भारत अंडर 19 के इस खिलाड़ी को नहीं तोड़ पायी ये एक पराजय, पढ़े

भारत अंडर 19 के इस खिलाड़ी को नहीं तोड़ पायी ये एक पराजय, पढ़े

अंडर 19 वर्ल्ड कप (Under 19 World Cup) में हिंदुस्तान का सफर निराशजनक रूप से समाप्त हुआ। फाइनल में हिंदुस्तान को बांग्लादेश के हाथों तीन विकेट से पराजय का सामना करना पड़ा था। मुकाबले में भारतीय बल्लेबाज व गेंदबाज दोनों ही विफल रहे। 

मगर भारतीय खेमे में एक ऐसा प्लेयर उपस्थित था, जो टूनामेंट के पहले मैच से लेकर आखिरी तक मैदान पर टिका रहा। सिर्फ बल्ले से ही नहीं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर गेंदबाजी भी की व सफलता हासिल की, मगर जब टीम मैच पराजय रही थी तो 18 वर्ष के इस बल्लेबाज की एक फोटो ने सारे देश के दिल को दहला दिया। फोटो थी- हाथ जोड़कर आसमान की ओर देखने की, जिससे हिंदुस्तान का यह युवा बल्लेबाज भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि कुछ तो कर दो। इस बल्लेबाज को लगने लगा था कि बल्लेबाजी, गेंदबाजी, सब कुछ करने के बाद भी वह टीम को जीत नहीं दिला पा रहा तो शायद ऊपर वाले से की गई एक प्रार्थना ही टीम को जीत दिला दे।

मगर शायद ऊपर वाले ने इस बल्लेबाज के लिए कुछ बड़ा सोच रखा है, इसीलिए उस समय बात नहीं मानी।   आंसूओं के साथ अंडर 19 वर्ल्ड कप (Under 19 World Cup)  में इस बल्लेबाज का भी सफर समाप्त हो गया। मगर अंत ही शुरुआत है, ये तो सबने सुना होगा। वर्ल्ड कप में निराशजनक सफर समाप्त होने के साथ ही इस बल्लेबाज का एक नया सफर प्रारम्भ हो गया  व यह बल्लेबाज अपने सफर पर निकल भी गया। अपनी मंजिल हासिल करने, अपना अधूरा सपना पूरा करने, अपने प्रयत्न को अंजाम तक पहुंचाने, संसार को अपने बल्ले की ताकत दिखाने व ये बताने की यशस्वी जायसवाल (Yashasvi Jaiswal) को एक पराजय तोड़ नहीं सकती। अभी बहुत जीत हासिल करना बाकी है।


टूर्नामेंट का अनुभव कैसा रहा?

अनुभव बहुत ज्यादा शानदार रहा। इस टूर्नामेंट से बहुत ज्यादा कुछ सीखने को मिला। इंटरनेशनल स्तर पर आईसीसी (ICC) के बड़े इवेंट में दबाव में खेलने का अनुभव मिला। सभी टीम से चुनौती मिली व उस चुनौती को किस रणनीति के साथ हैंडल करना है, पाक के विरूद्ध अलावा दबाव वाले मुकाबले में किस मानसिकता के साथ उतरना है। ये सब कुछ इसी टूर्नामेंट से सीखने को मिला।

पाकिस्तान के विरूद्ध मुकाबले के दौरान दिमाग में क्या चल रहा था?
इस मुकाबले को बाकी मुकाबलों की ही तरह लिया। मैदान पर सिर्फ यही सोचकर उतरा कि विकेट नहीं गंवाना। इसके बाद बल्ले से अच्छे शॉट्स लगने प्रारम्भ हो गए व बहुत ज्यादा कुछ कंट्रोल में आ गया था। जिसके बाद शतक जड़ दिया। मगर पारी के दौरान शतक के बारे में बिल्कुल भी नहीं सोच रहा था। 

बांग्लादेश से मिली पराजय का जिम्मेदार कौन?
फाइनल में पूरी टीम ने मेहनत की थी।   बांग्लादेश की चुनौती को भी सरल नहीं समझा था। हमारी रणनीति विपक्षी टीम को 230 रनों के इर्द गिर्द का लक्ष्य देने की थी, मगर ऐसा नहीं हो पाया व हम सिर्फ 177 रन ही बना पाए। अगर हम अलावा 33 रन नहीं देते तो शायद परिणाम कुछ व होता। ये 33 रन भारी पड़े। हमारी टीम एकजुट होकर खेली। पराजय जीत तो चलती रहती है।

फाइनल में भगवान ही आखिरी उम्मीद?
जब पराजय दिखने लगी थी तो भगवान ही आखिरी उम्मीद बचे थे। इसीलिए बाउंड्री पर फील्डिंग करते हुए हाथ जोड़कर उनसे यही कह रहा था कि भगवान कुछ कमाल कर दो। ये करने के अतिरिक्त कुछ बचा भी नहीं था।

फाइनल में बाद दोनों टीमों के बीच क्या हुआ था, बाद में क्या इस पर बात हुई?
मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता, क्योंकि इस दौरान मैं मैदान से बाहर था। ड्रेसिंग रूम में भी हम सबने इस मुद्दे पर कोई बात नहीं की। बस इतना ही बोला कि जो हो गया, उसे जाने दो।

प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट की ट्रॉफी ट्रैवलिंग में ही टूटी?
हर किसी को ऐसा लग रहा है कि वो मैंने तोड़ी है। मगर ऐसा नहीं हैं। मैं इस ट्रॉफी का सम्मान करता हूं, क्योंकि इस ट्रॉफी को हासिल करने के लिए मैंने बहुत ज्यादा मेहनत की है। मुझे मालूम ही नहीं चला कि वो कब टूट गई। शायद ट्रैवलिंग के दौरान सामान इधर से उधर करने में टूट गई। मैं फाइनल ही पराजय से सिर्फ दुखी था, नाराज नहीं था कि ट्रॉफी ही तोड़ दूं।

सीनियर टीम के लिए पृथ्वी शॉ, शुभमन गिल से मुकाबला मानते हैं?
नहीं, बिल्कुल नहीं, इस मुद्दे में मेरा मानना है कि वो अपना कार्य कर रहे हैं व मैं अपना कार्य कर रहा हूं। अगर मैं अच्छा करूंगा तो मुझे मौका मिलेगा, वो लोग करेंगे तो उन्हें मौका मिलेगा। बाकी कार्य चयनकर्ताओं का हैं। मुझे जब भी मौका मिलेगा, मैं प्रदर्शन करुंगा।

अपने पहले आईपीएल को लेकर कितने उत्साहित हैं?
राजस्‍थान रॉयल्स से मौका मिला। टीम में स्टीव स्मिथ (Steve Smith), बेन स्टोक्स (Ben Stokes) जैसे वर्ल्ड क्लास खिलाड़ी हैं। जिनसे बहुत ज्यादा कुछ सीखने को मिलेगा। आईपीएल की तैयारियां प्रारम्भ की दी है व मौका मिला तो वहां पर कोई कमी नहीं छोडूंगा।

मुंबई की सड़कों पर पानी पूरी बेचने की पूरी कहानी क्या है?
जब मुंबई आया तो आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। टेंट में रहता था, तो उसी समय एक पानी पूरी बेचने वाले अंकल के यहां पर कार्य करने लग गया, जिससे थोड़ा बहुत खर्चा निकल जाता था। करीब दो वर्ष तक पानी पूरी बेची। मगर ज्वाला सर के पास आने के बाद पूरा ध्यान सिर्फ खेल पर लगाया व इस बात को करीब छह वर्ष हो गए हैं।