जानिए, टीम इंडिया के पूर्व कैप्टन सौरव गांगुली ने भारतीय क्रिकेट को क्या-क्या दिया?

जानिए, टीम इंडिया के पूर्व कैप्टन सौरव गांगुली ने भारतीय क्रिकेट को क्या-क्या दिया?

महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) ने भले ही टी20 वर्ल्ड कप, वनडे वर्ल्ड कप व चैंपियंस ट्रॉफी जीती हों लेकिन इसके बावजूद उन्हें एक ऐसे भारतीय कैप्टन से टक्कर मिलती है जो ये सब ट्रॉफियां ना जीतने के बावजूद फैंस के दिलों में एक खास स्थान रखता है।

 बात हो रही है टीम इंडिया के पूर्व कैप्टन सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) की, जो आज अपना 48वां जन्मदिन मना रहे हैं। सौरव गांगुली ने भारतीय क्रिकेट को फर्श से अर्श तक पहुंचाया। उसे एक ऐसी राह दिखाई, जिसके बाद टीम इंडिया दशा, दिशा व सोच पूरी तरह बदल गई। आइए आपको बताते हैं सौरव गांगुली ने भारतीय क्रिकेट को क्या-क्या दिया?

गांगुली कैसे बने दादा?
वैसे तो बंगाली में दादा का मतलब बड़ा भाई होता है लेकिन सौरव गांगुली  (Sourav Ganguly) दबंग किस्म के दादा थे। जो टीम इंडिया 90 के दशक में बेहद शांत तरह का क्रिकेट खेलती थी। गांगुली ने कैप्टन बनने के बाद उसकी सोच ही बदल डाली। वो गांगुली ही थे जिन्होंने टीम इंडिया को आक्रामक क्रिकेट खेलना का मंत्र दिया। यही वजह रही कि घर पर शेर कही जाने वाली टीम इंडिया ने विदेश में भी सीरीज जीतनी प्रारम्भ की।

सौरव गांगुली  (Sourav Ganguly) टीम इंडिया को 20 से ज्यादा टेस्ट मैच जिताने वाले पहले भारतीय कैप्टन बने। गांगुली की कप्तानी में टीम इंडिया ने 21 टेस्ट मैच जीते। हालांकि उनके इस आंकड़े को पहले धोनी व उसके बाद विराट कोहली ने पछाड़ दिया लेकिन, यकीन मानिए जिस तरह से गांगुली ने नयी टीम में नयी सोच पैदा की वो हकीकत में काबिलेतारीफ है।

गांगुली से जुड़ी दिलचस्प बातें
सौरव गांगुली  (Sourav Ganguly) को बाएं हाथ के बल्लेबाजों से बेहद प्यार है। ऐसा बोला जाता है कि उन्हें संसार के हर बाएं हाथ के बल्लेबाज के आंकड़े रटे हुए हैं। गांगुली खुद हिंदुस्तान के महानतम बाएं हाथ के बल्लेबाज माने जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गांगुली पहले दाएं हाथ से खेलते थे। लेकिन उनके भाई स्नेहाशीष बाएं हाथ से सब कार्य करते थे व उन्हें देखकर गांगुली ने बाएं हाथ से खेलना प्रारम्भ किया।

सौरव गांगुली का पहला प्यार फुटबॉल था लेकिन बड़े भाई स्नेहाशीष ने उन्हें क्रिकेट के के लिए प्रेरित किया। संयोग देखिए बाद में गांगुली ने अपने बड़े भाई स्नेहाशीष की स्थान बंगाल रणजी टीम में ली।

गजब का टेस्ट डेब्यू
सौरव गांगुली  (Sourav Ganguly) ने अपना टेस्ट डेब्यू वर्ष 1996 में लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान में किया। गांगुली ने पहले ही मैच में 131 रन की शानदार पारी खेली। वो पहले टेस्ट में ही शतक जड़ने वाले संसार के तीसरे बल्लेबाज बन गए। बता दें सचिन तेंदुलकर अपने सारे करियर में लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर शतक नहीं लगा सके, लेकिन दादा ने इसे डेब्यू मैच में ही कर दिखाया।

हालांकि सौरव गांगुली ने सचिन के साथ एक बेहद ही खास रिकॉर्ड बनाया है, जिसे आजतक कोई नहीं तोड़ सकता है। सचिन व सौरव गांगुली के नाम वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा रनों की साझेदारी का वर्ल्ड रिकॉर्ड है। इन दोनों दिग्गजों ने 176 वनडे में 8277 रनों की साझेदारी की है।

सौरव गांगुली ने हिंदुस्तान के लिए 113 टेस्ट मैचों में 7212 रन बनाए, जिसमें उनके बल्ले से 16 शतक निकले। वनडे में भी गांगुली ने 311 मैचों में 11,363 रन बनाए व उन्होंने कुल 22 शतक ठोके। इसके अतिरिक्त गांगुली के नाम वनडे में 100 व टेस्ट मैचों में 32 विकेट भी हैं।