ने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ीअब शिक्षा के साथ-साथ इन स्त्रियों को स्वावलंबी बनाया जा रहा हैपढ़ाई के साथ साथ सिलाई कढ़ाई औऱ कंप्यूटर की भी शिक्षा निःशुल्क दी जा रही हैअब इस विद्यालय में गुड्डी देवी, ममता वर्मा, रेखा सिंह ,मंजू देवी जैसी अनेक गृहणियां अपने घर की जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ विद्यालय आती हैं