भारतीय घरेलू दिग्‍गज राजिंदर गोयल ने संसार को कहा अलविदा, जाने कैसे

भारतीय घरेलू दिग्‍गज राजिंदर गोयल ने संसार को कहा अलविदा, जाने कैसे

भारतीय घरेलू दिग्‍गज राजिंदर गोयल (Rajinder Goel) ने संसार को अलविदा कह दिया। अपने 24 वर्ष के करियर में इस गेंदबाज ने कुल 750 विकेट लिए। इतनी प्रतिभा होने के बावजूद हिंदुस्तान के लिए खेलने का उनका सपना अधूरा ही रहा। 

उन्‍हें कभी टीम इंडिया में स्थान नहीं मिली। इस बारे में उनका मानना था कि वो गलत समय पर पैदा हुए। एक बार एक साक्षात्कार में उन्होंने टीम इंडिया में न चुने जाने को लेकर खुद इस बात को स्वीकार किया था कि मेरी भाग्य में टेस्ट क्रिकेट खेलना नहीं लिखा था। मुझे लगता है कि मैं गलत समय पर पैदा हुआ था। मेरे खेलने के वक्त भिन्न-भिन्न जोन से खेलने वाले बाएं हाथ के अच्छे स्पिनर थे। उस समय बिशन सिंह बेदी (Bishan Singh Bedi) को मौका मिलता रहा। यहां तक कि एक मैच से बेदी के बाहर होने के बावजूद गोयल को मौका नहीं मिला।
गोयल के निधन पर बिशन सिंह ने बोला कि गोयल महान स्पिनर थे, मगर उन्‍हें कभी मौका नहीं मिला। वह उनके निधन की समाचार सुनकर दुखी हैं। बेदी ने बोला कि गोयल ने कभी नहीं बताया कि वो कैंसर से लड़ रहे थे। वो ऐसे व्‍यक्ति थे, जो किसी वस्तु की शिकायत नहीं करते थे।

प्रतिभा के साथ अन्‍याय
टाइम्‍स ऑफ इंडिया से बात करते हुए बेदी ने बोला कि यह उनकी प्रतिभा के साथ अन्‍याय था कि 750 फर्स्‍ट क्‍लास विकेट लेने के बावजूद उन्‍हें कभी टीम इंडिया की कैप पहनने का मौका नहीं मिला। मगर गोयल को इसका कोई मलाल नहीं था। वह हमेशा ही संतोष स्‍वभाव के थे।

73 वर्ष के इस दिग्‍गज खिलाड़ी ने बोला कि लोगों को लगता है कि मेरी वजह से गोयल को टीम इंडिया में स्थान नहीं मिल पाई, क्‍योंकि दोनों ही लेफ्ट आर्म ऑर्थोडॉक्स स्पिनर थे। मगर यह पूरी तरह हकीकत नहीं है। गोयल ने मुझसे पहले क्रिकेट प्रारम्भ किया था व मेरे बाद में खत्‍म किया। बेदी ने बोला कि जब मैंने डेब्‍यू किया था तो वो मुझसे बेहतर गेंदबाज थे, मगर मैं भाग्‍यशाली रहा। उन्‍होंने बताया कि 1974-75 में क्लाइव लॉयड की अगुआई वाली वेस्टइंडीज के विरूद्ध बेंगलुरु टेस्ट में मुझे अनुशासनात्क कारण के चलते बाहर किया था। उस समय भी गोयल को मौका नहीं दिया। अगर उन्‍हें मौका दिया गया होता तो हिंदुस्तान वो मैच जीत गया होता।