शाकिब अल हसन के बाद अब बीसीबी कर रहा अंपायरों की किरदार की जांच

शाकिब अल हसन के बाद अब बीसीबी कर रहा अंपायरों की किरदार की जांच

इन दिनों ढाका प्रीमियर लीग चर्चा में है. हाल ही टूर्नामेंट में बांग्लादेश के ऑलराउंडर शाकिब अल हसन ने मैदान पर गुस्सा करते हुए स्टंप को लात मारी थी और अंपायर के साथ गलत व्यवहार किया था. इसके बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने शाकिब अल हसन पर कार्यवाही करते हुए जुर्माने के अतिरिक्त तीन मैचों का बैन भी लगाया है. शाकिब अल हसन ढाका प्रीमियर लीग में खेल रहे थे और उन्होंने अंपायर के निर्णय से नाराज होकर विकेटों पर लात मार दी थी. हालांकि बाद में शाकिब ने बाद में इस पर माफी भी मांग ली थी. शाकिब के बाद अब ढाका प्रीमियर लीग के अंपायर भी मुश्किल में नजर आ रहे हैं.

अंपायरों की किरदार की जांच
रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ढाका प्रीमियर लीग के अंपायरों की किरदार की जाँच कर रहा है. अंपायरों पर जान-बूझकर गलत निर्णय देने का आरोप लगा है. बताया जा रहा है कि बीसीबी ने पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जो अंपायरों की किरदार की जाँच कर रही है. इतना ही नहीं यदि अंपायर जाँच में दोषी पाए गए तो उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी. रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि ढाका की क्रिकेट कमेटी और बीसीबी ने ढाका प्रीमियर लीग के 9 कप्तानों से बात की है और अंपायरिंग के बारे में उनकी राय जानी है.

अंपायरों के स्तर में सुधार जरूरी
रिपोर्ट के अनुसार, जाँच कमेटी के अध्यक्ष और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के डायरेक्टर शेख साहिल ने बताया कि अब तक 6 कप्तानों से बात हो चुकी है औार 3 कप्तानों से वार्ता होना बाकी है. शेख साहिल ने बताया कि अंपायरिंग पर बहुत ज्यादा अधिक चर्चा हो रही है. रिपोर्ट के अनुसार, जिन कप्तानों से बात हुई है उनका बोलना है कि अंपायरों के स्तर में सुधार महत्वपूर्ण है. शेख साहिल ने बताया कि उन्होंने कप्तानों से टकराव से बचने के लिए सुझाव भी मांगे हैं.

जरूरत पड़ने पर कार्रवाई भी होगी
शेख साहिल ने बताया कि उन्होंने कप्तानों की बात सुनी और अभी तीन कप्तानों से बात होना शेष है. साथ ही उनका बोलना हे कि बांग्लादेश ने क्रिकेट में बहुत ज्यादा अधिक तरक्की की है और अंपायरिंग के मोर्चे पर भी यही चाहते हैं. उनका बोलना है कि यदि अंपायरों की किरदार पर प्रश्न उठेंगे तो आवश्यकता पड़ने पर उनपर भी कार्रवाई भी होगी.


पहली पारी में इंग्लैंड के खिलाफ भारतीय तेज गेंदबाज क्यों रहे इतने सफल

पहली पारी में इंग्लैंड के खिलाफ भारतीय तेज गेंदबाज क्यों रहे इतने सफल

इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट मैच की पहली पारी में भारतीय तेज गेंदबाजों ने मेजबान टीम के बल्लेबाजों को टिकने का मौका नहीं दिया और पूरी टीम 183 रन के स्कोर पर आउट हो गई। पहली पारी में जसप्रीत बुमराह ने सबसे ज्यादा चार विकेट लिए थे तो वहीं मो. शमी को तीन सफलता मिली थी। शार्दुल ठाकुर को दो तो वहीं मो. सिराज ने पहली पारी में एक विकेट लिए थे। पहली पारी में भारतीय गेंदबाजों की शानदार गेंदबाजी के बाद शमी ने बताया कि, किस तरह से उन्होंने इंग्लिश बल्लेबाजों को बैकफुट पर ला दिया। उन्होंने कहा कि, उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि, वो कहां पर खेल रहे हैं। वो किसी भी तरह की कंडीशन में बस अपने खेल पर विश्वास करते हैं। 

मो. शमी ने कहा कि, टेस्ट मैच धैर्य का खेल है। भूल जाओ कि पहले क्या हुआ है, हमें मौजूदा स्थिति के बारे में सोचना होता है, हमें अधिक दिमाग नहीं लगाना होता।'  शमी ने कहा, 'मेरे नजरिए से टेस्ट मैचों में सामान्य सी बात है, आप जितना अधिक अपने बेसिक्स पर ध्यान दोगे उतना अधिक आपके सफल होने की संभावना होगी। अगर आप जरूरत से ज्यादा सोचोगे तो आप रन लुटाओगे और गैरजरूरी दबाव बनेगा।' हमने यही किया और इंग्लैंड के खिलाफ पहली पारी में सफल रहे। 


उन्होंने आगे कहा कि, मुझे नहीं पता कि मैं इंग्लैंड में विकेट क्यों हासिल नहीं कर पाता (हंसते हुए)। लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया या कहीं और खेल रहा हूं, मैं अपने कौशल पर भरोसा करता हूं।' उन्होंने कहा, 'यहां तक कि जब मैं नेट्स पर गेंदबाजी कर रहा था तब भी हालात को परखने की कोशिश कर रहा था और इसी के हिसाब से प्लान बनाया। इसके बाद मैच में इसे लागू करने की कोशिश की।' यहां पर हमारा प्लान काम कर गया और हमें सफलता मिली।